- कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ अपने परिवार और देश के लिए कार्य करते हैं वही महान कहलाता है ऐसे व्यक्तियों का पूरा जीवन प्रेरणादायक होता है इन्हें शाहिद होने के बाद भी लोग दिल से याद करते हैं ऐसी ही एक महान हस्ती का नाम है अमर भगत सिंह जो अपने 23 वर्ष की उम्र में देश के प्रति शहीद हो गए अमर शहीद भगत सिंह ने अपने देश के लिए अभूतपूर्व कार्य किए।
नाम - भगत सिंह
जन्म - 28 सितंबर 1907
जन्म स्थान - बंगा चक्क, न• 105 ,गुरैरा ब्रांच,वर्तमान लायलपुर( पाकिस्तान)
माता - पिता - विद्यावती एवं सरदार किशन सिंह
मृत्यु - 23 मार्च 1931 (शाम 7:33 मिनट पर लाहौर षड्यंत्र केस में फांसी)
पैतृक गांव - खटकड़कलां ,पंजाब
परिवार - संपूर्ण परिवार स्वाधीनता सेनानी पिता और चाचा अजीत सिंह लाला लाजपत राय के सहयोगी अजीत सिंह को मांडले जेल में देश निकाला दिया था। बाद में विदेशों में जाकर मुक्ति संग्राम का संचालन करने लगे। छोटे चाचा सरदार स्वर्ण सिंह भी जेल गए और जेल की यातनाओं के कारण 1910 में उनका निधन हुआ। भगत सिंह की शहादत के बाद उनके भाई कुलबीर सिंह और करतार सिंह को देवली के जेल में रखा गया था जहां वह 1946 तक रहे पिता अनेक बार जेल गए।
शिक्षा - पहले 4 साल की प्राइमरी शिक्षा अपने गांव बंगा में। फिर लाहौर के डी•ए•वी• स्कूल से वर्ग 9 तक की पढ़ाई की। बाद में नेशनल कॉलेज लाहौर से एफ• ए• किया बी•ए• के दौरान पढ़ाई छोड़ दी और क्रांतिकारी दल में शामिल हो गए।
भगत सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा - बचपन में करतार सिंह सराभा और 1914 के गदर पार्टी के आंदोलन के प्रति तीव्र आकर्षण। सराभा की निर्भीक कुर्बानी का मन पर स्थाई और गहरा असर। 16 नवंबर 1915 को सराभा की फांसी के समय भगत सिंह की उम्र 8 वर्ष थी। वे सराभा का चित्र अपनी जेब में ही रखते थे।
भगत सिंह की गतिविधियां - 12 वर्ष की उम्र में जलियांवाला बाग की मिट्टी लेकर क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत। 1922 में चोरा चोरी कांड के बाद 15 वर्ष की उम्र में कांग्रेस और महात्मा गांधी से मोहभंग। 1923 में पढ़ाई और घर छोड़कर कानपुर गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र प्रताप में सेवाएं दी। 1926 में अपने नेतृत्व में पंजाब में नौजवान भारत सभा का गठन किया जिसकी शाखाएं विभिन्न शहरों में स्थापित की गई। 1928 से 31 तक चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ का गठन किया और क्रांतिकारी आंदोलन सघन रूप से छेड़ दिया। 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ केंद्रीय असेंबली में बम फेंका और गिरफ्तार हुए।
भगत सिंह की पहली गिरफतारी - अक्टूबर 1926 में दशहरा मेले में हुए बम विस्फोट के कारण मई 1927 में हुई गिरफ्तारी भगत सिंह की।
भगत सिंह की कृतियां - पंजाब की भाषा तथा लिपि की समस्या ( हिंदी में 1924) विश्व प्रेम ( कोलकाता के मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) युवक (मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) मैं नास्तिक क्यों हूं (1930-31) अछूत समस्या, विद्यार्थी और राजनीति, सत्याग्रह और हड़ताल, बम का दर्शन , भारतीय क्रांति का 810 आदि अनेक लेख, पिपलिया एवं पत्र जो अलग-अलग प्रकाश को द्वारा भगतसिंह के दस्तावेज के रूप में प्रकाशित। सचिंद्र नाथ सान्याल की पुस्तक बंदी जीवन और डाउन विभिन्न की आत्मकथा का अनुवाद। जेल डायरी भी लिखी और निम्नांकित 4 पुस्तकें भगत सिंह के द्वारा लिखी बताई जाती है जो अप्रिय है समाजवाद का आदर्श, आत्मकथा, भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास और मौत के दस्तावेज पर।
अमर शहीद भगत सिंह आधुनिक भारतीय इतिहास की एक पवित्र स्मृति है। भारत राष्ट्र के लोकमान्य में उनकी युवा सभी अमित होकर बस गई है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले हजारों लोगों तथा लाखों स्वाधीनता सेनानियों की प्रेरणा और उत्सव पूर्ण कार्यों के लिए स्थाई प्रतीक और प्रतिनिधित्व है। उनके कार्यों और उनके बलिदान के जनता के हृदय में सदा संगति रहने वाली राष्ट्रीयता की ज्योति चेतना का निर्माण किया है। राष्ट्रीयता देश भक्ति क्रांति और युवा शक्ति के हुए प्रेरणा पुंज प्रतीक है। यह अमर पद उन्होंने लगभग 23 वर्षों में ही हासिल कर लिया था।
अमर भगत सिंह ने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर - मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था।
स्वाधीनता सेनानियों के परिवार में जन्म पाकर उन्होंने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था। उनके भीतर इच्छा संकल्प विचार और कर्म की सुदृढ़, अजेय और आमोद शक्ति की स्वतंत्रता के लिए अप राज्य संघर्ष तथा सामाजिक समानता न्याय और सब की खुशहाली पर टिकी समाज व्यवस्था के लिए क्रांति के स्वप्न के रूप में उन्हें ऐसा कुछ प्राप्त हो गया था इसके आगे मिर्ची बहुत छोटी और तुच्छ पड़ गई। नश्वर जीवन के इस महिमा में मूल्य बोध के चलते ही उन्होंने हंसते हंसते फांसी का फंदा अपने गले लगा लिया और झूल गए। सचमुच वे उस पथ पर बढ जिसके आगे राह नहीं थी।
भगत सिंह को लाहौर में छात्र जीवन में अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ट जागरूक युवकों से दोस्ती हो गया था -
भगत सिंह का विकास आरंभ से ही उद्देश्य के प्रति समर्पित एक प्रबुद्ध नौजवान के रूप में हुआ। लाहौर में छात्र जीवन में ही उनका संग साथ अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ठा जागरूक युवकों से हो गया था। इनमें अनेक आगे चलकर उनके साथ ही क्रांतिकारी बने। एक जागरूक छात्र के रूप में उनकी दृष्टि देश दुनिया की हलचल और गतिविधियों पर हमेशा बनी रही। अपनी रुचि की पुस्तकें जिनमें साहित्य, राजनीति, दर्शन ,इतिहास आदि विषयों की पुस्तकें हुआ करती थी उन्होंने खूब पढ़ी थी और उनसे प्राप्त ज्ञान के प्रकाश में अपने देश समाज आदि के बारे में सोच विचार करते रहते थे। उनकी मानसिक जागरूकता सोच विचार और प्रभुता वह कारण थी कि घर छोड़ने के बाद कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी के पास चले गए आए और वहां उनके पत्र प्रताप को अपनी सेवाएं दी। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार लेख लिखें और उनमें से अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाएं। एक चिंतक विचारक के रूप में समाजवाद और मार्क्स एंगल्स की विचारधारा से लगातार प्रभावित और अनूप प्रमाणित होते रहे। क्रांति और समाज व्यवस्था को लेकर उनकी सोच इन विचारों से प्रभावित थी। राजनीतिक चिंतन और विचार के धरातल पर वे अपने समकालीनओं से प्राय आगे दिखाई पड़ते हैं।

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