शनिवार, 30 अप्रैल 2022

सुशांत सिंह राजपूत का जीवन परिचय


                         परिचय

 अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 1 जनवरी 1986 में पटना,बिहार में हुआ था। बॉलीवुड के चहेते और बेहतरीन कलाकारों में से एक थे, सुशांत ने अपने मेहनत और काबिलियत के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाये थे। अभिनेता होने के साथ ही वह एक लाजवाब डांसर भी है 31 वर्ष के सुशांत का जन्म बिहार के पटना में हुआ है उनके पिता का नाम के• के• सिंह है जो कि एक सरकारी अफसर रह चुके हैं और उनकी माता का नाम किसी को भी नहीं पता है लेकिन 2002 में उनकी मृत्यु हो गई थी सुशांत की चार बहने हैं जिनमें से उनकी बड़ी बहन मीतू सिंह राज्य स्तर की क्रिकेटर खिलाड़ी है सुशांत के स्कूल की पढ़ाई पटना के सेंट केरेंस हाई स्कूल से हुई है जिसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनील इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में ही छोड़कर अदाकारी की तरह बढ़ गए।

(सुशांत सिंह राजपूत)

                             फिल्मी करियर 

हमसे ना सुशांत के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो उनका सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान डांस में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई जिसके बाद उन्होंने डांस सीखने का फैसला किया जब जिनमें उनका परिवार उनके खिलाफ था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और श्यामक देवरी के डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए श्यामक उनकी कला और लगन से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में डांस करने का मौका दिया मुंबई आने के बाद उन्होंने एक डांस ग्रुप के साथ भी परफॉर्म किया जिसको महसूस कोरियोग्राफर एश्ले लोबो ने विकसित किया था इसके बाद वह थिएटर का भी हिस्सा रहे और शायद यही कारण है कि वह एक सफल अभिनेता बनकर सामने आए सुशांत ने माशूर एक्शन डायरेक्टर पालन अमीन से मार्शल आर्ट भी सीखा है उन्हें टीवी में उनका पहला ब्रेक स्टार प्लस के शो किस देश में है मेरा दिल से मिला जिसके बाद उन्होंने मशहूर टीवी सीरियल पवित्र रिश्ता में मानव का किरदार निभाया और सबके चहेते बन गए। वह जरा नच के दिखा 2 और झलक दिखला जा 4 जैसे बड़े डांसिंग शो के भी प्रतिभागी रहे हैं और झलक दिखलाजा 4:00 के दौरान उन्हें मोस्ट कंसिस्टेंट  परफॉर्मर का टाइटल भी मिल चुका है। एक समय था जब उनके साथ अभिनेत्रियों काम तक नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक साधारण परिवार से थे और उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। फिल्म शुद्ध देसी रोमांस इसका उदाहरण है काफी समय बाद फिल्म के लिए परिणीति चोपड़ा ने साइन किया था।

                             निजी जिंदगी

सुशांत की निजी जिंदगी की बात करें तो वह सीरियल पवित्र रिश्ता में रह चुके है अपने सह कलाकार अंकिता लोखंडे के साथ संबंध में थे सुशांत अपने मां के बेहद करीब थे और उनकी मौत के बाद सुशांत का पूरा परिवार दिल्ली आ गया अपनी पहली ही फिल्म से सबकी नजर में अपनी जगह बनाने वाले सुशांत का भी जीवन आसान नहीं रहा था मां-बाप की इच्छा के बिना उन्होंने फिल्मों में अपना  करियर चुना और आज इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्थापित किया था।

        ( मृत्यु तिथि -14 जून 2020 मुंबई बांद्रा )

• प्रसिद्ध फिल्में - 

1.  काय पो चे 

2. शुद्व देशी रोमांस 

3. एम एस धोनी 

4. पीके और केदारनाथ 

5. छिछोरे 

आपको बता दे सुशांत आखिरी फिल्म दिल बेचारा है जिससे उनके साथ संजना सांधी नजर आई है। यह फिल्म 24 जुलाई 2020 को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी।



गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है?

किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की चाल बदल जाती है। जब दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत अधिक होती है तो प्रकाश की किरण आपतन बिंदु पर अभिलंब प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है? से दूर हटती है किंतु जब प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत कम होती है तब किरण अभिलंब की और मुड़ती है अर्थात अपेक्षाकृत विरल माध्यम में किरण अभिलंब से दूर हटती है जबकि अपेक्षाकृत सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते है?

 जब प्रकाश की किरण किसी एक समागी  पारदर्शी  माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है, तो इन दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर किरण अपने पूर्व पथ से मुड़ जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन क्यों कहा जाता है?

 पाकिस्तान की मुख्य नदियां में सिंधु के अस्तित्व झेलम, चेनाब, रावी,सतलुज और काबुल है यह सभी सिंधु की सहायक नदियां है और जल पूर्ति रखती है इसलिए पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन कहा जाता है।

रेलवे फाटक पार करते समय रखी जाने वाली सावधानियों का उल्लेख करें।

रेलवे फाटक पार करते समय दो सावधानियां वर्तनी चाहिए ।

1.रेलवे लाइन पार करते समय सिंगल तथा दोनों तरफ के रेल पथ को देख लेना चाहिए।

2. यदि रेल फाटक पर लाल बत्तियां जली दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि गाड़ी आने वाली है यदि हरी बत्ती जली दिखाई दे तो रेल लाइन पार करना चाहिए।

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण क्या था?

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण बना आस्ट्रेलिया के युवराज आर्क ड्यूक फ्रांज की  बोस्निया की राजधानी सेराजेवों में हत्या। ऑस्ट्रेलिया ने इस घटना के लिए सर्बिया  को उत्तरदाई माना ऑस्ट्रेलिया ने सर्बिया को धमकी दी कि वह 48 घंटे के अंदर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें तथा आतंकवादियों का दमन करें सर्बिया ने ऑस्ट्रेलिया की मांगों को ठुकरा दिया फलत:  ऑस्ट्रेलिया ने 28 जून 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

श्री नरेंद्र मोदी (भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री)जीवन परिचय चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर।

श्री नरेंद्र मोदी भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री जीवन परिचय (चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर)

                       आरंभिक जीवन   

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में वदनगर मेहसाना डिस्टिक में हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद एवं माता का नाम हीरा बेन है, नरेंद्र मोदी के पिता बहुत साधारण तेली जाति के व्यक्ति थे जिनके 6 संताने थी जिनमें से एक नरेंद्र मोदी था नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे इनकी पढ़ाई में बहुत रुचि नहीं थी पर इनके शिक्षक के अनुसार भी कुशल वक्ता थे, वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था, मोदी जी ने वडनगर से स्कूल की पढ़ाई पूरी की वे राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही मोदी जी को देश के प्रति प्रेम था उन्होंने 8 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपना पंजीकरण करा लिया था, यह एक शक्तिशाली हिंदू राष्ट्रवादी समूह है जो भारत के संविधान की बातों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता नहीं चाहता था, हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है , हिंदुत्व की यह बात बीजेपी की जड़ है नरेंद्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारंभ हुआ उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाई गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेंद्र मोदी की रणनीति थी।



                          बचपन की बातें

पिता दामोदर दास मोदी और और मां हीराबेन के 6 बच्चे में से यह तीसरे नंबर के थे इनके घर खराब स्तिथि मैं था मां दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था गरीब के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन की कई ऊंचे नीचे पड़ाव देख लिए थे बचपन से ही इनको पढ़ाई लिखाई का बेहद शौक था यह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे,13 वर्ष की आयु में नरेंद्र मोदी की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई लेकिन कुछ परिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही यह घर छोड़कर चले गए यह घर छोड़कर ये उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदू आश्रम कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आक्षमों भ्रमण करने लगे।


                      

                     राजनैतिक जीवन  

जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया जहां कई लोगों ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था क्योंकि कई लोगों का मानना था कि मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया जो पिछले 60 सालों से भारतीय राजनीति को संभाल रही थी और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था कि वह उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे 1987 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए बीजेपी में हुए दिन-ब-दिन आगे बढ़ते रहें और सामाजिक हितों के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर  के उन्होंने बिजनेस के प्राइवेटाइजेशन (privatisation) छोटे बिजनेस को बढ़ावा दिया 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था फरवरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया जो कथित रूप से मुस्लिम ने किया था और बदले के प्रतिशोध इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमों पर भी हमला किया गया इस तरह  हिंसा बढ़ती गई इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगों ने पूरे देश में आलोचना की क्योंकि उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे मोदी के विरुद्ध दो जांच कमेटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिससे उन्हें दोषी ठहरा सकें।


रविवार, 24 अप्रैल 2022

थॉमस एडीसन का जीवन परिचय ( विद्युत बल्ब का आविष्कारक)


                        परिचय

थॉमस एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 मिलन ओहायो में हुआ था। और हियोरोन मिशिगन मैं वे बड़े पले। वह सैमुअल ओग्डन एडिशन और नैंसी मैथ्यू इलियट के सातवें और अंतिम पुत्र थे (यानी इनके माता का नाम नैंसी मैथ्यू एलियट और पिता का नाम सेमुअल ओगडेन एडिशन था) पैतृक परिवार डच था , जिसका पुराने समय से ही उपनाम एडिशन। स्कूल में युवा एडिशन का दिमाग बहुत ही भ्रमित था और उनके शिक्षक रेवरेंड इंग्ले उन्हें व्याकुल कहकर बुलाते थे और लगभग पूरे 3 महीने एडिशन ने स्कूल में बिताए बाद में उनकी माता ने एडिशन को घर पर ही पढ़ाना शुरू किया एडिशन ने अपनी घर शिक्षा आर•जी• पार कर स्कूल से और दी कूपर यूनियन स्कूल ऑफ साइंस एंड आर्ट से ग्रहण किया।
     एडिसन को सुनने में बचपन से ही तकलीफ होती थी। 
ये सब तब से चल रहा था जब से बचपन में उन्हें एक तेज बुखार आया था और उससे उबरते समय उनके दाहिने कान में चोट आ गई थी तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। उनके कैरियर के मध्य उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में बताया कि जब ट्रेन में सफर कर रहे थे तभी एक केमिकल में आग लग गई जिस वजह से वह ट्रेन के बाहर फेंके गए और उनके कान में चोट आ गई कुछ साल बाद ही उन्होंने इस कहानी को तोड़ते हुए एक नई कहानी बनाई और कहने लगे कि जब उनकी मदद कंडक्टर कर रहा था तभी अचानक उनके कान में चोट लगी थी कान के बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी अल्प मनोरंजन, निरंतर परिश्रम , असीम धैर्य,  आश्चर्यजनक समरण शक्ति और अनुपम कल्पना द्वारा एडिशन ने इतनी सफलता पाई। वे एक वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक सफल उद्यमी भी थे वह हर दिन अपने काम करने के बाद बचे समय को प्रयोग और परिश्रम में लगाते थे। वे अपनी कल्पना शक्ति और स्मरण शक्ति का उपयोग अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया उनके इसी टैलेंट की बदौलत से उन्होंने 14 कंपनियों की स्थापना की जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक  भी शामिल है जो आज भी दुनिया की सबसे बड़ी व्यापार करने वाली कंपनी के नाम से जानी जाती है।


थॉमस अल्वा एडिसन एक अमेरिकी आविष्कारक और व्यापारी थे उन्होंने अनेक यंत्र एवं युक्तियां विकसित की के जिनमे संसार भर लोगों के जीवन  में भारी बदलाव आए। विद्युत बल्ब तथा फोनोग्राफ सहित इन्होंने हजारों अविष्कार किया। वह भारी मात्रा में उत्पादन के सिद्धांत को व्यवहार में लाने वाले पहले अन्वेषकों में से एक थे। इसके अलावा खोज करने के लिए विशाल टीम का सहारा लेने वाले वे पहले आविष्कारक थे। इसलिए उन्हें पहले औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। एडिशन एक महान आविष्कारक थे उनके समय में उन्होंने पूरे यूएस (US) के 1093 पेटर्न्स अपने कब्जे में कर रखे थे,  और किंगडम फ्रांस और जर्मनी में भी उनके कई सारे पेटेंट्स है।उनके इन सभी पेटेंस का उनके अविष्कारों पर बहुत प्रभाव पड़ा। उनके पेटर्न्स के साथ ही उनके आविष्कार भी उस समय काफी प्रचलित होने लगे थे जिनमें इलेक्ट्रिक लाइट और पावर यूटिलिटीज साउंड रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है जिन्होंने बड़ी तेजी से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध पाई एडिशन के आविष्कारों में हमें अधिकतर मॉस - कम्युनिकेशन और टेली - कम्युनिकेशन से संबंध दिखाई देने लगता है। स्टॉप स्टीकर बोर्ड रिकॉर्डर करने की मशीन इलेक्ट्रिक कार के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक पावर रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है। उन्होंने जल्दी ही अपने इन अविष्कारों में प्रगति हासिल की और टेलीग्राफी ऑपरेटर में अपना करियर बनाना चाहिए बाद में एडिशन ने इलेक्ट्रिक पावर निर्माण की यंत्रणा को विकसित किया और घर व्यापार और फैक्टरी में उसे बढ़ते रहे जो आधुनिक दुनिया में एक विशाल अविष्कारक के रूप में जाना जाने लगा यह सब निर्माण करने उनका पहला स्टेशन न्यूयॉर्क की पल स्ट्रीक में बना। थॉमस एडिसन का हमेशा से ही यह कहना था कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है कि हमेशा एक और बार प्रयास करना क्योंकि जब आप असफल होते होते हो और अपने काम को छोड़ देते हो तब आप सफलता के बहुत करीब होते हो। 

             

             कैसे हुआ बल्ब का अविष्कार

बल्ब का आविष्कार 1878 ई• में थॉमस अल्वा एडिसन ने क्या था । एक अमेरिकी वैज्ञानिक है जिन्होंने सिर्फ बल्ब का अविष्कार नहीं किया बल्कि और भी कई सारे उपकरणों की खोज की जैसे - कार्बन टेलिफोन,मोशन पिक्चर कैमरा, ग्रामोफोन, अल्कलाइन स्टोरेज बैटरी जैसे यंत्रों का आविष्कार किया।

                    
 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

धीरूभाई अंबानी (रिलायंस के संस्थापक) का जीवनी (Dhiru Bhai Ambani Reliance ke sansthapak)

जन्म,प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा ।

धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता गोवर्धन भाई अंबानी एक साधारण टीचर थे और उनकी माता जमनबेन घरेलू महिला थी और यह गुजरात के जूनागढ़ के पास एक छोटे से गांव चोरवाड़ा  के एक साधारण शिक्षक के घर में धीरूभाई अंबानी का जन्म हुआ। जिनके लिए अपने इतने बड़े परिवार का लालन पालन करना काफी चुनौतीपूर्ण था। के लिए भी पैसे पूरे नहीं पढ़ते थे ऐसे में चार और भाई-बहन के बीच धीरूभई का शिक्षा ग्रहण करना काफी मुश्किल था ऐसी स्थिति में धीरूभाई अंबानी को हाई स्कूल की अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और अपने घर की माली हालत को देखते हुए परिवार का गुजर-बसर करने के लिए अपने पिता के साथ भाटिया इत्यादि बेचने छोटे - मोटे काम करने पड़े।


 

  धीरूभाई अंबानी को बिजनेस में मिली असफलता के बाद जॉइनिंग की नौकरी।

धीरूभाई अंबानी ने अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सबसे पहले फल और नाश्ता बेचने का काम शुरू किया लेकिन इसमें कुछ खास फायदा नहीं हुआ इसके बाद उन्होंने गांव के पास ही एक धार्मिक और पर्यटक को पर पूरी तरह निर्भर था जो कि साल में कुछ समय के लिए ही चलता था फिर किसी भी काम में सफल नहीं होने के बाद अपने पिता की सलाह में उन्होंने फिर नौकरी जॉइनिंग कर ली। तमाम असफलताओं मिलने के बाद धीरूभाई अंबानी ने अपने बड़े भाई रमणीक की मदद से यमन में नौकरी करने का फैसला लिया उन्होंने सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर अपनी पहली नौकरी की और करीब 2 साल तक नौकरी करने के बाद वह अपनी कार्यकुशलता और योग्यता के बल पर मैनेजर के पद पर पहुंच गए हालांकि नौकरी करने के दौरान भी वे हमेशा बिजनेस करने के अवसर तलाशते रहते थे। वे शुरुआत से ही बिजनेस करने का कोई भी मौका अxपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। शायद उनके इसी जुनून ने ही उन्हें दुनिया के सबसे सफल बिजनेसमैन की सूची में शामिल किया था वही धीरूभाई अंबानी  के बिजनेश के  प्रति उनका रुझान का अंदाजा उनके जीवन में घटित इस घटना के से लगाया जा सकता है कि जब वह सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर ₹300 प्रति माह के हिसाब से नौकरी करते थे उस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को चाय महज 25 पैसे में मिलती थी धीरूभाई अंबानी को 25 पैसे की चाह ने खरीद कर एक बड़े रेस्टोरेंट में ₹1 की चाय पीने जाते थे वह ऐसा इसलिए करते थे ताकि उस रेस्टोरेंट में आने वाले बड़े बड़े व्यापारियों की बात सुन सके और बिजनेस की बारीकियों को समझ सके इस तरह धीरुभाई ने अपने बड़े बिजनेसमैन के सपने को पूरा करने के लिए अपने तरीके से बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ग्रहण की और बाद में वह एक सफल बिजनेसमैन बनकर खरे उतरे। इसके अलावा धीरूभाई अंबानी के अंदर बड़े बिजनेसमैन बनने की योग्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने यमन में प्रचलित चांदी के सिक्कों की गलाई लंदन की एक कंपनी में करने यह जानकर शुरू कर दी कि सिक्को की चांदी का मूल्य सिक्को के मूल्य से अधिक है।

                 रिलायंस कंपनी की शुरुआत

 आपको बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी यमन में रह रहे थे उसके कुछ समय बाद यमन में आजादी के लिए आंदोलन शुरू हो गए थे, जिसकी वजह से वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यापार के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद धीरूभाई अंबानी को साल 1962 में यमन से भारत लौटना पड़ा। इस दौरान धीरूभाई अंबानी जी के जीवन का वह दौर था उनके पास न तो नौकरी थी और ना ही कोई कारोबार की शुरूआत करने के लिए पूंजी ऐसे में उन्होंने अपने चचेरे भाई चंपकलाल दामिनी के साथ मिलकर पॉलिस्टर धागे और मसालों के आयात निर्यात का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने महज ₹15000 की राशि के साथ रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन की शुरुआत मस्जिद बंदर के नरसिम्हा एक छोटे से ऑफिस के साथ की थी और यहीं से रिलायंस कंपनी का उदय हुआ। भूलेश्वर स्थित जय हिंद स्टेट में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। आपको बता दें कि शुरआती दौर मैं बिजनेस टाइकून धीरूभाई अंबानी का इरादा पॉलिएस्टर यार्न को याद करने और मसाले निर्यात करने का था इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि रिलायंस काऑपरेशन का पहला ऑफिस नरसीनाथन स्टील में बना था। जो कि महज एक 350 स्क्वायर फीट का एक कमरा था जिसमें सिर्फ एक टेलीफोन, एक टेबल और तीन कुर्सियां थी। शुरू में उनके पास सिर्फ दो कर्मचारी थे और उनके काम में उनकी मदद करते थे। दरअसल धीरूभाई अंबानी और चंपकलाल दमानी दोनों का स्वभाव और बिजनेस करने का तरीका एक दूसरे से बिल्कुल अलग था इसी वजह से साल 1965 में धीरूभाई अंबानी ने चंपकलाल दामिनी के साथ बिजनेस में पार्टनरशिप खत्म कर दी। और अपने दम पर बिजनेस की शुरुआत की थी। दरअसल चंपकलाल दामिनी एक सतर्क व्यापारी थे और उन्हें सूट बनाने के माल में कोई रुचि नहीं थी जबकि धीरूभाई अंबानी को रिक्स उठाने वाला व्यापारी माना जाता था। इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने शोध के व्यापार में अपनी किस्मत आजमाई और सकारात्मक सोच के साथ इस बिजनेस की शुरुआत की। धीरूभाई अंबानी को अपने माल की कीमत पहले से ही बढ़ने की उम्मीद थी और उससे उन्होंने जो मुनाफा कमाया उनके बिजनेस ग्रोथ के लिए काफी अच्छा था।
    


बुधवार, 20 अप्रैल 2022

बालकृष्ण भट्ट जीवन परिचय (BalKrishna bhatt jivan parichay)

 बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय, बायोग्राफी,जन्म,निबंध,निवास - स्थान,माता - पिता,शिक्षा, वृति,विशेष परिस्थिति, रचनात्मक सक्रियता , रचनाएं और इनकी निबंध बातचीत

 

बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय - कृष्णा भट्ट का जन्म 23 जून 1844 ईसवी में हुआ था। इनका जन्म इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था उनके माता का नाम पार्वती देवी एवं पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था पिता एक व्यापारी थे और माता एक संस्कृत  महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाए। इनके प्रारंभ शिक्षा संस्कृत का अध्ययन 1867 में प्रयोग के मिशन स्कूल से एंट्रेंस की परीक्षा दी। इनके वित्ती 1869 तक प्रयोग के मिशन स्कूल में अध्यापन। 1885 में प्रयोग के सी•ए•बी• स्कूल में संस्कृत का अध्यापन। 1888 में प्रयोग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त किंतु अगर स्वभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी और उसके बाद से लेखन कार्य पर ही निर्भर हो गए। इनके परिस्थिति पिता के निधन पर आंतरिक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का  सामना। पैतृक घर छोड़ कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।

रचनात्मक सक्रियता : भारतेंदु हरिश्चंद्र की कृष्णा से हिंदी वर्धनी सभा प्रयोग की ओर से 1877 ईसवी में हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ क्या इसे वे 33 वर्षों तक चलाते रहें। इसमें नियमित रूप से सामाजिक साहित्य नैतिक राजनीतिक विषयों पर निबंध लिखते रहे 1881 में वेदों की युक्ति पूर्ण समीक्षा की 1886 में लाला श्रीनिवास दास के संजीव गीता स्वयंवर की कठोर आलोचना की। जीवन के अंतिम दिनों में हिंदी शब्दकोश के संपादन के लिए श्यामसुंदर दास द्वारा काशी आमंत्रित किंतु अच्छा हुआ ना होने पर अलग हो गए।

रचनाएं : उपनस्यास - रहस्य कथा , नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वेरी, रसाताल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव।

नाटक - पदमावती, किराता ज्रूरनीय ,वेणी संहार,  शिशुपाल वध, दमयंती या दमयंती स्वयंवर,  शिक्षा दान, चंद्रसेन, सीता बनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, कट्टर सुम की एक नकल, बृहन्नाला इंग्लैंड एंड वेरी और भारत जननी, भारतवर्ष और कली, दूरदेशी, एक रोगी और एक वैध, रेल का विकेट खेल, बाल विवाह और आदि।
प्रहसन - जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विखंडन आदि।
निबंध - 1000 से आसपास निबंध जिसमें 100 से ऊपर बहुत महत्वपूर्ण । भट्ट निबंधमाला नाम से दो खंडों में एक संग्रह प्रकाशित।

बालकृष्ण भट्ट की मुख्य बातें।
बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिंदी गद्य के अधीन निर्माताओं और अन्य रचनाओं में एक है। भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकारों में से एक है वह हिंदी के प्रारंभिक युग के प्रमुख और महान पत्रकार निबंधकार तथा हिंदी की आधुनिक आलोचना के प्रवर्तक को में अग्रणी है उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को अपने प्रतिभाशाली जनधर्मी और लेखन से एक नवीन धरातल नवीन की दिशा और नया रूप रंग और मानसा दिया। निश्चय ही इस बात पर युगांतरकारी कार्य में वे एकाकी नहीं थे, भारतेंदु हरिश्चंद्र प्रताप नारायण मिश्र प्रेम धन राधाचरण गोस्वामी जैसे महान साहित्यकार उनके साथ थे। 12 यह एक सब संबंध स्थापित मान्यता है कि अपने युग की सर्वाधिक सक्रिय मुखर और प्रदूषण समय तक संस्कृति निष्ठा के साथ दसवें लेखन द्वारा साहित्य सेवा करते रहने वाले समर्पित साहित्यकार थे बालकृष्ण भट्ट। भारतेंदु युग की दो तीन प्रमुख साहित्यकारों में एक जिनके अनवरत लेखन से भारतेंदु युग का रचनात्मक एवं व्यक्तित्व निर्मित हुआ द्वेदी युग का मूलाधार निर्मित हो सका। साहित्य केबल कल्पना विलास और मनोरंजन की वस्तु नहीं है अपितु वह जन समूह के जीत के विकास का संवाहक और जन संस्कृति के विकास प्रभाव का मूर्ति वाणी में अपादान है। जोगन लोक संस्कृति से ज्यादा और दिशा पता है यह और पूर्व प्रधान मान्यता भारतेंदु युग के साहित्य से बनती है और इसके दृश्यों में बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं। आधुनिक हिंदी नवजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में नए सिरे से अपनी भाषा और साहित्य की मौलिक लोकवादी प्रकृति एवं जाति निष्ठा की पहचान करते हुए तत्वों को दिशा और प्रभाव देने का कार्य महान लेखकों ने अपनी राजधानी गतिविधियों द्वारा संपन्न किया उनमें विशेष रूप से सक्रिय है।
        बालकृष्ण भट्ट गद्दाकार थे अपनी अभिरुचि मानसा और प्रतिभा से परिवेश और यथार्थ से संपूर्ण सरोकार रखने वाले लेखक पत्रकार। उनके कार्य की भाषा और कला की जलेबी परिवेश और व्यर्थ में ही थी। लो बिहार में बोलचाल बातचीत और अभिरुचि भक में मूर्ति भाषा और कला कि उनके गध का कलेवर बन जाती हैं। वह नवजागरन और स्वाधीनता संघर्ष का दौर था जिनमे भीतरी और बाहरी स्वदेशी और विदेशी शक्तियों से टकराव और संघर्ष है जागरूक का दिन लेखक की नियति थी यह टकराव संघर्ष भर्ती जी के लेखन में अंतर कितना तेज और तेवर बनकर उभरता है। भट्ट जी ने हिंदी प्रदीप पूरे पूरे एक उपन्यास लिखे नाटक वर्षा ऋतु निबंध ही उनकी वह अपने पिता है उनका लेखन पूरी शक्ति सामर्थ्य वैभव के साथ प्रकट हुआ है। श्रमिक समस्याओं पर मैंने जमकर लिखा है। स्त्री शिक्षा महिला स्वतंत्रता राजा प्रजा कृषि का व्यवस्था अंग्रेजी शिक्षा सुरक्षिता में परिवर्तन देश सेवा अंधविश्वास आदि विषयों पर उन्होंने खूब लिखा है। मानव भागों और भाषा साहित्य के विषयों पर भी खुलकर लिखा। पंचायत हाथों पर कलाकार मंत्रियों ने कितने लिखे कि उनकी संख्या सैकड़ों में हैं। रामचंद्र शुक्ल ने अधिकारियों ने अंग्रेजों साहित्य के एडिशन और स्टील की श्रेणी में रखा है। बातचीत शीर्षक निबंध उनकी निबंधकार व्यक्तित्व और निबंध कला के साथ-साथ भाषा शैली का प्रतिनिधित्व करता है प्रस्तुत निबंध जी के बारे में ऊपर कही गई बातों को सहज की प्रमाणित करता है।

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का मुख्य जीवन परिचय क्या क्या है?

नमस्कार दोस्तों आज हमलोग डॉ भीमराव आंबेडकर जी के जीवनी के बारे मैं जानेंगे ।


 बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में महू, मध्यप्रदेश में एक दलित परिवार में हुआ था। मानव मुक्ति के पुरोधा बाबा साहेब अपने समय के सबसे सुपठित जनों में से एक थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क (अमेरिका), फिर वहाँ से लंदन (इंग्लैंड) गए। उन्होंने संस्कृत का धार्मिक, पौराणिक और पूरा वैदिक वाङ्मय अनुवाद के जरिये पढ़ा और ऐतिहासिक सामाजिक क्षेत्र में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत कीं। सब मिलाकर वे इतिहास मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता बनकर उभरे। स्वदेश में कुछ समय उन्होंने वकालत भी की। समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अछूतों, स्त्रियों और मजदूरों को मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया। उनके चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति रहे बुद्ध कबीर और ज्योतिबा फुले । - भारत के संविधान निर्माण में उनकी महती भूमिका और एकनिष्ठ समर्पण के कारण ही हम आज उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कह कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दिसंबर, 1956 ई० में दिल्ली में बाबा साहेब का निधन हो गया ।


बाबा साहेब ने अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं भाषण हैं 'द कास्ट्स इन इंडिया : - देयर मैकेनिज्म', जेनेसिस एंड डेवलपमेंट', 'द अनटचेबल्स, हू आर दे', 'हू आर शुन, बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म' बुद्धा एण्ड हिज धम्मा', 'थाट्स ऑन लिंग्युस्टिक स्टेट्स', 'द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन', 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' आदि। हिंदी में उनका संपूर्ण वाङ्मय भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय' नाम से 21 खंडों में प्रकाशित हो चुका है।


यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर 'जाति भेद का उच्छेद' से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

सहरसा जिला में आपका स्वागत है, सहरसा जिला की प्रमुख बातें क्या क्या है?

 • सहरसा का मुख्यालय कहां है - सहरसा

• गठन कब हुआ था -  1 अप्रैल 1954

• क्षेत्रफल कितना है - 1896 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 19 लाख 661

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1127

• कुल साक्षरता कितना है - 53.20%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 63.56% 

• महिला साक्षरता कितना है - 41.68%

• लिंगनुपात कितना है - 906

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(सहरसा सदर, सिमरी  - बख्तियारपुर)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 10(सिमरी बख्तियारपुर, नोहटाआ, सौर बाजार, सोनबरसा, सलखुआ,सत्तर कटैया, महेशी, कहरा,पतरघाट,बनाम इटहरी)

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(सहरसा) 

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 4(सहरसा, महिषी,सोनबरसा, सिमरी बख्तियारपुर)

• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी

 •मिट्टी कौन सी है - बलसुंदरी मिट्टी ,जलोढ़ मिट्टी

• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग और बीड़ी उद्योग 


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मधेपुरा जिला में आपका स्वागत है, मधेपुरा जिला का मुख्य बातें क्या क्या है?

 • मधेपुरा का मुख्यालय कहां है - मधेपुरा

• गठन कब हुआ था - 9 मई 1981

• क्षेत्रफल कितना है - 1787 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 2001 762

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1120

• कुल साक्षरता कितना है - 52.25%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 61.77% 

• महिला साक्षरता कितना है - 41.74%

• लिंगनुपात कितना है - 911

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(मधेपुरा, सिंघेश्वर)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 13(मधेपुरा, सिंघेश्वर, कुमारखंड, मुरलीगंज, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, चौसा, आलमनगर, गम्हरिया, धैलाढ़, शंकरपुर, ग्वालपाड़ा, पुरैनी)

• ग्राम पंचायत कितना है - 170

• ग्राम कितना है - 449

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(मधेपुरा) 

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 5(मधेपुरा, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, आलमनगर, सिंघेश्वर)

• प्रमुख मेला कौन सी है - सिंघेश्वर स्थान का मेला 

• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी

• प्रमुख व्यक्ति - बी•पी• मंडल(पूर्व मुख्यमंत्री)

 •मिट्टी कौन सी है - जालोढ मिट्टी

• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग

गुरुवार, 7 अप्रैल 2022

अंतरिक्ष विज्ञान की संपूर्ण बातें क्या क्या है ?

• अंतरिक्ष विभाग की स्थापना - 1972

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था - यूरी गागरिन (सोवियत संघ, 1961)

• अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला कौन थी - वेलेंटिना तेरेशकोवा (सोवियत संघ, 1963)

• पीएसएलवी (PSLV) का पूर्ण रूप - polar Satellite launch vehicle

 • विदेशी भूमि से छोड़ा गया भारत का पहला वैज्ञानिक उपग्रह - आर्यभट्ट (19 अप्रैल 1975)

• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1969

• थुंबा में प्रथम रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र की स्थापना - 1963

• भारत का पहला भूमिगत परमाणु विस्फोट - 18 मई 1974 पोखरण (राजस्थान)

• स्वदेश निर्मित एवं स्वदेश भूमि से परीक्षित प्रथम उपग्रह - रोहिणी (17अप्रैल 1983)

• भारत के राकेश शर्मा द्वारा रूसी अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरिक्ष में प्रवेश कब किया था - 1984

• विक्रमसारा  भाई अंतरिक्ष केंद्र -  त्रिवेंद्रम 

• भारत का उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र - श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश में 

• भारत का प्रथम कृत्रिम उपग्रह - रोहिणी ir-1 (18 जुलाई 1980 में)

• थुम्बा में स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी केंद्र (SSTC)की स्थापना - 1965

• भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की स्थापना - 1971,  (मुंबई)

• इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1971, कलपक्कम (मद्रास)

• चंद्रमा पर चरण रखने वाला प्रथम व्यक्ति - नीलआर्मस्ट्रांग (अमेरिका, 21 जुलाई 1969)

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम भारतीय  - स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा (1984)

• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन थी - कल्पना चावला(1997)

• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली दूसरी भारतीय महिला कौन थी - सुनीता विलियम्स (2007)

•अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा दिन रहने का श्रेय किसका था - सुनीता विलियम्स (195 दिन)

• अंतरिक्ष में प्रक्षेपित प्रथम कृत्रिम उपग्रह - स्पूतनिक (सोवियत संघ, 1957)

• देश का पहला रिएक्टर कौन था - अप्सरा (1956)

• दूसरा परमाणु परीक्षण ए•पी•जे• अब्दुल कलाम के नेतृत्व में कब किया गया - 13 मई 1998 को

• भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन कब हुआ था - 1 फरवरी 2003 ईस्वी में

• सर्वप्रथम मानव रहित कृत्रिम उपग्रह का प्रक्षेपण करने वाला देश - सोवियत संघ

• चंद्रतल पर मनुष्य को उतारने वाला प्रथम अंतरिक्ष यान - अपोलो -11

• मंगल ग्रह पर पहला अंतरिक्ष यान - पाथफाइंटर (6 जुलाई 1997)

• प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान - शेंजु ( चीन)

• प्रथम अंतरिक्ष शटल - कोलंबिया (अमेरिका 1981)

• अंतरिक्ष में यान से बाहर विचरण करने वाला प्रथम व्यक्ति - अलेक्सी लियोनोव

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम - लाइका (एक कुत्तिया)

• देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र ध्रुव ने काम करना आरंभ कब किया - 8 अगस्त 1985

• परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना - अगस्त 1948

• रावतभाटा परमाणु विद्युत गृह - रावतभाटा (राजस्थान)

• तारापुर परमाणु विद्युत गृह - मुंबई (महाराष्ट्र)

• रमन अनुसंधान केंद्र - बैंगलोर (कर्नाटका)

• स्वदेश निर्मित प्रथम प्रक्षेपास्त्र - पृथ्वी (1988)

• प्रथम स्वदेश निर्मित उपग्रह - इनसेट - 2A (जुलाई 1992)

 




बुधवार, 6 अप्रैल 2022

शरीर के प्रमुख अदभूत तथ्य कौन कौन सी है

• मनुष्य का हृदय धड़कता है - 72बार/ मिनट 

• मानव खोपड़ी में हड्डियां होती है - 8

• स्वस्थ मनुष्य की श्वसन दर - 16 से 18 बार 

• मस्तिष्क का वजन - 1350 से 1400 ग्राम 

• मस्तिष्क का बड़ा भाग - सेरेब्रम (प्रमस्तिष्क)

• वृक्क ( किडनी ) का वजन - 150 ग्राम 

• शरीर की सबसे बड़ी हड्डी - फीमर ( जांघ में) 

• शरीर की सबसे छोटी हड्डी - जबड़े की 

• शरीर का सबसे कठोर तत्व - एनामिल 

• सामान्य मनुष्य का रक्तचाप - 120/80 मिमी.

• मानव रक्त ( क्षारीय) का P H मान - 7.4

• मनुष्य में रक्त की मात्रा होती है - 5 से 6 लीटर 

• मानव शरीर में जल की मात्रा - 65 से 80%

• रक्त को शुद्ध करता है - वृक्क ( किडनी)

• लाल रक्त कण का निर्माण - अस्थिमज्जा में 

• लाल रक्त कण का जीवनकाल - 20 - 120 दिन 

• श्वेत रक्त कण का जीवनकाल - 2 - 4 दिन 

• श्वेत रक्त कण को कहा जाता है - ल्यूकोसाइट 

• लाल रक्त कण को कहा जाता है -  एरिथ्रो साइट 

• शरीर का ताप नियंत्रण - हाइपोथेलेमस ग्रंथि 

• सर्वदाता रक्त समूह (यूनिवर्सल डोनर ) - O 

• सर्वग्राही रक्त समूह (यूनिवर्सल रिसेप्टर ) AB

• रक्तचाप मापने का यंत्र है - स्फेगमोमैनोमीटर 

• ब्लड बैंक कहलाता है - प्लीहा (स्प्लीन )

• भोजन का पाचन प्रारंभ होता है - मुख से 

• पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है - छोटी आंत में 

• पित्त स्रावित होता है - यकृत द्वारा 

• विटामिन संचित रहता है - यकृत में 

• शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि - यकृत (लीवर)

• सबसे छोटी ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि) - पिट्टयूटरी 

• मनुष्य में पसलियां पाई जाती है - 12 जोड़ी

• शरीर में हड्डियों की कुल संख्या - 206

• शरीर में मांसपेशियों की कुल संख्या - 639

• लार में पाया जाने वाला एंजाइम है - टायलिन 

• लिंग निर्धारण होता है - पुरुष क्रोमोसोम पर 

• मनुष्य का हृदय होता है - चार कोष्ठीय 

• शरीर में गुणसूत्रों की संख्या - 46

• शरीर का सबसे बड़ा अंग - त्वचा 

• शरीर की सबसे बड़ी कोशिका - तंत्रिका तंत्र 

• शरीर में अमीनो अम्ल की संख्या - 20

• शरीर में प्रतिदिन मुद्र बनता है - 1½ ली•

• मूत्र दुर्गंध देता है - यूरिया के कारण 

• मानव मूत्र का पीएच (PH) मान - 6

• शरीर का सामान्य तापमान होता है - 98.6°F या 37°C या 310K

• टिबिया नामक हड्डी पाई जाती है - पैर में 

• दांतो और हड्डियों के संरचना के लिए आवश्यक तत्व है - कैल्शियम एवं फास्फोरस 

• शरीर में उतकों का निर्माण होता है - प्रोटीन से 












शनिवार, 2 अप्रैल 2022

बौद्धधर्म के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य क्या क्या है?

•  बौद्धधर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे। इन्हें एशिया का ज्योतिपुंज(light of Asia) कहा जाता है।

• गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसवी पूर्व में कपिलवस्तु में लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था।

• इन्हें पिता शुद्धोधन सा के गण के मुखिया थे।

• इनकी माता माया देवी की मृत्यु इनके जन्म के सातवें दिन ही हो गई थी इसका लालन-पालन इनकी सौतेली मां प्रजापति गौतमी ने किया था।

• इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

• गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा के साथ हुआ इनके पुत्र का नाम राहुल था।

• सिद्धार्थ जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने निम्न चार दृश्य को क्रमशः देखा।

(१) बूढ़ा व्यक्ति (२) एक बीमार व्यक्ति (३) शव एवं (४) एक सन्यासी

• सांसारिक समस्याओं से व्यवस्थित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया है।

• गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के आलरकालम से  संख्या दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। आलारकलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए।

• अलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रूद्रकरामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की।

• उरुवेला में सिद्धार्थ को पांच साधक मिले।

• बिना अन्न जल ग्रहण के 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ।

• ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए व स्थान बोधगया कहलया।

• बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिससे बौद्ध ग्रंथों में धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है।

• बौद्ध ने अपने उद्देश जनसाधारण की भाषा पाली में दिए।

• बौद्ध ने अपने उपदेश कौशल वैशाली कौशांबी एवं अन्य राज्यों में दिए

• बुद्ध ने अपने सर्वाधिक उपदेश कौशल देश की राजधानी श्रावस्ती में दिए।

• बुध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था मे कुशीनार द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गई जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया।

• मल्लों ने  अत्यंत सम्मान पूर्वक बौद्ध का संस्कार  किया।

• बुद्ध के जन्म एवं मृत्यु की तिथि को चीनी परंपरा के कैंटोन अभिलेख के आधार पर निश्चित किया गया है।

• बौद्ध धर्म के बारे में हमें निषद ज्ञान पाली त्रिपिटक से प्राप्त होता है।

• बौद्ध धर्म मुल्तानी स्वर वादी है इसमें आत्मा की परिकल्पना भी नहीं है।

• बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।

• विष्णु दुखों से भरा है का सिद्धार्थ बुद्ध ने उपनिषद से लिया।

• बुद्ध के अनुयाई दो भागों में विभाजित थे - 

1. भिक्षुक - बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जिन्होंने सन्यास ग्रहण किया उन्हें भेजो कहा गया।

2. उपासक - गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म अपनाने वालों को उपासक आ गया।

• बौद्ध संघ में प्रविष्टि होने  को उपसंपदा कहा जाता था।

• बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष थी।

• बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है - बौद्ध, धर्म एवं संघ।

• ठीक अनु श्रुति के अनुसार मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को 8 भागों में बांट कर उन पर 8 स्तूपों का निर्माण कराया गया।