शुक्रवार, 6 मई 2022

जय प्रकाश नारायण जी का जीवन परिचय

 जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 ईस्वी में हुआ था इनका जन्म सिताब दियारा गांव (उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिले में फैला) इनका बचपन का नाम बाउल था बड़े होने पर जेपी नाम से प्रसिद्ध अपनी जनपक्षरधरता के लिए लोक नायक के रूप में प्रसिद्ध हुए। जयप्रकाश नारायण विश्व सदी में भारत के एक प्रमुख समाजवादी, विचारक ,क्रांतिदर्शी नेता , समर्पित समाज कर्मी तथा विद्रोही स्वाधीनता सेनानी थे। उनका अध्ययन विशाल और राजनीतिक संगठन कर्म और लोक सेवा का अनुभव व्यापक और गहन था। भारतीय जनता में उनकी अस्थाई विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा थी निष्ठा और अध्ययन व्यवसाय से परिपूर्ण अपने सक्रिय, रचनात्मक, सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रतिष्ठा कमाई। वे अपने समय में विश्व के कुछ चुने हुए लोकतांत्रिक नेताओं में से एक थे।

   

• जन्म - 11 अक्बर 1902 ई•

• निधन : 8 अक्टूबर 1979 ई•

• जन्म स्थान :सिताब दियारा गांव ( उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिला में)

• पुकार का नाम : बचपन में बाउल ।बड़े होने पर जेपी नाम से प्रसिद्ध अपनी जनपक्षधरता के लिए लोकनायक के रूप में प्रसिद्ध।

• माता - पिता : फुलरानी एवं हरसुदयाल

• पत्नी : प्रभावती देवी ( प्रसिद्ध गांधीवादी वज्र किशोर प्रसाद की पुत्री

• शिक्षा : आरंभिक शिक्षा घर पर ही ,फिर पटना कॉलेजिएट, पटना में दाखिल हुए , यहीं बिहार में हिंदी की वर्तमान स्थिति विषय पर लेख के लिए सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त किया। इसके बाद पटना कॉलेज पटना में प्रवेश किया फिर असहयोग आंदोलन के दौरान शिक्षा अधूरी छोड़ी । 1992 में शिक्षा प्राप्ति के लिए अमेरिका गए। वहां कैलिफ़ोर्निया, बर्कले , विसिकंसन मैडिसन आदि कई इस विद्यालयों में अध्ययन। मार्क्सवाद और समाजवाद की शिक्षा यही ग्रहण की। मां की अस्वस्थता के कारण पीएच• डी• न कर सके और देश लौट आए।
राजनीतिक जीवन : 1929 में कांग्रेस में शामिल ,1932 में सविनय अवज्ञ आंदोलन के दौरान जेल गए। फिर उन्होंने जेल से बाहर निकलकर कांग्रेस के अंदर ही कांग्रेस सोशलिटी पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई। 1939 और 1943 में भी जेल गए, 1942 के आंदोलन से विशेष प्रसिद्धि मिली फिर उन्होंने आजादी के बाद 1952 में प्रजा सोशलिटी पार्टी के गठन में योगदान दिया फिर धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से स्वयं को अलग कर दिया फिर 1954 में विनोब भावे के सर्वोदय आंदोलन में जुडे।1974 में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और आपातकाल के दौरान जेल गए। फिर इनके मार्गदर्शन में ही जनता पार्टी का गठन हुआ।
• कृतियां : जयप्रकाश नारायण जी ने बहुत सी कवि ताएं भी लिखी और डायरी एवं निबंध भी प्रकाशित किया। रिकंसट्रकशन ऑफ इंडियन  पॉलिटि।
• सम्मान : 1965 में समाज सेवा के लिए मैग्सेसे सम्मान।1998 में भारत रत्न ( निधन होने के बाद)

बुधवार, 4 मई 2022

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन परिचय (2022) rashtrapita Mahatma Gandhi ka jivan parichay

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईसवी में प्रबंधन गुजरात में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद्र गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उसके आसपास हुई। 4 दिसंबर 1888 ईसवी में हुए वकालत की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन यूनिवर्सिटी लंदन गए। 1883 ईस्वी में कम उम्र में ही उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ जो स्वाधीनता संग्राम में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चली। गांधीज के जीवन में दक्षिण अफ्रीका(1893- 1914 ई•) के प्रवास का ऐतिहासिक महत्व है। वहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का पहला प्रयोग। 1915 ईस्वी में गांधी जी भारत लौट आए और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्होंने सत्य के प्रयोग किए। अहिंसा और सत्याग्रह उनका सबसे बड़ा हथियार था। उन्होंने स्वराज्य की मांग की,अछूतो का काम किया, सर्वोदय का कार्यक्रम चलाया, स्वदेशी का नारा दिया, समाज में व्याप्त ऊंच नीच जाति धर्म के भेदभाव को मिटाने की कोशिश की और अंततः अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाई।


                    गांधीजी को रवींद्रनाथ ठाकुर ने महात्मा कहा । उन्हें बापू राष्ट्रपिता कहकर राष्ट्र याद करता है। गांधीजी ने हिंद स्वराज, सत्य के साथ मेरे प्रयोग आदि पुस्तके लिखीं।उन्होंने हरिजन यंग इंडिया आदि पत्रिका भी संपादित की। उनका पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित था। उन्होंने शिक्षा संस्कृति राजनीति तथा सामाजिक एवं आर्थिक पक्षों पर खूब लिखा और उनके प्रयोग के द्वारा भारतवर्ष को फिर से एक उन्नत एवं गौरवशाली राष्ट्र बनाने की कोशिश की। 30 जनवरी 1948 ईस्वी में नई दिल्ली में एक सिरफिरे ने उनकी हत्या कर दी जिनका नाम था नाथू राम गोडसे। गांधी जी की स्मृति में पूरा राष्ट्रीय 2 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके जन्मदिवस को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षा और संस्कृति जैसे विषय पर यहां हरिजन यंग इंडिया जैसे ऐतिहासिक पत्रों के अग्रलेखओं से संकलित संपादित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार प्रस्तुत है। इस पाठ में उनके क्रांतिकारी शिक्षा दर्शन के अनुरूप वास्तविक जीवन में उपयोग व्यवहारिक दृष्टिकोण और विचार है जिनके बल पर आत्मा बुद्धि मानस एवं शरीर के संतुलित परिष्कार के साथ मनुष्य के नैतिक विकास के लिए जरूरी प्रेरणाएं हैं। गांधी जी की शिक्षा और संस्कृति की परिकल्पना निजी सैद्धांतिक नहीं है। वह जटिल और पुस्तकें भी नहीं है बल्कि हमारे साधारण दैनिक जीवन विहार से गहरे अर्थों में जुड़ी हुई है।

मंगलवार, 3 मई 2022

अमर भगत सिंह परिचय व अनमोल वचन Amar Bhagat Singh parichay v Anmol vachan

  - कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ अपने परिवार और देश के लिए कार्य करते हैं वही महान कहलाता है ऐसे व्यक्तियों का पूरा जीवन प्रेरणादायक होता है इन्हें शाहिद होने के बाद भी लोग दिल से याद करते हैं ऐसी ही एक महान हस्ती का नाम है अमर भगत सिंह जो अपने 23 वर्ष की उम्र में देश के प्रति शहीद हो गए अमर शहीद भगत सिंह ने अपने देश के लिए अभूतपूर्व कार्य किए।


नाम - भगत सिंह
जन्म - 28 सितंबर 1907
जन्म स्थान - बंगा चक्क, न• 105 ,गुरैरा ब्रांच,वर्तमान                           लायलपुर( पाकिस्तान)
माता - पिता - विद्यावती एवं सरदार किशन सिंह

मृत्यु - 23 मार्च 1931 (शाम 7:33 मिनट पर लाहौर षड्यंत्र केस में फांसी)

पैतृक गांव - खटकड़कलां ,पंजाब 

परिवार - संपूर्ण परिवार स्वाधीनता सेनानी पिता और चाचा अजीत सिंह लाला लाजपत राय के सहयोगी अजीत सिंह को मांडले जेल में देश निकाला दिया था। बाद में विदेशों में जाकर मुक्ति संग्राम का संचालन करने लगे। छोटे चाचा सरदार स्वर्ण सिंह भी जेल गए और जेल की यातनाओं के कारण 1910 में उनका निधन हुआ। भगत सिंह की शहादत के बाद उनके भाई कुलबीर सिंह और करतार सिंह को देवली के जेल में रखा गया था जहां वह 1946 तक रहे पिता अनेक बार जेल गए।

शिक्षा - पहले 4 साल की प्राइमरी शिक्षा अपने गांव बंगा में। फिर लाहौर के डी•ए•वी• स्कूल से वर्ग 9 तक की पढ़ाई की। बाद में नेशनल कॉलेज लाहौर से एफ• ए• किया बी•ए• के दौरान पढ़ाई छोड़ दी और क्रांतिकारी दल में शामिल हो गए।

भगत सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा -  बचपन में करतार सिंह सराभा और 1914 के गदर पार्टी के आंदोलन के प्रति तीव्र आकर्षण। सराभा की निर्भीक कुर्बानी का मन पर स्थाई और गहरा असर। 16 नवंबर 1915 को सराभा की फांसी के समय भगत सिंह की उम्र 8 वर्ष थी। वे सराभा का चित्र अपनी जेब  में ही रखते थे।

भगत सिंह की गतिविधियां - 12 वर्ष की उम्र में जलियांवाला बाग की मिट्टी लेकर क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत। 1922 में चोरा चोरी कांड के बाद 15 वर्ष की उम्र में कांग्रेस और महात्मा गांधी से मोहभंग। 1923 में पढ़ाई और घर छोड़कर कानपुर गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र प्रताप में सेवाएं दी। 1926 में अपने नेतृत्व में पंजाब में नौजवान भारत सभा का गठन किया जिसकी शाखाएं विभिन्न शहरों में स्थापित की गई। 1928 से 31 तक चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ का गठन किया और क्रांतिकारी आंदोलन सघन रूप से छेड़ दिया। 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ केंद्रीय असेंबली में बम फेंका और गिरफ्तार हुए।

भगत सिंह की पहली गिरफतारी - अक्टूबर 1926 में दशहरा मेले में हुए बम विस्फोट के कारण मई 1927 में हुई गिरफ्तारी भगत सिंह की।

 भगत सिंह की कृतियां - पंजाब की भाषा तथा लिपि की समस्या ( हिंदी में 1924) विश्व प्रेम ( कोलकाता के मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) युवक (मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) मैं नास्तिक क्यों हूं (1930-31) अछूत समस्या, विद्यार्थी और राजनीति, सत्याग्रह और हड़ताल, बम का दर्शन , भारतीय क्रांति का 810 आदि अनेक लेख, पिपलिया एवं पत्र जो अलग-अलग प्रकाश को द्वारा भगतसिंह के दस्तावेज के रूप में प्रकाशित। सचिंद्र नाथ सान्याल की पुस्तक बंदी जीवन और डाउन विभिन्न की आत्मकथा का अनुवाद। जेल डायरी भी लिखी और निम्नांकित 4 पुस्तकें भगत सिंह के द्वारा लिखी बताई जाती है जो अप्रिय है समाजवाद का आदर्श, आत्मकथा, भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास और मौत के दस्तावेज पर।

 अमर शहीद भगत सिंह आधुनिक भारतीय इतिहास की एक पवित्र स्मृति है। भारत राष्ट्र के लोकमान्य में उनकी युवा सभी अमित होकर बस गई है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले हजारों लोगों तथा लाखों स्वाधीनता सेनानियों की प्रेरणा और उत्सव पूर्ण कार्यों के लिए स्थाई प्रतीक और प्रतिनिधित्व है। उनके कार्यों और उनके बलिदान के जनता के हृदय में सदा संगति रहने वाली राष्ट्रीयता की ज्योति  चेतना का निर्माण किया है। राष्ट्रीयता देश भक्ति क्रांति और युवा शक्ति के हुए प्रेरणा पुंज प्रतीक है। यह अमर पद उन्होंने लगभग 23 वर्षों में ही हासिल कर लिया था।
  

   अमर भगत सिंह ने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर - मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था। 

                              स्वाधीनता सेनानियों के परिवार में जन्म पाकर उन्होंने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था। उनके भीतर इच्छा संकल्प विचार और कर्म की सुदृढ़, अजेय और आमोद शक्ति की स्वतंत्रता के लिए अप राज्य संघर्ष तथा सामाजिक समानता न्याय और सब की खुशहाली पर टिकी समाज व्यवस्था के लिए क्रांति के स्वप्न के रूप में उन्हें ऐसा कुछ प्राप्त हो गया था इसके आगे मिर्ची बहुत छोटी और तुच्छ पड़ गई। नश्वर जीवन के इस महिमा में मूल्य बोध के चलते ही उन्होंने हंसते हंसते फांसी का फंदा अपने गले लगा लिया और झूल गए। सचमुच वे उस पथ पर बढ जिसके आगे राह नहीं थी।
 

  भगत सिंह को लाहौर में छात्र जीवन में अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ट जागरूक युवकों से दोस्ती हो गया था - 

         भगत सिंह का विकास आरंभ से ही उद्देश्य के प्रति समर्पित एक प्रबुद्ध नौजवान के रूप में हुआ। लाहौर में छात्र जीवन में ही उनका संग साथ अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ठा जागरूक युवकों से हो गया था। इनमें अनेक आगे चलकर उनके साथ ही क्रांतिकारी बने। एक जागरूक छात्र के रूप में उनकी दृष्टि देश दुनिया की हलचल और गतिविधियों पर हमेशा बनी रही। अपनी रुचि की पुस्तकें जिनमें साहित्य,  राजनीति, दर्शन ,इतिहास आदि विषयों की पुस्तकें हुआ करती थी उन्होंने खूब पढ़ी थी और उनसे प्राप्त ज्ञान के प्रकाश में अपने देश समाज आदि के बारे में सोच विचार करते रहते थे। उनकी मानसिक जागरूकता सोच विचार और प्रभुता वह कारण थी कि घर छोड़ने के बाद कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी के पास चले गए आए और वहां उनके पत्र प्रताप को अपनी सेवाएं दी। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार लेख लिखें और उनमें से अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाएं। एक चिंतक विचारक के रूप में समाजवाद और मार्क्स एंगल्स की विचारधारा से लगातार प्रभावित और अनूप प्रमाणित होते रहे। क्रांति और समाज व्यवस्था को लेकर उनकी सोच इन विचारों से प्रभावित थी। राजनीतिक चिंतन और विचार के धरातल पर वे अपने समकालीनओं से प्राय आगे दिखाई पड़ते हैं।

शनिवार, 30 अप्रैल 2022

सुशांत सिंह राजपूत का जीवन परिचय


                         परिचय

 अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 1 जनवरी 1986 में पटना,बिहार में हुआ था। बॉलीवुड के चहेते और बेहतरीन कलाकारों में से एक थे, सुशांत ने अपने मेहनत और काबिलियत के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाये थे। अभिनेता होने के साथ ही वह एक लाजवाब डांसर भी है 31 वर्ष के सुशांत का जन्म बिहार के पटना में हुआ है उनके पिता का नाम के• के• सिंह है जो कि एक सरकारी अफसर रह चुके हैं और उनकी माता का नाम किसी को भी नहीं पता है लेकिन 2002 में उनकी मृत्यु हो गई थी सुशांत की चार बहने हैं जिनमें से उनकी बड़ी बहन मीतू सिंह राज्य स्तर की क्रिकेटर खिलाड़ी है सुशांत के स्कूल की पढ़ाई पटना के सेंट केरेंस हाई स्कूल से हुई है जिसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनील इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में ही छोड़कर अदाकारी की तरह बढ़ गए।

(सुशांत सिंह राजपूत)

                             फिल्मी करियर 

हमसे ना सुशांत के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो उनका सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान डांस में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई जिसके बाद उन्होंने डांस सीखने का फैसला किया जब जिनमें उनका परिवार उनके खिलाफ था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और श्यामक देवरी के डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए श्यामक उनकी कला और लगन से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में डांस करने का मौका दिया मुंबई आने के बाद उन्होंने एक डांस ग्रुप के साथ भी परफॉर्म किया जिसको महसूस कोरियोग्राफर एश्ले लोबो ने विकसित किया था इसके बाद वह थिएटर का भी हिस्सा रहे और शायद यही कारण है कि वह एक सफल अभिनेता बनकर सामने आए सुशांत ने माशूर एक्शन डायरेक्टर पालन अमीन से मार्शल आर्ट भी सीखा है उन्हें टीवी में उनका पहला ब्रेक स्टार प्लस के शो किस देश में है मेरा दिल से मिला जिसके बाद उन्होंने मशहूर टीवी सीरियल पवित्र रिश्ता में मानव का किरदार निभाया और सबके चहेते बन गए। वह जरा नच के दिखा 2 और झलक दिखला जा 4 जैसे बड़े डांसिंग शो के भी प्रतिभागी रहे हैं और झलक दिखलाजा 4:00 के दौरान उन्हें मोस्ट कंसिस्टेंट  परफॉर्मर का टाइटल भी मिल चुका है। एक समय था जब उनके साथ अभिनेत्रियों काम तक नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक साधारण परिवार से थे और उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। फिल्म शुद्ध देसी रोमांस इसका उदाहरण है काफी समय बाद फिल्म के लिए परिणीति चोपड़ा ने साइन किया था।

                             निजी जिंदगी

सुशांत की निजी जिंदगी की बात करें तो वह सीरियल पवित्र रिश्ता में रह चुके है अपने सह कलाकार अंकिता लोखंडे के साथ संबंध में थे सुशांत अपने मां के बेहद करीब थे और उनकी मौत के बाद सुशांत का पूरा परिवार दिल्ली आ गया अपनी पहली ही फिल्म से सबकी नजर में अपनी जगह बनाने वाले सुशांत का भी जीवन आसान नहीं रहा था मां-बाप की इच्छा के बिना उन्होंने फिल्मों में अपना  करियर चुना और आज इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्थापित किया था।

        ( मृत्यु तिथि -14 जून 2020 मुंबई बांद्रा )

• प्रसिद्ध फिल्में - 

1.  काय पो चे 

2. शुद्व देशी रोमांस 

3. एम एस धोनी 

4. पीके और केदारनाथ 

5. छिछोरे 

आपको बता दे सुशांत आखिरी फिल्म दिल बेचारा है जिससे उनके साथ संजना सांधी नजर आई है। यह फिल्म 24 जुलाई 2020 को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी।



गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है?

किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की चाल बदल जाती है। जब दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत अधिक होती है तो प्रकाश की किरण आपतन बिंदु पर अभिलंब प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है? से दूर हटती है किंतु जब प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत कम होती है तब किरण अभिलंब की और मुड़ती है अर्थात अपेक्षाकृत विरल माध्यम में किरण अभिलंब से दूर हटती है जबकि अपेक्षाकृत सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते है?

 जब प्रकाश की किरण किसी एक समागी  पारदर्शी  माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है, तो इन दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर किरण अपने पूर्व पथ से मुड़ जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन क्यों कहा जाता है?

 पाकिस्तान की मुख्य नदियां में सिंधु के अस्तित्व झेलम, चेनाब, रावी,सतलुज और काबुल है यह सभी सिंधु की सहायक नदियां है और जल पूर्ति रखती है इसलिए पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन कहा जाता है।

रेलवे फाटक पार करते समय रखी जाने वाली सावधानियों का उल्लेख करें।

रेलवे फाटक पार करते समय दो सावधानियां वर्तनी चाहिए ।

1.रेलवे लाइन पार करते समय सिंगल तथा दोनों तरफ के रेल पथ को देख लेना चाहिए।

2. यदि रेल फाटक पर लाल बत्तियां जली दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि गाड़ी आने वाली है यदि हरी बत्ती जली दिखाई दे तो रेल लाइन पार करना चाहिए।

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण क्या था?

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण बना आस्ट्रेलिया के युवराज आर्क ड्यूक फ्रांज की  बोस्निया की राजधानी सेराजेवों में हत्या। ऑस्ट्रेलिया ने इस घटना के लिए सर्बिया  को उत्तरदाई माना ऑस्ट्रेलिया ने सर्बिया को धमकी दी कि वह 48 घंटे के अंदर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें तथा आतंकवादियों का दमन करें सर्बिया ने ऑस्ट्रेलिया की मांगों को ठुकरा दिया फलत:  ऑस्ट्रेलिया ने 28 जून 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

श्री नरेंद्र मोदी (भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री)जीवन परिचय चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर।

श्री नरेंद्र मोदी भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री जीवन परिचय (चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर)

                       आरंभिक जीवन   

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में वदनगर मेहसाना डिस्टिक में हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद एवं माता का नाम हीरा बेन है, नरेंद्र मोदी के पिता बहुत साधारण तेली जाति के व्यक्ति थे जिनके 6 संताने थी जिनमें से एक नरेंद्र मोदी था नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे इनकी पढ़ाई में बहुत रुचि नहीं थी पर इनके शिक्षक के अनुसार भी कुशल वक्ता थे, वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था, मोदी जी ने वडनगर से स्कूल की पढ़ाई पूरी की वे राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही मोदी जी को देश के प्रति प्रेम था उन्होंने 8 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपना पंजीकरण करा लिया था, यह एक शक्तिशाली हिंदू राष्ट्रवादी समूह है जो भारत के संविधान की बातों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता नहीं चाहता था, हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है , हिंदुत्व की यह बात बीजेपी की जड़ है नरेंद्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारंभ हुआ उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाई गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेंद्र मोदी की रणनीति थी।



                          बचपन की बातें

पिता दामोदर दास मोदी और और मां हीराबेन के 6 बच्चे में से यह तीसरे नंबर के थे इनके घर खराब स्तिथि मैं था मां दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था गरीब के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन की कई ऊंचे नीचे पड़ाव देख लिए थे बचपन से ही इनको पढ़ाई लिखाई का बेहद शौक था यह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे,13 वर्ष की आयु में नरेंद्र मोदी की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई लेकिन कुछ परिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही यह घर छोड़कर चले गए यह घर छोड़कर ये उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदू आश्रम कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आक्षमों भ्रमण करने लगे।


                      

                     राजनैतिक जीवन  

जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया जहां कई लोगों ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था क्योंकि कई लोगों का मानना था कि मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया जो पिछले 60 सालों से भारतीय राजनीति को संभाल रही थी और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था कि वह उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे 1987 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए बीजेपी में हुए दिन-ब-दिन आगे बढ़ते रहें और सामाजिक हितों के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर  के उन्होंने बिजनेस के प्राइवेटाइजेशन (privatisation) छोटे बिजनेस को बढ़ावा दिया 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था फरवरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया जो कथित रूप से मुस्लिम ने किया था और बदले के प्रतिशोध इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमों पर भी हमला किया गया इस तरह  हिंसा बढ़ती गई इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगों ने पूरे देश में आलोचना की क्योंकि उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे मोदी के विरुद्ध दो जांच कमेटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिससे उन्हें दोषी ठहरा सकें।


रविवार, 24 अप्रैल 2022

थॉमस एडीसन का जीवन परिचय ( विद्युत बल्ब का आविष्कारक)


                        परिचय

थॉमस एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 मिलन ओहायो में हुआ था। और हियोरोन मिशिगन मैं वे बड़े पले। वह सैमुअल ओग्डन एडिशन और नैंसी मैथ्यू इलियट के सातवें और अंतिम पुत्र थे (यानी इनके माता का नाम नैंसी मैथ्यू एलियट और पिता का नाम सेमुअल ओगडेन एडिशन था) पैतृक परिवार डच था , जिसका पुराने समय से ही उपनाम एडिशन। स्कूल में युवा एडिशन का दिमाग बहुत ही भ्रमित था और उनके शिक्षक रेवरेंड इंग्ले उन्हें व्याकुल कहकर बुलाते थे और लगभग पूरे 3 महीने एडिशन ने स्कूल में बिताए बाद में उनकी माता ने एडिशन को घर पर ही पढ़ाना शुरू किया एडिशन ने अपनी घर शिक्षा आर•जी• पार कर स्कूल से और दी कूपर यूनियन स्कूल ऑफ साइंस एंड आर्ट से ग्रहण किया।
     एडिसन को सुनने में बचपन से ही तकलीफ होती थी। 
ये सब तब से चल रहा था जब से बचपन में उन्हें एक तेज बुखार आया था और उससे उबरते समय उनके दाहिने कान में चोट आ गई थी तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। उनके कैरियर के मध्य उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में बताया कि जब ट्रेन में सफर कर रहे थे तभी एक केमिकल में आग लग गई जिस वजह से वह ट्रेन के बाहर फेंके गए और उनके कान में चोट आ गई कुछ साल बाद ही उन्होंने इस कहानी को तोड़ते हुए एक नई कहानी बनाई और कहने लगे कि जब उनकी मदद कंडक्टर कर रहा था तभी अचानक उनके कान में चोट लगी थी कान के बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी अल्प मनोरंजन, निरंतर परिश्रम , असीम धैर्य,  आश्चर्यजनक समरण शक्ति और अनुपम कल्पना द्वारा एडिशन ने इतनी सफलता पाई। वे एक वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक सफल उद्यमी भी थे वह हर दिन अपने काम करने के बाद बचे समय को प्रयोग और परिश्रम में लगाते थे। वे अपनी कल्पना शक्ति और स्मरण शक्ति का उपयोग अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया उनके इसी टैलेंट की बदौलत से उन्होंने 14 कंपनियों की स्थापना की जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक  भी शामिल है जो आज भी दुनिया की सबसे बड़ी व्यापार करने वाली कंपनी के नाम से जानी जाती है।


थॉमस अल्वा एडिसन एक अमेरिकी आविष्कारक और व्यापारी थे उन्होंने अनेक यंत्र एवं युक्तियां विकसित की के जिनमे संसार भर लोगों के जीवन  में भारी बदलाव आए। विद्युत बल्ब तथा फोनोग्राफ सहित इन्होंने हजारों अविष्कार किया। वह भारी मात्रा में उत्पादन के सिद्धांत को व्यवहार में लाने वाले पहले अन्वेषकों में से एक थे। इसके अलावा खोज करने के लिए विशाल टीम का सहारा लेने वाले वे पहले आविष्कारक थे। इसलिए उन्हें पहले औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। एडिशन एक महान आविष्कारक थे उनके समय में उन्होंने पूरे यूएस (US) के 1093 पेटर्न्स अपने कब्जे में कर रखे थे,  और किंगडम फ्रांस और जर्मनी में भी उनके कई सारे पेटेंट्स है।उनके इन सभी पेटेंस का उनके अविष्कारों पर बहुत प्रभाव पड़ा। उनके पेटर्न्स के साथ ही उनके आविष्कार भी उस समय काफी प्रचलित होने लगे थे जिनमें इलेक्ट्रिक लाइट और पावर यूटिलिटीज साउंड रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है जिन्होंने बड़ी तेजी से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध पाई एडिशन के आविष्कारों में हमें अधिकतर मॉस - कम्युनिकेशन और टेली - कम्युनिकेशन से संबंध दिखाई देने लगता है। स्टॉप स्टीकर बोर्ड रिकॉर्डर करने की मशीन इलेक्ट्रिक कार के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक पावर रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है। उन्होंने जल्दी ही अपने इन अविष्कारों में प्रगति हासिल की और टेलीग्राफी ऑपरेटर में अपना करियर बनाना चाहिए बाद में एडिशन ने इलेक्ट्रिक पावर निर्माण की यंत्रणा को विकसित किया और घर व्यापार और फैक्टरी में उसे बढ़ते रहे जो आधुनिक दुनिया में एक विशाल अविष्कारक के रूप में जाना जाने लगा यह सब निर्माण करने उनका पहला स्टेशन न्यूयॉर्क की पल स्ट्रीक में बना। थॉमस एडिसन का हमेशा से ही यह कहना था कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है कि हमेशा एक और बार प्रयास करना क्योंकि जब आप असफल होते होते हो और अपने काम को छोड़ देते हो तब आप सफलता के बहुत करीब होते हो। 

             

             कैसे हुआ बल्ब का अविष्कार

बल्ब का आविष्कार 1878 ई• में थॉमस अल्वा एडिसन ने क्या था । एक अमेरिकी वैज्ञानिक है जिन्होंने सिर्फ बल्ब का अविष्कार नहीं किया बल्कि और भी कई सारे उपकरणों की खोज की जैसे - कार्बन टेलिफोन,मोशन पिक्चर कैमरा, ग्रामोफोन, अल्कलाइन स्टोरेज बैटरी जैसे यंत्रों का आविष्कार किया।

                    
 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

धीरूभाई अंबानी (रिलायंस के संस्थापक) का जीवनी (Dhiru Bhai Ambani Reliance ke sansthapak)

जन्म,प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा ।

धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता गोवर्धन भाई अंबानी एक साधारण टीचर थे और उनकी माता जमनबेन घरेलू महिला थी और यह गुजरात के जूनागढ़ के पास एक छोटे से गांव चोरवाड़ा  के एक साधारण शिक्षक के घर में धीरूभाई अंबानी का जन्म हुआ। जिनके लिए अपने इतने बड़े परिवार का लालन पालन करना काफी चुनौतीपूर्ण था। के लिए भी पैसे पूरे नहीं पढ़ते थे ऐसे में चार और भाई-बहन के बीच धीरूभई का शिक्षा ग्रहण करना काफी मुश्किल था ऐसी स्थिति में धीरूभाई अंबानी को हाई स्कूल की अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और अपने घर की माली हालत को देखते हुए परिवार का गुजर-बसर करने के लिए अपने पिता के साथ भाटिया इत्यादि बेचने छोटे - मोटे काम करने पड़े।


 

  धीरूभाई अंबानी को बिजनेस में मिली असफलता के बाद जॉइनिंग की नौकरी।

धीरूभाई अंबानी ने अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सबसे पहले फल और नाश्ता बेचने का काम शुरू किया लेकिन इसमें कुछ खास फायदा नहीं हुआ इसके बाद उन्होंने गांव के पास ही एक धार्मिक और पर्यटक को पर पूरी तरह निर्भर था जो कि साल में कुछ समय के लिए ही चलता था फिर किसी भी काम में सफल नहीं होने के बाद अपने पिता की सलाह में उन्होंने फिर नौकरी जॉइनिंग कर ली। तमाम असफलताओं मिलने के बाद धीरूभाई अंबानी ने अपने बड़े भाई रमणीक की मदद से यमन में नौकरी करने का फैसला लिया उन्होंने सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर अपनी पहली नौकरी की और करीब 2 साल तक नौकरी करने के बाद वह अपनी कार्यकुशलता और योग्यता के बल पर मैनेजर के पद पर पहुंच गए हालांकि नौकरी करने के दौरान भी वे हमेशा बिजनेस करने के अवसर तलाशते रहते थे। वे शुरुआत से ही बिजनेस करने का कोई भी मौका अxपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। शायद उनके इसी जुनून ने ही उन्हें दुनिया के सबसे सफल बिजनेसमैन की सूची में शामिल किया था वही धीरूभाई अंबानी  के बिजनेश के  प्रति उनका रुझान का अंदाजा उनके जीवन में घटित इस घटना के से लगाया जा सकता है कि जब वह सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर ₹300 प्रति माह के हिसाब से नौकरी करते थे उस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को चाय महज 25 पैसे में मिलती थी धीरूभाई अंबानी को 25 पैसे की चाह ने खरीद कर एक बड़े रेस्टोरेंट में ₹1 की चाय पीने जाते थे वह ऐसा इसलिए करते थे ताकि उस रेस्टोरेंट में आने वाले बड़े बड़े व्यापारियों की बात सुन सके और बिजनेस की बारीकियों को समझ सके इस तरह धीरुभाई ने अपने बड़े बिजनेसमैन के सपने को पूरा करने के लिए अपने तरीके से बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ग्रहण की और बाद में वह एक सफल बिजनेसमैन बनकर खरे उतरे। इसके अलावा धीरूभाई अंबानी के अंदर बड़े बिजनेसमैन बनने की योग्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने यमन में प्रचलित चांदी के सिक्कों की गलाई लंदन की एक कंपनी में करने यह जानकर शुरू कर दी कि सिक्को की चांदी का मूल्य सिक्को के मूल्य से अधिक है।

                 रिलायंस कंपनी की शुरुआत

 आपको बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी यमन में रह रहे थे उसके कुछ समय बाद यमन में आजादी के लिए आंदोलन शुरू हो गए थे, जिसकी वजह से वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यापार के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद धीरूभाई अंबानी को साल 1962 में यमन से भारत लौटना पड़ा। इस दौरान धीरूभाई अंबानी जी के जीवन का वह दौर था उनके पास न तो नौकरी थी और ना ही कोई कारोबार की शुरूआत करने के लिए पूंजी ऐसे में उन्होंने अपने चचेरे भाई चंपकलाल दामिनी के साथ मिलकर पॉलिस्टर धागे और मसालों के आयात निर्यात का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने महज ₹15000 की राशि के साथ रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन की शुरुआत मस्जिद बंदर के नरसिम्हा एक छोटे से ऑफिस के साथ की थी और यहीं से रिलायंस कंपनी का उदय हुआ। भूलेश्वर स्थित जय हिंद स्टेट में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। आपको बता दें कि शुरआती दौर मैं बिजनेस टाइकून धीरूभाई अंबानी का इरादा पॉलिएस्टर यार्न को याद करने और मसाले निर्यात करने का था इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि रिलायंस काऑपरेशन का पहला ऑफिस नरसीनाथन स्टील में बना था। जो कि महज एक 350 स्क्वायर फीट का एक कमरा था जिसमें सिर्फ एक टेलीफोन, एक टेबल और तीन कुर्सियां थी। शुरू में उनके पास सिर्फ दो कर्मचारी थे और उनके काम में उनकी मदद करते थे। दरअसल धीरूभाई अंबानी और चंपकलाल दमानी दोनों का स्वभाव और बिजनेस करने का तरीका एक दूसरे से बिल्कुल अलग था इसी वजह से साल 1965 में धीरूभाई अंबानी ने चंपकलाल दामिनी के साथ बिजनेस में पार्टनरशिप खत्म कर दी। और अपने दम पर बिजनेस की शुरुआत की थी। दरअसल चंपकलाल दामिनी एक सतर्क व्यापारी थे और उन्हें सूट बनाने के माल में कोई रुचि नहीं थी जबकि धीरूभाई अंबानी को रिक्स उठाने वाला व्यापारी माना जाता था। इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने शोध के व्यापार में अपनी किस्मत आजमाई और सकारात्मक सोच के साथ इस बिजनेस की शुरुआत की। धीरूभाई अंबानी को अपने माल की कीमत पहले से ही बढ़ने की उम्मीद थी और उससे उन्होंने जो मुनाफा कमाया उनके बिजनेस ग्रोथ के लिए काफी अच्छा था।
    


बुधवार, 20 अप्रैल 2022

बालकृष्ण भट्ट जीवन परिचय (BalKrishna bhatt jivan parichay)

 बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय, बायोग्राफी,जन्म,निबंध,निवास - स्थान,माता - पिता,शिक्षा, वृति,विशेष परिस्थिति, रचनात्मक सक्रियता , रचनाएं और इनकी निबंध बातचीत

 

बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय - कृष्णा भट्ट का जन्म 23 जून 1844 ईसवी में हुआ था। इनका जन्म इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था उनके माता का नाम पार्वती देवी एवं पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था पिता एक व्यापारी थे और माता एक संस्कृत  महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाए। इनके प्रारंभ शिक्षा संस्कृत का अध्ययन 1867 में प्रयोग के मिशन स्कूल से एंट्रेंस की परीक्षा दी। इनके वित्ती 1869 तक प्रयोग के मिशन स्कूल में अध्यापन। 1885 में प्रयोग के सी•ए•बी• स्कूल में संस्कृत का अध्यापन। 1888 में प्रयोग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त किंतु अगर स्वभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी और उसके बाद से लेखन कार्य पर ही निर्भर हो गए। इनके परिस्थिति पिता के निधन पर आंतरिक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का  सामना। पैतृक घर छोड़ कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।

रचनात्मक सक्रियता : भारतेंदु हरिश्चंद्र की कृष्णा से हिंदी वर्धनी सभा प्रयोग की ओर से 1877 ईसवी में हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ क्या इसे वे 33 वर्षों तक चलाते रहें। इसमें नियमित रूप से सामाजिक साहित्य नैतिक राजनीतिक विषयों पर निबंध लिखते रहे 1881 में वेदों की युक्ति पूर्ण समीक्षा की 1886 में लाला श्रीनिवास दास के संजीव गीता स्वयंवर की कठोर आलोचना की। जीवन के अंतिम दिनों में हिंदी शब्दकोश के संपादन के लिए श्यामसुंदर दास द्वारा काशी आमंत्रित किंतु अच्छा हुआ ना होने पर अलग हो गए।

रचनाएं : उपनस्यास - रहस्य कथा , नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वेरी, रसाताल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव।

नाटक - पदमावती, किराता ज्रूरनीय ,वेणी संहार,  शिशुपाल वध, दमयंती या दमयंती स्वयंवर,  शिक्षा दान, चंद्रसेन, सीता बनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, कट्टर सुम की एक नकल, बृहन्नाला इंग्लैंड एंड वेरी और भारत जननी, भारतवर्ष और कली, दूरदेशी, एक रोगी और एक वैध, रेल का विकेट खेल, बाल विवाह और आदि।
प्रहसन - जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विखंडन आदि।
निबंध - 1000 से आसपास निबंध जिसमें 100 से ऊपर बहुत महत्वपूर्ण । भट्ट निबंधमाला नाम से दो खंडों में एक संग्रह प्रकाशित।

बालकृष्ण भट्ट की मुख्य बातें।
बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिंदी गद्य के अधीन निर्माताओं और अन्य रचनाओं में एक है। भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकारों में से एक है वह हिंदी के प्रारंभिक युग के प्रमुख और महान पत्रकार निबंधकार तथा हिंदी की आधुनिक आलोचना के प्रवर्तक को में अग्रणी है उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को अपने प्रतिभाशाली जनधर्मी और लेखन से एक नवीन धरातल नवीन की दिशा और नया रूप रंग और मानसा दिया। निश्चय ही इस बात पर युगांतरकारी कार्य में वे एकाकी नहीं थे, भारतेंदु हरिश्चंद्र प्रताप नारायण मिश्र प्रेम धन राधाचरण गोस्वामी जैसे महान साहित्यकार उनके साथ थे। 12 यह एक सब संबंध स्थापित मान्यता है कि अपने युग की सर्वाधिक सक्रिय मुखर और प्रदूषण समय तक संस्कृति निष्ठा के साथ दसवें लेखन द्वारा साहित्य सेवा करते रहने वाले समर्पित साहित्यकार थे बालकृष्ण भट्ट। भारतेंदु युग की दो तीन प्रमुख साहित्यकारों में एक जिनके अनवरत लेखन से भारतेंदु युग का रचनात्मक एवं व्यक्तित्व निर्मित हुआ द्वेदी युग का मूलाधार निर्मित हो सका। साहित्य केबल कल्पना विलास और मनोरंजन की वस्तु नहीं है अपितु वह जन समूह के जीत के विकास का संवाहक और जन संस्कृति के विकास प्रभाव का मूर्ति वाणी में अपादान है। जोगन लोक संस्कृति से ज्यादा और दिशा पता है यह और पूर्व प्रधान मान्यता भारतेंदु युग के साहित्य से बनती है और इसके दृश्यों में बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं। आधुनिक हिंदी नवजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में नए सिरे से अपनी भाषा और साहित्य की मौलिक लोकवादी प्रकृति एवं जाति निष्ठा की पहचान करते हुए तत्वों को दिशा और प्रभाव देने का कार्य महान लेखकों ने अपनी राजधानी गतिविधियों द्वारा संपन्न किया उनमें विशेष रूप से सक्रिय है।
        बालकृष्ण भट्ट गद्दाकार थे अपनी अभिरुचि मानसा और प्रतिभा से परिवेश और यथार्थ से संपूर्ण सरोकार रखने वाले लेखक पत्रकार। उनके कार्य की भाषा और कला की जलेबी परिवेश और व्यर्थ में ही थी। लो बिहार में बोलचाल बातचीत और अभिरुचि भक में मूर्ति भाषा और कला कि उनके गध का कलेवर बन जाती हैं। वह नवजागरन और स्वाधीनता संघर्ष का दौर था जिनमे भीतरी और बाहरी स्वदेशी और विदेशी शक्तियों से टकराव और संघर्ष है जागरूक का दिन लेखक की नियति थी यह टकराव संघर्ष भर्ती जी के लेखन में अंतर कितना तेज और तेवर बनकर उभरता है। भट्ट जी ने हिंदी प्रदीप पूरे पूरे एक उपन्यास लिखे नाटक वर्षा ऋतु निबंध ही उनकी वह अपने पिता है उनका लेखन पूरी शक्ति सामर्थ्य वैभव के साथ प्रकट हुआ है। श्रमिक समस्याओं पर मैंने जमकर लिखा है। स्त्री शिक्षा महिला स्वतंत्रता राजा प्रजा कृषि का व्यवस्था अंग्रेजी शिक्षा सुरक्षिता में परिवर्तन देश सेवा अंधविश्वास आदि विषयों पर उन्होंने खूब लिखा है। मानव भागों और भाषा साहित्य के विषयों पर भी खुलकर लिखा। पंचायत हाथों पर कलाकार मंत्रियों ने कितने लिखे कि उनकी संख्या सैकड़ों में हैं। रामचंद्र शुक्ल ने अधिकारियों ने अंग्रेजों साहित्य के एडिशन और स्टील की श्रेणी में रखा है। बातचीत शीर्षक निबंध उनकी निबंधकार व्यक्तित्व और निबंध कला के साथ-साथ भाषा शैली का प्रतिनिधित्व करता है प्रस्तुत निबंध जी के बारे में ऊपर कही गई बातों को सहज की प्रमाणित करता है।

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का मुख्य जीवन परिचय क्या क्या है?

नमस्कार दोस्तों आज हमलोग डॉ भीमराव आंबेडकर जी के जीवनी के बारे मैं जानेंगे ।


 बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में महू, मध्यप्रदेश में एक दलित परिवार में हुआ था। मानव मुक्ति के पुरोधा बाबा साहेब अपने समय के सबसे सुपठित जनों में से एक थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क (अमेरिका), फिर वहाँ से लंदन (इंग्लैंड) गए। उन्होंने संस्कृत का धार्मिक, पौराणिक और पूरा वैदिक वाङ्मय अनुवाद के जरिये पढ़ा और ऐतिहासिक सामाजिक क्षेत्र में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत कीं। सब मिलाकर वे इतिहास मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता बनकर उभरे। स्वदेश में कुछ समय उन्होंने वकालत भी की। समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अछूतों, स्त्रियों और मजदूरों को मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया। उनके चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति रहे बुद्ध कबीर और ज्योतिबा फुले । - भारत के संविधान निर्माण में उनकी महती भूमिका और एकनिष्ठ समर्पण के कारण ही हम आज उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कह कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दिसंबर, 1956 ई० में दिल्ली में बाबा साहेब का निधन हो गया ।


बाबा साहेब ने अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं भाषण हैं 'द कास्ट्स इन इंडिया : - देयर मैकेनिज्म', जेनेसिस एंड डेवलपमेंट', 'द अनटचेबल्स, हू आर दे', 'हू आर शुन, बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म' बुद्धा एण्ड हिज धम्मा', 'थाट्स ऑन लिंग्युस्टिक स्टेट्स', 'द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन', 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' आदि। हिंदी में उनका संपूर्ण वाङ्मय भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय' नाम से 21 खंडों में प्रकाशित हो चुका है।


यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर 'जाति भेद का उच्छेद' से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

सहरसा जिला में आपका स्वागत है, सहरसा जिला की प्रमुख बातें क्या क्या है?

 • सहरसा का मुख्यालय कहां है - सहरसा

• गठन कब हुआ था -  1 अप्रैल 1954

• क्षेत्रफल कितना है - 1896 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 19 लाख 661

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1127

• कुल साक्षरता कितना है - 53.20%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 63.56% 

• महिला साक्षरता कितना है - 41.68%

• लिंगनुपात कितना है - 906

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(सहरसा सदर, सिमरी  - बख्तियारपुर)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 10(सिमरी बख्तियारपुर, नोहटाआ, सौर बाजार, सोनबरसा, सलखुआ,सत्तर कटैया, महेशी, कहरा,पतरघाट,बनाम इटहरी)

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(सहरसा) 

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 4(सहरसा, महिषी,सोनबरसा, सिमरी बख्तियारपुर)

• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी

 •मिट्टी कौन सी है - बलसुंदरी मिट्टी ,जलोढ़ मिट्टी

• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग और बीड़ी उद्योग 


https://totalsigret.blogspot.com/2022/04/blog-post_8.html

मधेपुरा जिला में आपका स्वागत है, मधेपुरा जिला का मुख्य बातें क्या क्या है?

 • मधेपुरा का मुख्यालय कहां है - मधेपुरा

• गठन कब हुआ था - 9 मई 1981

• क्षेत्रफल कितना है - 1787 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 2001 762

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1120

• कुल साक्षरता कितना है - 52.25%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 61.77% 

• महिला साक्षरता कितना है - 41.74%

• लिंगनुपात कितना है - 911

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(मधेपुरा, सिंघेश्वर)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 13(मधेपुरा, सिंघेश्वर, कुमारखंड, मुरलीगंज, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, चौसा, आलमनगर, गम्हरिया, धैलाढ़, शंकरपुर, ग्वालपाड़ा, पुरैनी)

• ग्राम पंचायत कितना है - 170

• ग्राम कितना है - 449

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(मधेपुरा) 

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 5(मधेपुरा, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, आलमनगर, सिंघेश्वर)

• प्रमुख मेला कौन सी है - सिंघेश्वर स्थान का मेला 

• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी

• प्रमुख व्यक्ति - बी•पी• मंडल(पूर्व मुख्यमंत्री)

 •मिट्टी कौन सी है - जालोढ मिट्टी

• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग

गुरुवार, 7 अप्रैल 2022

अंतरिक्ष विज्ञान की संपूर्ण बातें क्या क्या है ?

• अंतरिक्ष विभाग की स्थापना - 1972

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था - यूरी गागरिन (सोवियत संघ, 1961)

• अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला कौन थी - वेलेंटिना तेरेशकोवा (सोवियत संघ, 1963)

• पीएसएलवी (PSLV) का पूर्ण रूप - polar Satellite launch vehicle

 • विदेशी भूमि से छोड़ा गया भारत का पहला वैज्ञानिक उपग्रह - आर्यभट्ट (19 अप्रैल 1975)

• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1969

• थुंबा में प्रथम रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र की स्थापना - 1963

• भारत का पहला भूमिगत परमाणु विस्फोट - 18 मई 1974 पोखरण (राजस्थान)

• स्वदेश निर्मित एवं स्वदेश भूमि से परीक्षित प्रथम उपग्रह - रोहिणी (17अप्रैल 1983)

• भारत के राकेश शर्मा द्वारा रूसी अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरिक्ष में प्रवेश कब किया था - 1984

• विक्रमसारा  भाई अंतरिक्ष केंद्र -  त्रिवेंद्रम 

• भारत का उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र - श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश में 

• भारत का प्रथम कृत्रिम उपग्रह - रोहिणी ir-1 (18 जुलाई 1980 में)

• थुम्बा में स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी केंद्र (SSTC)की स्थापना - 1965

• भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की स्थापना - 1971,  (मुंबई)

• इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1971, कलपक्कम (मद्रास)

• चंद्रमा पर चरण रखने वाला प्रथम व्यक्ति - नीलआर्मस्ट्रांग (अमेरिका, 21 जुलाई 1969)

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम भारतीय  - स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा (1984)

• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन थी - कल्पना चावला(1997)

• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली दूसरी भारतीय महिला कौन थी - सुनीता विलियम्स (2007)

•अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा दिन रहने का श्रेय किसका था - सुनीता विलियम्स (195 दिन)

• अंतरिक्ष में प्रक्षेपित प्रथम कृत्रिम उपग्रह - स्पूतनिक (सोवियत संघ, 1957)

• देश का पहला रिएक्टर कौन था - अप्सरा (1956)

• दूसरा परमाणु परीक्षण ए•पी•जे• अब्दुल कलाम के नेतृत्व में कब किया गया - 13 मई 1998 को

• भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन कब हुआ था - 1 फरवरी 2003 ईस्वी में

• सर्वप्रथम मानव रहित कृत्रिम उपग्रह का प्रक्षेपण करने वाला देश - सोवियत संघ

• चंद्रतल पर मनुष्य को उतारने वाला प्रथम अंतरिक्ष यान - अपोलो -11

• मंगल ग्रह पर पहला अंतरिक्ष यान - पाथफाइंटर (6 जुलाई 1997)

• प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान - शेंजु ( चीन)

• प्रथम अंतरिक्ष शटल - कोलंबिया (अमेरिका 1981)

• अंतरिक्ष में यान से बाहर विचरण करने वाला प्रथम व्यक्ति - अलेक्सी लियोनोव

• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम - लाइका (एक कुत्तिया)

• देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र ध्रुव ने काम करना आरंभ कब किया - 8 अगस्त 1985

• परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना - अगस्त 1948

• रावतभाटा परमाणु विद्युत गृह - रावतभाटा (राजस्थान)

• तारापुर परमाणु विद्युत गृह - मुंबई (महाराष्ट्र)

• रमन अनुसंधान केंद्र - बैंगलोर (कर्नाटका)

• स्वदेश निर्मित प्रथम प्रक्षेपास्त्र - पृथ्वी (1988)

• प्रथम स्वदेश निर्मित उपग्रह - इनसेट - 2A (जुलाई 1992)

 




बुधवार, 6 अप्रैल 2022

शरीर के प्रमुख अदभूत तथ्य कौन कौन सी है

• मनुष्य का हृदय धड़कता है - 72बार/ मिनट 

• मानव खोपड़ी में हड्डियां होती है - 8

• स्वस्थ मनुष्य की श्वसन दर - 16 से 18 बार 

• मस्तिष्क का वजन - 1350 से 1400 ग्राम 

• मस्तिष्क का बड़ा भाग - सेरेब्रम (प्रमस्तिष्क)

• वृक्क ( किडनी ) का वजन - 150 ग्राम 

• शरीर की सबसे बड़ी हड्डी - फीमर ( जांघ में) 

• शरीर की सबसे छोटी हड्डी - जबड़े की 

• शरीर का सबसे कठोर तत्व - एनामिल 

• सामान्य मनुष्य का रक्तचाप - 120/80 मिमी.

• मानव रक्त ( क्षारीय) का P H मान - 7.4

• मनुष्य में रक्त की मात्रा होती है - 5 से 6 लीटर 

• मानव शरीर में जल की मात्रा - 65 से 80%

• रक्त को शुद्ध करता है - वृक्क ( किडनी)

• लाल रक्त कण का निर्माण - अस्थिमज्जा में 

• लाल रक्त कण का जीवनकाल - 20 - 120 दिन 

• श्वेत रक्त कण का जीवनकाल - 2 - 4 दिन 

• श्वेत रक्त कण को कहा जाता है - ल्यूकोसाइट 

• लाल रक्त कण को कहा जाता है -  एरिथ्रो साइट 

• शरीर का ताप नियंत्रण - हाइपोथेलेमस ग्रंथि 

• सर्वदाता रक्त समूह (यूनिवर्सल डोनर ) - O 

• सर्वग्राही रक्त समूह (यूनिवर्सल रिसेप्टर ) AB

• रक्तचाप मापने का यंत्र है - स्फेगमोमैनोमीटर 

• ब्लड बैंक कहलाता है - प्लीहा (स्प्लीन )

• भोजन का पाचन प्रारंभ होता है - मुख से 

• पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है - छोटी आंत में 

• पित्त स्रावित होता है - यकृत द्वारा 

• विटामिन संचित रहता है - यकृत में 

• शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि - यकृत (लीवर)

• सबसे छोटी ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि) - पिट्टयूटरी 

• मनुष्य में पसलियां पाई जाती है - 12 जोड़ी

• शरीर में हड्डियों की कुल संख्या - 206

• शरीर में मांसपेशियों की कुल संख्या - 639

• लार में पाया जाने वाला एंजाइम है - टायलिन 

• लिंग निर्धारण होता है - पुरुष क्रोमोसोम पर 

• मनुष्य का हृदय होता है - चार कोष्ठीय 

• शरीर में गुणसूत्रों की संख्या - 46

• शरीर का सबसे बड़ा अंग - त्वचा 

• शरीर की सबसे बड़ी कोशिका - तंत्रिका तंत्र 

• शरीर में अमीनो अम्ल की संख्या - 20

• शरीर में प्रतिदिन मुद्र बनता है - 1½ ली•

• मूत्र दुर्गंध देता है - यूरिया के कारण 

• मानव मूत्र का पीएच (PH) मान - 6

• शरीर का सामान्य तापमान होता है - 98.6°F या 37°C या 310K

• टिबिया नामक हड्डी पाई जाती है - पैर में 

• दांतो और हड्डियों के संरचना के लिए आवश्यक तत्व है - कैल्शियम एवं फास्फोरस 

• शरीर में उतकों का निर्माण होता है - प्रोटीन से 












शनिवार, 2 अप्रैल 2022

बौद्धधर्म के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य क्या क्या है?

•  बौद्धधर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे। इन्हें एशिया का ज्योतिपुंज(light of Asia) कहा जाता है।

• गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसवी पूर्व में कपिलवस्तु में लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था।

• इन्हें पिता शुद्धोधन सा के गण के मुखिया थे।

• इनकी माता माया देवी की मृत्यु इनके जन्म के सातवें दिन ही हो गई थी इसका लालन-पालन इनकी सौतेली मां प्रजापति गौतमी ने किया था।

• इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

• गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा के साथ हुआ इनके पुत्र का नाम राहुल था।

• सिद्धार्थ जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने निम्न चार दृश्य को क्रमशः देखा।

(१) बूढ़ा व्यक्ति (२) एक बीमार व्यक्ति (३) शव एवं (४) एक सन्यासी

• सांसारिक समस्याओं से व्यवस्थित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया है।

• गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के आलरकालम से  संख्या दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। आलारकलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए।

• अलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रूद्रकरामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की।

• उरुवेला में सिद्धार्थ को पांच साधक मिले।

• बिना अन्न जल ग्रहण के 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ।

• ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए व स्थान बोधगया कहलया।

• बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिससे बौद्ध ग्रंथों में धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है।

• बौद्ध ने अपने उद्देश जनसाधारण की भाषा पाली में दिए।

• बौद्ध ने अपने उपदेश कौशल वैशाली कौशांबी एवं अन्य राज्यों में दिए

• बुद्ध ने अपने सर्वाधिक उपदेश कौशल देश की राजधानी श्रावस्ती में दिए।

• बुध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था मे कुशीनार द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गई जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया।

• मल्लों ने  अत्यंत सम्मान पूर्वक बौद्ध का संस्कार  किया।

• बुद्ध के जन्म एवं मृत्यु की तिथि को चीनी परंपरा के कैंटोन अभिलेख के आधार पर निश्चित किया गया है।

• बौद्ध धर्म के बारे में हमें निषद ज्ञान पाली त्रिपिटक से प्राप्त होता है।

• बौद्ध धर्म मुल्तानी स्वर वादी है इसमें आत्मा की परिकल्पना भी नहीं है।

• बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।

• विष्णु दुखों से भरा है का सिद्धार्थ बुद्ध ने उपनिषद से लिया।

• बुद्ध के अनुयाई दो भागों में विभाजित थे - 

1. भिक्षुक - बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जिन्होंने सन्यास ग्रहण किया उन्हें भेजो कहा गया।

2. उपासक - गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म अपनाने वालों को उपासक आ गया।

• बौद्ध संघ में प्रविष्टि होने  को उपसंपदा कहा जाता था।

• बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष थी।

• बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है - बौद्ध, धर्म एवं संघ।

• ठीक अनु श्रुति के अनुसार मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को 8 भागों में बांट कर उन पर 8 स्तूपों का निर्माण कराया गया।





रविवार, 27 मार्च 2022

अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते बल्कि अमीर लोग पैसे का अविष्कार करते हैं।

                     संसार मैं अक्सर चतुर नहीं

                      साहसी लोग आगे बढ़ते हैं।

9 साल की उम्र में रॉबट कियोसाक और उनके बचपन के मित्र को एक सहपाठी के बीच हाउस पर इसलिए आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि वह एक समृद्धि स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चे थे। उनके एक गरीब डैडी एक शिक्षक थे और अच्छे पैसे कमाते थे लेकिन महीना चलाने के लिए हमेशा झूझते रहते थे जब उन्होंने यह सलाह दी कि जाकर पैसे बनाओ तो रॉबट और उनके मित्र माइक ने यह कहा सचमुच करने की कोशिश की: उन्होंने टूथपेस्ट के खाली ट्यूब लिए जो उस वक्त जस्ते से बनते थे। उन्होंने  पिघलाय और नकली निकल बनाने के लिए प्लास्टर के सांचों का इस्तेमाल किया।

                 रॉबट के डैडी ने उन्हें जल्दी ही सही राह पर पहुंचा दिया। उन्होंने यह सलाह दी कि उन्हें माइक के डैडी से पूछना चाहिए जिन्होंने कभी 8 में ग्रेड की पढ़ाई पूरी नहीं की थी लेकिन वह बहुत से सफल व्यवसाई चलाते थे।

माइक के डैडी पुस्तक के अमीर डैडी उन्हें सिखाने के लिए तैयार हो गए लेकिन उनकी कुछ शर्ते थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों लड़कों को उनके कन्वेंशस स्टोर में हर शनिवार की सुबह 3 घंटे तक काम करना होगा जिनमें डिब्बों की दूरी साफ करना तथा दीगर सफाई शामिल थी। उन्होंने कहा कि हुए 10 सेंट प्रति घंटे की दर से पैसे देंगे। रॉबर्ट आमतौर पर यह 10 सेंट कॉमिक बुक्स पर सर्च कर देते थे।

इस निरस काम और कम वेतन से रॉबर्ट का जल्दी ही मोहभंग हो गया। जब उन्होंने अपने मित्र से कहा कि वह यह काम छोड़ने वाले हैं तो माइक ने कहा कि हमें डैडी ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि ऐसा होगा और रॉबर्ट को जाकर उनसे मिलना चाहिए रॉबर्ट के डैडी स्कूल टीचर थे और  व्याख्यान देते थे लेकिन माइक के डैडी  कम बोलते थे और एक बहुत अलग तरीके से सिखाते थे ऐसा रॉबर्ट को पता लगने वाला था।

अगले शनिवार की सुबह रॉबट माइक के डैडी से मिलने गए लेकिन आमिर डैडी ने रॉबर्ट से 1 घंटे तक धूल भरे अंधेरे लिविंग रूम में इंतजार कराया वह भन्न गए और भावुक हो गए जब उन्हें माइक के डैडी के सामने शिकायत करने का मौका मिला उन्होंने अग्र होकर कहा की वे लोभी है और उनके प्रति सम्मान नहीं दिखा रहे हैं। जब उन्होंने कहा कि माइक के डैडी ने अनुबंध के मुताबिक उन्हें कुछ नहीं सिखाया था तो वह शांति से असहमत हुए।

अमीर डैडी ने स्पष्ट किया कि जीवन आपको शब्दों से नहीं सिखाता है बल्कि चारों तरफ धकेल कर सिखाता है कुछ लोगों जीवन के दुखों को चुपचाप जेल जाते हैं बाकी नाराज हो जाते हैं और अपने बॉस या उनके परिजनों के खिलाफ भड़ास निकालते करते हैं लेकिन कुछ ऐसा लोग इससे सबक सीखते हैं और वास्तव में जीवन के धक्कों का स्वागत करते हैं क्योंकि इसका मतलब है कि उन्हें कुछ  सीखने की जरूरत है।

जो लोग या सबक नहीं सीखते हुए जीवन भर हर व्यक्ति को दोष देते रहते हैं और किसी बड़े अवसर का इंतजार करते हैं या सुरक्षित खेलने और कभी जोखिम ना लेने या बड़ी जीत हासिल ना करने का निर्णय लेते हैं।

उन्होंने रॉबर्ट को बताया कि वे और माइक पहले लोग थे जिन्होंने उनसे कभी पैसे बनाने का तरीका सीखना चाहा था उनके पास 150 से ज्यादा कर्मचारी थे और हालांकि उन्होंने नौकरी मांगी थी लेकिन उन्होंने रॉबर्ट और माइक की तरह कभी ज्ञान नहीं मांगा था।

इसलिए आमिर डैडी ने जीवन की तरह सिखाने की कोशिश में लड़कों को थोड़ा आसपास धकाया। रॉबर्ट ने पूछा कि उन्होंने क्या सबक सिखा सिवाय इसके कि आमिर डैडी ओछे थे और अपने कर्मचारियों का शोषण करते थे।अमीर डैडी ने इस बात पर उन्हें चुनौती दी और कहा कि ज्यादातर लोग दूसरों को दोष देते हैं जबकि वास्तव में उनका नजरिया ही समस्या होता है।

समस्या को कौन सुलझाएगा? उनका मस्तिष्क माइक के डैडी ने कहा वे चाहते थे कि रॉबर्ट यह सीखे कि पैसा कैसे काम करता है, ताकि वे इसे अपनी खातिर काम करा सके। वे रॉबर्ट के क्रोध को देख कर भी खुश थे क्योंकि क्रोध प्रेम के साथ मिलकर जोश को बनाता है जो सीखने का एक अहम घटक है।

उन्होंने आगे कहा कि पैसा लोगों की समस्याओं को नहीं सुलझा सकता। कई लोगों के पास भरी तनख्वाह वाली नौकरी तो होती है लेकिन इसके बावजूद भी पैसे की समस्याओं से धीरे रहते हैं जैसे रॉबर्ट के गरीब डैडी क्योंकि वह जानते ही नहीं है कि पैसे से अपनी खातिर कैसे काम कराएं।

उन्होंने कहा कि अगर रॉबर्ट ने यह सबक अभी नहीं सीखा तो उन्होंने 10 सेंट प्रति घंटे की नौकरी में जो महसूस किया था यानी निराशा और यह महसूस करना जैसे यह वेतन काफी नहीं था वैसा ही वे जीवनभर महसूस करते रहेंगे उन्होंने रॉबर्ट को टैक्स की अवधारणा बताइए और यह स्पष्ट किया कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग सरकार को उन पर टैक्स लगाने की अनुमति देते हैं लेकिन अमीर नहीं देते।

उन्होंने पूछा कि क्या रोबोट में अभी भी सीखने के प्रति जोश था। जब उन्होंने हां कहा तो अमीर डैडी ने उनसे कहा कि अब वे स्टोर में काम करने के लिए उन्हें पैसे नहीं देंगे। उन्होंने रॉबर्ट ने कहा कि वे इसके पीछे का अर्थ निकालने के लिए अपने दिमाग का इस्तेमाल करें।

रॉबर्ट और माइक ने 3 सप्ताह तक मुफ्त में काम किया माइक के डैडी आए और उन्हें बातचीत के लिए बाहर ले गए। उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने अब तक कोई चीज सीखी। वे कुछ नहीं सीख पाए थे। आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि अगर इस शब्द को नहीं सीखते हैं तो वह ज्यादातर लोगों जैसे होंगे जो जीवन भर काम पैसे के लिए कड़ी मेहनत करते रहते हैं। उन्होंने प्रति घंटे 25 सेंट वेतन का प्रस्ताव रखा जिसका बच्चों ने प्रतिरोध किया। उन्होंने इसे बढ़ाकर $1 प्रति घंटे कर दिया और फिर $2 लेकिन रॉबर्ट खामोश बने रहें  1 घंटे के $5 के अंतिम प्रस्ताव के बाद रॉबर्ट जान गए कि वे नहीं बिकेंगे।

अमीर डैडी ने कहा कि यह अच्छी बात थी कि उनकी कोई कीमत नहीं थी। ज्यादातर लोगों की होती है क्योंकि डर और लोभ उनके जीवन को नियंत्रित करता है गरीब का डर उनसे कड़ी मेहनत कराता है और वेतन कमाबाता है लेकिन एक बार जब उनके पास वेतन आ जाता है तो लोभवश वे उन तमाम चीजों के बारे में सोचने लगते हैं जिन्हें वे खरीद सकते हैं इससे उन्हें ज्यादा पैसे की जरूरत महसूस होती है ताकि वह ज्यादा खर्च कर सके इसी को अमीर डैडी चूहा दौड़ कहते हैं।

उन्होंने लड़कों को बताया कि पहला कदम खुद के सामने यह स्वीकार करना है कि वे क्या महसूस कर रहे हैं अक्सर लोग टाकिर्क दृष्टि से सोचने के बजाय अपनी भावनाओं के तहत प्रक्रिया करते हैं वह यह स्वीकार करने से डरते हैं कि पैसा ही उनके जीवन को चला रहा है इसलिए पैसा उन्हें नियंत्रित करता है।

ऐसी बात नहीं है कि इस डर का सामना सिर्फ गरीब ही जो करते हैं अमीर लोगों को ही अक्सर डर लगता है। अमीर डैडी लड़कों को सिर्फ अमीर बनना ही नहीं सिखाना चाहते थे क्योंकि पैसे से समस्या नहीं सुलझती है।

आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि स्कूल महत्वपूर्ण है लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह शुरुआत नहीं बल्कि अंत है। और कुंजी यह है कि लड़के सोचने के लिए अपने भावनाओं का इस्तेमाल करना सीखे अपनी भावनाओं से सोचना ना सीखें उन्हें अपने विचारों का चयन करना सीखना चाहिए।

आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि वे पैसा कमाने के तरीके पर निगाह रखें जिस पल आप किसी अवसर को देख लेते हैं आप जीवन भर अफसरों को देखने लगेंगे।

लड़कों ने ऐसा ही किया और जल्द ही उन्हें एक लाइब्रेरी बनाने का अवसर दिखा जहां बच्चे प्रवेश शुल्क देकर 2 घंटे में मनचाही कॉमिक पुस्तकें पढ़ सकते थे बिना बीकी कॉमिक बुक्स जो कन्वीनियंस स्टोर से फेंक दी जाती थी।

उन्होंने भारी मुनाफा कमाया और लाइब्रेरी का यह व्यवसाय 3 महीने तक अच्छी तरह चला लेकिन फिर लाइब्रेरी में फसाद होने की वजह से इसे बंद करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में पैसे से अपनी खातिर काम कराने का पहला सबक सीख लिया था। वह ज्यादा सीखने के लिए तैयार थे और माइक के डैडी उन्हें सिखाने के लिए तैयार थे।





शुक्रवार, 18 मार्च 2022

सभी_महिलाओ_ और लड़कियों_को_आदर_सहित_समर्पित यह फैसला कीजिए कौन कैसा है। लड़का या लड़कियां



लड़के ने नम्बर मांगा आप ने दे दिया... 

लड़के ने तस्वीर मांगी आप ने दे दी...

लड़के ने वीडियो कॉल के लिए कहा आप ने कर ली...

लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा आप ने हटा दिया...

लड़के ने कुछ देखने की ख्वाहिश की आप ने पूरी कर दी...

लड़के ने मिलने को कहा आप माँ बाप को धोखा देकर आशिक़ से मिलने पहुंच गयीं...

लड़के ने बाग में बैठ कर आप की तारीफ़ करते हुए आपको सरसब्ज़ बाग दिखाए आपने देख लिये...

फिर जूस कार्नर पर जूस पीते वक़्त लड़के ने हाथ लगाया, इशारे किये, मगर कोई बात नहीं अब नया ज़माना है यह सब तो चलता ही है...

फिर लड़के ने होटल में कमरा लेने की बात की, आप ने शर्माते हुए इंकार कर दिया, कि शादी से पहले यह सब अच्छा तो नहीं लगता न...

फिर दो तीन बार कहने पर आप तैयार हो गयीं होटल के कमरे में जाने के लिए...

आप दोनों ने मिल कर खूब एंजॉय किया...

अंडरस्टेंडिंग के नाम पर दुल्हा दुल्हन बन गए बस बच्चा पैदा न हो इस पर ध्यान दिया...

फिर एक दिन झगड़ा हुआ और सब खत्म क्योंकि हराम रिश्तों का अंजाम कुछ ऐसा ही होता है...

लेकिन लेकिन...

यहां सरासर मर्द गलत नहीं है, वह भेड़िया है, वह मुजरिम है, वह सबकुछ है...

क्योंकि आप ने तो तस्वीर नहीं दी थी वह जबर्दस्ती आपके मोबाइल में घुस कर ले गया था...

आप ने तो अपना नम्बर नहीं दिया वह लड़का खुद आप के मोबाइल से नम्बर ले गया था...

आप ने तो वीडियो कॉल नहीं की वह लड़का खुद आप के घर पहुंच गया था आपको लाइव देखने...

जूस कार्नर पर भी जबरदस्ती ले गया था गन प्वाइंट पर...

होटल के कमरे तक भी वह आपको जबर्दस्ती आपके घर से ले गया था...

तो मुजरिम तो सिर्फ लड़का है आप तो बिल्कुल भी नहीं...

बच्ची हैं आप कोई चार साल की?

आपको समझ नहीं आती?

यह कचरे में पड़ी लाशें देख कर भी आपको अक़्ल नहीं आती?

यह बिना सर के मिलने वाले धड़ आपकी अक़्ल पर कोई चोट नहीं देते?

यह सोशल मीडिया पर आए दिन ज़्यादती के बढ़ती हुई घटना आपको कुछ नहीं बताती?

जूस कार्नर पर जाना, अपनी नंगी तस्वीर किसी गैर आदमी या लड़के को देना...

आपको नहीं पता था कि एक होटल के कमरे में या चारदीवारी में जिस्मों की प्यास बुझाई जाती है, 

सब पता था आपको, सब पता है आपको...

होटल के कमरे में मुहब्बत के अफसाने नहीं लिखे जाते,वहां कोई इबादत नही होती है

फिर शिकायत होती है के चार लड़कों ने ग्रुप रेप कर दिया... 

क्या लगता है वह आपका जो आपकी इज्ज़त का ख्याल रखे जो खुद आपको इसी मकसद के लिए लेकर जा रहा है?

अपनी सीमा में रहेंगी तो आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता...

जिस्म के भूखो से दूर ही रहे लड़का हो या लड़की प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम ना करे प्यार दिल देखकर करे ना कि जिस्म देखकर l❣ जब तक तुम साथ नही दोगी तब तक किसी लड़के की कोई औकात नही हैं कि वो तुम्हे किसी होटल के रूम तक ले जा सके।।।।गलत लगे तो  मुझे माफ कीजिएगा!!  

      (तो आपलोग हमें फॉलो जरूर करे)

सोमवार, 14 मार्च 2022

मुख्यमंत्री वृद्धजन योजना क्या है? कैसे लाभ ले सकते हैं इस योजना है जरूर जान लीजिए।

बिहार सरकार ने 60 साल या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए मुख्यमंत्री वृद्धाजन पेंशन योजना की घोषणा की है । इस योजना के तहत 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को सरकार पेंशन देगी। सरकार की इस योजना का फायदा उन लोगों को नहीं मिल पाएगा जो सरकारी नौकरियों से रिटायर हुए हैं सरकार का कहना है कि बिहार में बहुत से ऐसे नागरिक है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उम्र के इस पड़ाव में वह काम करने में सक्षम नहीं है। रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए उन्हें आश्रित रहना पड़ता है ऐसे में वृद्ध नागरिकों को आर्थिक मदद के इरादे से इस योजना की शुरुआत की गई है। सरकार के अनुसार अब तक किसी पेंशन योजनाओं से वंचित राज्य के वृद्ध जनों को अन्य पेंशन योजना के तहत इस योजना के तहत ₹400 मासिक पेंशन मिलेगी इस योजना के मुख्य  बातें हैं - 

• बिहार 60 वर्ष और उसके ऊपर के सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला पहला राज्य बन गया है।

• बिहार सरकार ने 1 मार्च 2019 को यूनिवर्सल ओल्ड एज पेंशन स्कीम लॉन्च की है।

• इस योजना का लाभ सभी जातियों और हर वर्ग के उस बुजुर्गों को मिलेगा जिससे अब तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई पेंशन नहीं मिलती है।

• इसी योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब लोगों को प्रतिमाह ₹400 और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रति माह ₹500 मिलेंगे।

• अन्य राज्यों में वृद्धावस्था पेंशन केवल बीपीएल परिवारों sc-st विधवा महिलाओं और विकलांगों को मिलती है हालांकि बिहार में हर एक पुरुष या महिला की उम्र 60 या उससे ऊपर है और उन्हें राज्य सरकार या केंद्र सरकार से अब तक कोई पेंशन नहीं मिल रही है तो वे मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत पेंशन के हकदार होंगे।

• पहले से गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा था। विधवा पेंशन, दिव्यांगजनों को पेंशन जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही थी लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के सभी वृद्धजनों को चाहे स्त्री हो या पुरुष जी ने केंद्र या राज्य सरकार से कोई वेतन पेंशन परिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है उन्हें इसका लाभ देने की योजना बनाई और इसे लागू कर दिया गया है।

• इस योजना का लाभ करीब 35 से 36 लाख बुजुर्गों को मिलेगा जो अब तक किसी योजना के तहत पेंशन नहीं पाते हैं।

रविवार, 13 मार्च 2022

बिहार का प्राचीन इतिहास क्या है?

• पूर्व ऐतिहासिक काल में बिहार के विभिन्न भागों में आदिमानव रहते थे। आदिमानव से जुड़े विभिन्न प्रकार के पुरातात्विक साक्षी एवं सामग्रियां विभिन्न जगहों से प्राप्त हुई है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल जहां से आदिमानव से जुड़ी चीजें मिली है वे हैं : मुंगेर,चिरांद(सरण) ,चेचर( वैशाली) ,नालंदा,सोनपुर, मनेर (पटना) आदि।

• पूर्व प प्रस्तर युग (100000 ई पूर्व से पहले ) के औजार मिले हैं। इसमें पत्थर की कुल्हाड़ी की फल, चाकू और खुरप के रूप में प्रयोग किए जाने वाले पत्थर के टुकड़े हैं। यह अवशेष मुंगेर और नालंदा जिले से प्राप्त हुए हैं।

• मध्य प्रस्तर युग (100000 ई पूर्व से 40000 ई पूर्व) के अवशेषों में छोटे आकार के पत्थर के बने सामान है जो तेज धारा एवं नोक वाले हैं। इनके अवशेष मुंगेर से मिले हैं।

• नव प्रस्तर युग (4000 से 2500 ई पूर्व) के अवशेष बिहार में चिरांद और चेचर जिलों से प्राप्त हुए हैं। इनमें नौ केवल पत्थर के सूक्ष्म औजर प्राप्त हुए हैं बल्कि हड्डियों के सामान भी मिले हैं।

• उत्तर वैदिक काल में (1000 ई पूर्व से 600 ई पूर्व ) मैं आर्यों का विस्तार बिहार में प्रारंभ हुआ। इस विस्तार में लौह - प्रौद्योगिकी की देन निर्णायक रही । 800 ई पूर्व रचित शतपथ ब्राह्मण में गांगेय घाटी के क्षेत्र में आर्यों द्वारा जंगलों का जलाकर और काटकर साफ करने का उल्लेख मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव द्वारा अपने पुरोहित गौतम राहु गन की अग्नि का पीछा करते हुए वर्तमान गंडक नदी 

( सदानीरा) तक पहुंचने की बात कही गई है।

• प्राचीन भारत के सोलह(16) महाजनपदों में प्रमुख थे - मगध और अंग। मगध के अंतर्गत वर्तमान बिहार के पटना तथा गया जिलों के क्षेत्र शामिल थे, जबकि अंग भागलपुर के आसपास के क्षेत्र को कहते थे।

• भांग के तीन अंतिम राजाओं में प्रथम दाधिवाहन थे, जिनकी की पुत्री चांदना महावीर के धर्म को स्वीकार करने वाली प्रथम महिला थी।

• वज्जी 8 गन राज्यों का संघ था। इसमें वैशाली के लिचिछ्वी भी मिथिला के विजेता कुंडाग्राम के ज्ञात के विशेष रूप से विख्यात थे। गणराज्य के प्रमुख सिद्धार्थ के यहां महावीर का जन्म 540 ईसवी पूर्व में कुंडल ग्राम में हुआ था। महावीर की माता त्रिशला लिच्छवी गणराज्य के प्रमुख घटक की बहन थी। महावीर स्वामी ने 468 ईसवी पूर्व में पावापुरी नामक स्थान पर निर्माण प्राप्त किया।

• वैशाली बौद्ध काल में सबसे शक्तिशाली राजीव था। इसकी स्थापना सूर्यवंशी इक्ष्वाकु के पुत्र विशाल ने की थी। महाभाग्य जातक में वैशाली को एक धनी समृद्ध साली तथा घनी आबादी वाला नगर कहा गया। जैन साहित्य से पता चलता है कि मगध के शासक अजातशत्रु के विरुद्ध चेतक ने मलका सी तथा कौशल के साथ मिलकर एक सम्मिलित मोर्चा बनाया था।

• यजुर्वेद में विदेश राज्य का उल्लेख मिलता है। यहां के राजवंश की शुरुआत इक्ष्वाकु के पुत्र ने भी विदेह से मानी जाती है जो सूर्यवंशी थे। दूसरे राजा मीठी जनक विदेह मिथिला क्या स्थापना की थी। इसके बाद से यहां के सभी राजाओं के नाम में जनक सब जुड़ने लगा। इस वंश के प्रसिद्धि शासक जनक विधि के शासन कल में विद्वानों की एक प्रतियोगिता हुई थी जिनमें याज्ञवल्क्य विजय हुए। इनकी जानकारी बृहदारण्यक उपनिषद में मिलती है।

•  अलकप्प के बुली गणराज आधुनिक बिहार राज्य के शहानाबाद ,आरा और मुजफ्फरपुर जिलों के बीच स्थित था। बुली लोग बौद्ध धर्म के अनुयाई थे। महाप्रिनिवर्ण सूत्र के अनुसार मोदी की मृत्यु के पश्चात उन्होंने उनके अवशेषों का एक भाग प्राप्त किया तथा उस पर स्तूप का निर्माण करवाया था।

शनिवार, 12 मार्च 2022

लोक शिकायत निवारण कानून क्या है ?लोक शिकायत निवारण कानून कैसे सूचना दे सकते हैं, लोक अदालत में शिकायत कैसे करें, बिहार लोक शिकायत निवारण कानून क्या है?

• आम जनता की समस्याएं एवं शिकायतों का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। शिकायतों की सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने की ठोस पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था कायम करने के उद्देश्य से गुड - गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार द्वारा संपूर्ण क्रांति दिवस एवं विश्व पर्यावरण दिवस दिनांक 5 जून 2016 को पूरे राज्य में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 में लागू किया गया है।

• अब जनता को उनकी शिकायतों की सुनवाई एवं उसके निवारण के अब सर का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं किसी शिकायत पर की गई कार्रवाई अथवा पारित निर्णय की सूचना भी प्राप्त करने का उन्हें वैधानिक अधिकार अधिनियम द्वारा प्राप्त हुआ है। यह अपने आप में अभिनव प्रयोग है। बिहार देश का ऐसा पहला राज्य है जहां आम लोगों को उनके परिवार पर सुनवाई के साथ-साथ उनके निवारण का भी लागू कानूनी अधिकार प्रदान किया गया है।

• आम जनता को राज्य सरकार द्वारा राज्य में चलाई जा रही किसी योजना कार्यक्रम या सेवा में संबंध में कोई लाभ या अनुतोष मांगने हेतु परिवाद दायर करने का अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं ऐसी किसी योजना कार्यक्रम या सेवा का फायदा पहुंचाने में विफल रहने पर अथवा विलंब होने पर भी परिवाद दायर किया जा सकता है। किसी लोक सेवक द्वारा राज्य में प्रभावी किसी विधि लिपि सेवा कार्यक्रम या योजना के उल्लंघन से उत्पन्न किसी मामले में भी आम जनता को शिकायत करने का अधिकार इस अधिनियम के द्वारा प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा निशुल्क परिवाद दायर करने की व्यवस्था की गई है।

• राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम को कार्य न विनती करने के लिए स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा विकसित करते हुए राज्य के सभी 101 अनुमंडलो, सभी आरती जिला मुख्यालय के साथ सभी 40 विभागों के लिए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पद सृजित किए गए हैं और इन पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है। इन कार्यालयों में सहयोगी कर्मियों के रूप में बारिश होती 30 पद सृजित करते हुए इन पर नियोजन भी किया गया है।

• परिवाद के निवारण की दृष्टि पथ में रखकर इस अधिनियम के तहत अपील दायर करने का प्रावधान किया गया है तथा यदि कोई लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अथवा कोई अन्य लोग प्राधिकार किया प्रथम अपीलीय प्राधिकार बिना किसी पर्याप्त और युक्ति युक्त कारण के नियम समय सीमा के भीतर सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने में विफल रहता है तो उस पर दंड आरोपित करने का प्रावधान इस अधिनियम मैं क्या गया है, जिसकी वसूली उस पदाधिकारी के वेतन से की जाएगी। इस अधिनियम की सफलता इसी बात से साबित होती है कि इतने कम दिनों के अंदर लगभग 82122 आवेदन पत्र इस व्यवस्था के तहत प्राप्त हुए हैं, जिसमें लगभग 60908 मामलों का समय सीमा के भीतर निष्पादन किया जा चुका है। शेष वादों में सुनवाई जारी है। परिवार प्राप्त करने के लिए सभी विभाग, जिला एवं अनुमंडल में लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र बनाए गए हैं।

• शिकायतों की प्राप्ति के लिए सूचना भवन में राज्य लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र का भी निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति डाक द्वारा ऑनलाइन वेब पोर्टल http/lokshikayat.Bihar.gov. In अथवा ईमेल infolokshikayat - bih @gov. in से भी परिवाद दर्ज करा सकता है। परिवाद दर्ज कराने तथा दर्ज कराने के परिवाद पर करवाई की स्थिति जानने के लिए टोल फ्री नंबर वाला कॉल सेंटर (नंबर 18003456284) भी स्थापित किया गया है।


सोमवार, 7 मार्च 2022

मुजफ्फरपुर जिला की मुख्य बातें क्या क्या है?

  • मुजफ्फरपुर का मुख्यालय कहां है - मुजफ्फरपुर

• गठन कब हुआ था - 1875

• क्षेत्रफल कितना है - 3172 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 4801062

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1514

• कुल साक्षरता कितना है - 63.43%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 71.28%

• महिला साक्षरता कितना है - 54.67%

• लिंगनुपात कितना है - 900

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है- 2(मुजफ्फर पूर्वी, मुजफ्फर पश्चिमी)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 16(साहेबगंज,बरूराज, पारू,सरैया,मड़वन, कांटी,मीनापुर, बोचहां,औराई, कटरा,गयघाट, बंदरा,ढोली,मुसहरी, कुढहनी,सकरा)

• ग्राम पंचायत कितना है - 387

• ग्राम कितना है - 1811

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(मुजफ्फर)

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 10(मुजफ्फरपुर,साहेबगंज,औराई,कांटी, बोचहां,बरूराज,मीनापुर,गायघाट,पारू,सकरा)

• प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी - नथुनी महतो, भरत ठाकुर, महेंद्र सिंह, रामचंद्र शर्मा, राम परीक्षण शर्मा, सहदेव शर्मा, डॉ सूर्यदेव सिंह, दीप नारायण सिंह, जगन्नाथ साहू, लक्ष्मी गुप्ता, बावन सिंह दास,वीर प्रसाद साहू,मंजूर अहसन एजाजी,महादेव शाहू

• प्रमुख मेला कौन सी है - मकर सक्रांति का मेला,हरदी मेला

• प्रमुख नदी कौन सी है - बागमती, बूढ़ी गंडक 

 •मिट्टी कौन सी है - जलोढ मिट्टी,ताल मिट्टी,

• उद्योग कौन सी है - चीनी उद्योग,थर्मल पावर,वैगन फैक्टरी, सूती वस्त्र उद्योग आदि।

• पर्यटक स्थल कौन कौन सी है - शहीद खुदीराम स्मारक 

• एसटीडी (STD) कोड - 0621 

• प्रमुख व्यक्तित्व - रामवृक्ष बेनीपुरी


















रविवार, 6 मार्च 2022

बिहार में बेरोजगारी के कारण एवं निदान कैसे हुआ ।

• बेरोजगारी एक आर्थिक समस्या है। अर्थव्यवस्था में जब प्रचलित मजदूरी पर व्यक्ति काम करता है उसे काम नहीं मिलता है तब उसे बेरोजगार कहा जाता है।

• देश की कुल बेरोजगार व्यक्तियों का 6.65% बिहार राज्य में निवास करता है। बिहार में कुल श्रमशक्ति का 2.3% बेरोजगार है, जबकि भारतवर्ष के कुल श्रमशक्ति का 2.8% प्रतिशत बेरोजगार है।

• भारतवर्ष की कुल  रोजगार व्यक्तियों का 11.13% बिहार• राज्य में निवास करता है। योजना आयोग के अनुसार भारत के कुल बेरोजगार का 7 से 8 % बिहार राज्य में निवास करता है।

• प्रथम पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण रोजगार भर्ती हेतु समुदायिक विकास योजना को लागू क्या गया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन किया जा सके।

• बिहार सरकार ने दुतीय योजना 1965 से 61 में केंद्र सरकार के साथ वृहत उद्योगों तथा भारी उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्रों में स्थापित किया जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित किए गए।

• तृतीय पंचवर्षीय योजना में बृहत उद्योगों का विस्तार चलता रहा तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रम को और सुदृत किया गया ताकि गावों में रोजगार सृजित किए जाए।

• बिहार सरकार ने रोजगार सृजन हेतु चतुर्थ पंचवर्षीय योजना में निम्नांकित कार्यक्रम चलाए।

• रोजगार कार्यक्रम के लिए पंचवर्षीय योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई नए विस्तृत रोजगार कार्यक्रम लागू किए गए 

• आठवीं पंचवर्षीय योजना में पुराने रोजगार कार्यक्रमों में परिवर्तन किया गया तथा नई रोजगार  कार्यक्रम भी लागू किए गए

• नवमी पंचवर्षीय योजना में बिहार सरकार ने स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना लागू किया।

• 11वीं  पंचवर्षीय योजना में प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

• 12वीं पंचवर्षीय योजना में युवाओं को स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर लोन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वर्ष 2015 में शुरुआत की गई।



शनिवार, 5 मार्च 2022

भारत की ऐतिहासिक लड़ाइयां कौन कौन सी है और किसके द्वारा और कब हुआ था?

 1. तराइन का प्रथम युद्ध  - पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को हराया 1191 ई • में।

2. तराइन का द्वितीय युद्ध - मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को हराया 1192 ई• में।

3. चंदवार का युद्ध - मुहम्मद गोरी ने जयचंद को हराया 1194 ई• में।

4. पानीपत की पहली लड़ाई - बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया 1526 ई में।

5. खानवा का युद्ध - बाबर ने राणा सांग को हराया 1527 ई में।

6.चंदेरी का युद्ध - बाबर ने मेदनी राय को हराया 1528 ई में।

7.घाघरा का युद्ध - बाबर ने अपह्गणों को हराया 1529 ई में।

8. चौसा का युद्ध - शेरशाह ने हुमायूं को हराया 1539 ई में।

9. कन्नौज का युद्ध - शेरशाह ने हुमायूँ को हराया 1540 ई में।

10. पानीपत की दूसरी लड़ाई - अकबर ने हेमू को हराया 1556 ई में।

11. तालिकोट का युद्ध - विजयनगर साम्राज्य का पतन 1565 ई में।

12.हल्दीघाटी का युद्ध - अकबर ने महाराणा प्रताप को  हराया 1576 ई में।

13. पलासी का युद्ध - अंग्रेजो ने सिराजुदौला को हराया 1757 ई में।

14. वाडीवास का युद्ध - फ्रांसीसी की पराजय 1760 ई में।

15.पानीपत की तीसरी लड़ाई - अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया 1761 ई में।

16. बक्सर का युद्ध - अंग्रेजों ने मीरकासिम को हराया 1765 ई में।

17.रुहेला का युद्ध - 1774 ई में।

18. खुर्दा का युद्ध - निजाम की पराजय 1795 ई में।

19.प्रथम स्वतंत्रता संग्राम - 1857 ई में।

21.प्रथम भारत चीन युद्ध - 1962 ई

22.प्रथम भारत पाकिस्तान युद्ध - 1965 ई में।

23. दूतीय भारत और पाकिस्तान युद्ध - 1971 ई में।

नोट : प्रथम विश्व युद्ध 1914 - 18 में एवं द्वितीय विश्व युद्ध युद्ध 1939 - 45 ई में हुआ।


शुक्रवार, 4 मार्च 2022

आइए आज हमलोग सौरमंडल के बारे में जानते है,सौरमंडल की प्रमुख बातें।

• सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक भारी ग्रह - वृहस्पति

• सबसे छोटी एवं सूर्य से सबसे निकट स्थित ग्रह - बुध
• पृथ्वी के सबसे निकट का ग्रह - शुक्र
• पृथ्वी और सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह - वरुण
• सौरमंडल का सर्वाधिक चमकीला एवं गर्म ग्रह - शुक्र
• सर्वाधिक ठंडा ग्रह - वरुण
• सबसे अधिक उपग्रह वाला ग्रह - वृहस्पति
• बिना उपग्रहों वाला ग्रह - बुध एवं शुक्र
• लाल ग्रह को नीला ग्रह - मंगल तथा पृथ्वी
• पीला ग्रह तथा हरा ग्रह - बृहस्पति तथा अरुण
• भोर तथा सांझ का तारा, पृथ्वी की बहन, जुड़वा ग्रह कहलता है। - शुक्र
• चंद्रमा पर दिन तथा रात का तापमान - 100°c तथा 180°c
• सूर्य का व्यास - 1392000 किमी•
• सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह - गेनीमेड ( बृहस्पति का उपग्रह)
• सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह - डिमोस (मंगल के उपग्रह)
• सनी का सबसे बड़ा उपग्रह - टाइटन
• वलय युक्त ग्रह - शनि
• सबसे कम समय में सूर्य के चक्कर लगाने वाला ग्रह - बुध (88 दिन)
• सबसे अधिक समय में सूर्य के चक्कर लगाने वाला ग्रह - वरुण
• पृथ्वी के विपरीत दिशा में चक्कर लगाने वाला ग्रह - शुक्र तथा अरुण
• सर्वाधिक चमकीला तारा - साइरस ( डॉग स्टार)
• सौर दिवस की अवधि - 24 घंटा
• सूर्य के केंद्र तथा सतह  का तापमान - 15M°C और6000°C
• सूर्य प्रकाश को पृथ्वी पर पहुंचने में लगा समय - 8 मिनट 20 सेकेंड
• चंद्रमा का प्रकाश को पृथ्वी पर पहुंचने में लगा समय - 1.3 सेकेंड
• सूर्य का प्रमुख संधाटक - हाइड्रोजन 74% और हीलियम 25%
• सूर्य की ऊर्जा का स्रोत - नाभिकीय संलयन
• पृथ्वी का भूमध्यरेखीय व्यास - 12756 किमी
• पृथ्वी का ध्रुव व्यास -12714किमी
• पृथ्वी का विषुवतीय व्यास ध्रुवी व्यास से ज्यादा है - 42किमी
• पृथ्वी का अपनी धुरी पर झुकाव - 23-1/2
• पृथ्वी का अक्ष पर घूर्णन - पश्चिम से पूरब
• सबसे बड़ा तारामंडल - सेंटारस
• आकाशगंगा की आकृति है - स्पाइरल
• सूर्य पृथ्वी से बड़ा है - 109 गुणा
• शुभी का सबसे चमकीला सतह - प्रकाश मंडल
• सूर्य का वह्यतम परत कहलाता है - किरीट (कोरोना)
• तारे का रंग सूचक है - उसके ताप का 
• सूर्य ग्रहण होता है जब - चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आती है
• क्षूद्र ग्रह स्थित है - मंगल एवं बृहस्पति के बीच
• ब्रह्मांड मैं विस्फोट तारा कहलाता है - अभिनव तारा
• अंतरिक्ष में तारामंडलों की संख्या है - 89
• चंद्र ग्रहण होता है जब - पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है
• किस ग्रह पर सूर्य पश्चिम में होता है - अरुण एवं शुक्र
• पृथ्वी तथा सूर्य के निकटतम तारा - सूर्य तथा प्रोकिस्मा
  सैंटोरी
• शनि सूर्य के चारों एक चक्कर लगाता है - 29.5वर्ष
• चंद्रमा द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा में लगा समय - 27.3 दिन

गुरुवार, 3 मार्च 2022

शाहजहां (1627- 1657 ई•) जीवन का परिचय क्या है?

• जहांगीर के बाद सिंहासन पर शाहजहां बैठा।

• जोधपुर के शासक मोटा राजा उदयसिंह के पुत्र जगत गोसाई के गर्भ से 5 जनवरी 1993 ईस्वी  को शाहजहां का जन्म लाहौर में हुआ था।

• 1612 ई• में खुर्रम (शाहजहां) का विवाह आसिफ खान की पुत्री अर्जुन बंद बानो बेगम से हुआ जिसे शाहजहां ने मालिका -ए - जमानी की उपाधि प्रदान की। 1931 ईस्वी में प्रसव पीड़ा के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

• 24 फरवरी 1628 ईस्वी को शाहजहां आगरे में अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरण ए सानी की उपाधि प्राप्त कर सिंहासन पर बैठा।

• शाहजहां ने आसिफ खां को वजीर पद प्रदान किया।

• इसने महावत ख़ां को खान खाना की उपाधि प्रदान की।

• शाहजहां ने नूरजहां को ₹200000 प्रति वर्ष की पेंशन देकर लाहौर जाने दिया, जहां 1645 ईसवी में उसकी मृत्यु हो गई।

• शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण आगरा में उसकी कब्र के ऊपर करवाया।

• ताजमहल का निर्माण करने वाला मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था।

• मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहा ने करवाया था इसका मुख्य कलाकार बे बादल खां था।

• शाहजहां के शासनकाल को स्थापित कला का स्वर्ण युग कहा जाता है। शाहजहां द्वारा बनवाई गई प्रमुख इमारतें हैं - दिल्ली का लाल किला ,दीवाने आम,दीवाने खास,दिल्ली जामा मस्जिद,आगरा मोती मस्जिद,ताजमहल आदि।

• शाहजहां ने 1638 ईस्वी में अपनी राजधानी की आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदी के दाहनी तट पर शाहजहानाबाद की नींव डाली।

• आगरा की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां की पुत्री जहांआरा नहीं करवाई।

• शाहजहां के दरबार के प्रमुख चित्रकार मोहम्मद फकीर एवं मीर हासिम थे।

• शाहजहां ने संगीत दे लाल खान को गुण समंदर की उपाधि दी थी।

• शाहजहां के पुत्रों में दराशिकोह को सर्वाधिक विद्वान था।इसने सर्र ए अकबर ( महान रहस्य) नाम से उपनिषदों का अनुवाद करवाया था ।

• शाहजहां ने दिल्ली में एक कॉलेज का निर्माण एवं दरुर्ल बांका नामक कॉलेज की मरम्मत करवाई।

• शाहजहां के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध 1657 ईस्वी में शुरू हुआ।

• 18 जनवरी 1658 ईस्वी को औरंगा जेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया।

• 25 अप्रैल 1658 इसी में धारा एवं औरंगजेब के बीच धर्मत का युद्ध हुआ इस युद्ध में धारा की पराजय हुई।

• शामगढ़ का युद्ध अर्जुन 1658 ईस्वी कौन धारा एवं औरंगजेब के बीच हुआ इस युद्ध में भी दारा की हार हुई।

• उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध देवराई की घाटी में 12 से 14 अप्रैल 1659 ई• को हुआ । इस युद्ध में धारा के पराजित होने पर उसे इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के अपराध में 30 अगस्त 1659 ईसवी को हत्या कर दी गई।

• शाह बुलंद इकबाल (king of lofty fortune ) के रूप में दारा शिकोह जाना जाता है। 

• आगरा के किले में अपने कैदी जीवन के 8 वर्ष अर्थात 31 जनवरी 1666 ई• को 74 वर्ष की अवस्था में शाहजहां की मृत्यु हो गई।

बुधवार, 2 मार्च 2022

बिहार में हुए बिहार पुलिस सुधार योजना के अंतर्गत कुछ संबंधित मुख्य बातें

• आधुनिक पुलिस नियंत्रण कक्ष - पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 24 * 7 आधार पर हेल्पलाइन सहित पुलिस नियंत्रण कक्ष कार्यरत किया गया है। इसमें और टेलीफोन स्थापित किए गए हैं जिनमें कंप्यूटर एवं अन्य उपस्कर भी शामिल है। इस नियंत्रण कक्ष में आम नागरिकों द्वारा दूरभाष के माध्यम से किसी भी प्रकार की शिकायत परिवाद दर्ज कराई जा सकती है। परिवाद शिकायत दर्ज होने के पश्चात उस व्यक्ति को एक नंबर भी आ जाता है तथा संबंधित परिवार शिकायत संबंधित थाना अध्यक्ष एवं पुलिस अध्यक्ष पुलिस उपाध्यक्ष को अविलंब त्वरित कार्यवाही हेतु भेजा जाता है। साथ ही उनसे कृत्य कार्रवाई की सूचना प्राप्त कर शिकायतकर्ता परिवादी को सूचित किया जाता है।

• थाना स्तर पर अनुसंधान तथा विधि व्यवस्था का पृथक्करण - पुलिस सुधार की कड़ी में थाना स्तर पर अनुसंधान एवं विधि व्यवस्था कार्य हेतु पता करें कार्यों का पृथक्करण किया गया है। इससे पुलिस व्यवस्था अधिकारी उन्मुख बनेगी तथा अनुसंधान के स्तर में सुधार आएगा साथी विधि व्यवस्था की समस्याओं से त्वरित रूप से निबटने में मदद मिलेगी। इसके तहत प्रथम चरण में पटना शहर के 23 थाना, तत्पश्चात अनुमंडल स्तर के 155 थाना एवं वर्तमान में राज्य के सभी थाना में इसे लागू किया गया है। इस व्यवस्था के लिए आवश्यक मानव संसाधन का आकलन पुलिस मुख्यालय स्तर पर किया जा सकत है तथा पदाधिकारियों के दोनों कंधों में पदस्थापन के मापदंड निर्धारित किए गए हैं।

• सुरक्षित शहर हेतु (CCTV) सीसीटीवी कैमरा तंत्र की अधिष्ठापन योजना - इसके तहत राज्य के मुख्य शहरों में नागरिकों को सुरक्षा का एहसास करने, विधि व्यवस्था एवं अपराध की समस्या से प्रभावित स्थानों पर नियंत्रण निगरानी रखने तथा Response time को कम करने हेतु प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा प्रणाली का अधिष्ठापन पर किया जाएगा, जिसे नियंत्रण कक्ष एवं प्रतिक्रिया तंत्र के साथ एकीकृत किया जा रहा है इसका नियंत्रण जिला पुलिस अध्यक्ष कार्यालय में रहेगा।

• बिहार पुलिस अवर सेवा चयन आयोग का गठन - मैं पुलिस अवर निरीक्षक एवं अन्य भर्ती धारी विभागों में समक्ष पदों पर चयन का कार्य पूर्व से बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा किया जा रहा है। बस में लगने के कारण समय पर नियुक्ति नहीं हो पाती थी। किस समस्या से निपटने हेतु बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग अधिनियम 2016 के तहत गिरी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण आदेश बिहार पुलिस अवर सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के पदों का सृजन किया जा चुका है। इससे अवर निरीक्षक सर्वांग क नियुक्ति में गति आएगी।

• पुलिस थाना में महिला शौचालय स्नानागार की व्यवस्था - राज्य सरकार के द्वारा सरकारी सेवाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए 35% आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसी कड़ी में पुलिस में भी यह व्यवस्था लागू की गई है। महिला पुलिस कर्मी की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा 40 पुलिस सेवा में उपस्थित 559 थानों में महिला पुलिस कर्मियों एवं थाना में आने वाली महिला आगंतुकों के लिए 02 आदत शौचालय वह स्नानागार 41 महिला शौचालय एवं 69 पांच सीटें महिला शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। कीर्यानवन को विकेंद्रीकृत करते हुए बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के नियंत्रण में संबंधित थानाध्यक्ष को पूर्व अनुमोदित नक्से एवं प्रकलित राशि उपलब्ध कराकर कीर्यानिवत किया गया है।

• पुलिस अधिकारियों के लिए स्थानांतरण नीति का निर्धारण कर आदेश निर्गत कर दिया गया है।

• पुलिस अध्यक्ष के कार्य एवं मूल्यांकन संकेत को की पहचान के साथ-साथ अनुसंधान पदाधिकारी विधि व्यवस्था पदाधिकारी निरीक्षकों एवं पुलिस उपाधीक्षक ओं का कार्य निष्पादन संकेतक ओं का सिस्टम निर्धारण पालीवाल किया गया है एवं तंत्र संबंधी आदेश निर्गत किया गया है।

• बिहार मंदिर  चहारदीवारी निर्माण योजना - प्रारंभ किस वर्ष किया गया है इस योजना के तहत राज्य के निवासियों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में रख ऐतिहासिक महत्व, बहुलुल्य मूर्तियां, मुकुट, आभूषण यादी की रक्षा हेतु मंदिरों की पक्की मजबूत चहारदीवारी का निर्माण कराया जाना है। इसके अंतर्गत बिहार धार्मिक न्यास परिषद में निबंधित कम से कम 60 वर्ष पहले निर्मित मंदिर केवम वह मंदिर जिसमें बिहार पर्यटन की संभावना बढ़ती है तथा जहां विधि व्यवस्थ एवं सुरक्षा का प्रश्न उत्पन्न होता है उनकी सुरक्षा के लिए चहारदीवारी का निर्माण किया जाना है।

• थाना में सी.सी.टी. वी. तंत्र का अधिष्ठापन - राज्य के सभी थाना निगम हाजत मैं सीसीटीवी कैमरे लगाने हेतु ₹242.26 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई है, जिसमें हिरासत के लिए गए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत में कमी आएगी तथा आम नागरिकों का मानव अधिकार एवं आत्मसम्मान का संरक्षण सुरक्षित होगा।

• आर्थिक अपराध इकाई में साइबर क्षमता  - देश मैं साइबर अपराध के बढ़ते चलन को देखते हुए राज्य की आर्थिक अपराध इकाई को इस दिशा में सदस्य एवं संबंधित करने के उद्देश्य से मुख्यालय एवं जिला स्तर पर साइबरक्राइम एंड सोशल मीडिया लैब का गठन किया जा रहा है क्योंकि इस अपराध में प्राप्त सूचना पर तत्काल विशेषता शंकर कवाई की आवश्यकता होती है।  देरी होने पर न सिर्फ सूत्र समाप्त हो जाता है बल्कि साक्ष्य भी नष्ट हो जाता है







मंगलवार, 1 मार्च 2022

क्या आप क्रिकेट खेल को पसन्द करते हैं? तो उससे समंधित जानकारी जान लीजिए , क्रिकेट खेल की प्रमुख बातें।

• क्रिकेट खेल का जन्मदाता इंग्लैंड को माना जाता है। दुनिया का पहला क्रिकेट हैमबल्डन में 1760 के दशक में बना और मेरीलिवॉन क्रिकेट क्लब की स्थापना 1787 में हुई।

• क्रिकेट का पहला टेस्ट मैच 887 में ऑस्ट्रेलिया एवं इंग्लैंड के बीच मेलबर्न में आयोजित किया गया । क्रिकेट का पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच इंग्लैंड एवं ऑस्ट्रेलिया के बीच 1971 में मेलबर्न में आयोजित  किया गया था।

• क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आई• सी• सी•) है; जिसका मुख्यालय एक अगस्त 2005 से दुबई में है पहले यह लॉर्ड्स (इंग्लैंड) में था।

परिमाप 

पिच की लंबाई - 22 गज,गेंद का भार - 155 से 168ग्राम,बल्ले की लंबाई - 96.6 सेमी• ,बल्ले की चौड़ाई - 22.9 सेमी•, स्टांप की लंबाई - लगभग 72 सेमी•

 • क्रिकेट शब्दबली - चाइनामैन, बैट्समैन, बॉलर , विकेटकीपर, फिल्डर, एलबीडब्ल्यू, कैच, हिट विकेट , थ्रो,मेडन,चौका,छक्का, वाइट, स्विग, स्ट्रोक, कवर, मीड ऑन, मिड विकेट , ओवर द विकेट , राइंड द विकेट, लेग स्पिनर,ऑफ स्पिनर, ओवर थ्रो, ओवर, सिल्प,गली,कवर पॉइंट, सिली प्वाइंट, लांग ऑफ, लॉन्ग ऑन, थर्ड मैन, शॉर्ट पिच ,हुक, डेड बॉल,रन आऊट ,पॉपिंग क्रीज आदि।

• 2011 का विश्व कप क्रिकेट भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं बांग्लादेश में प्रस्तावित था।

• विश्व कप क्रिकेट 2011 का फाइनल मैच मुंबई में खेला गया था।

• विश्व कप 2015 का आयोजन ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड में तथा विश्व कप 2019 का आयोजन इंग्लैंड में किया गया था।







सोमवार, 28 फ़रवरी 2022

कंप्यूटर से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य जान लीजिए

• कंप्यूटर का हिंदी नाम संगणक है।

• चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का पितामह का जाता है।

• वॉन न्यूमेन का कंप्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान है ।

• आधुनिक कंप्यूटर की खोज सर्वप्रथम 1946 ईस्वी में हुई।

• कंप्यूटर के क्षेत्र में महान क्रांति 1960 से आई।

• विश्व में सर्वाधिक कंप्यूटरों वाला देश संयुक्त राज्य अमेरिका है इसके पश्चात क्रमशः जापान, जर्मनी, ब्रिटेन एवं फ्रांस का स्थान आता है भारत का इस सूची में 19वां स्थान है।

• कंप्यूटर साक्षरता का अर्थ है कंप्यूटर क्या कर सकता है और क्या नहीं इस बात की जानकारी होना।

• 2 दिसंबर कंप्यूटर साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

• भारत में नई कंप्यूटर नीति की घोषणा 1984 नवंबर में की गई थी।

• भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर सिद्धार्थ है इसका निर्माण इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने किया था।

• भारत में प्रथम कंप्यूटर 16 अगस्त 1986 को बेंगलुरु के प्रधान डाकघर में लगाया गया था।

• भारत का प्रथम कंप्यूटरीकृत डाकघर नई दिल्ली का है।

• भारत का प्रथम प्रदूषण रहित  कंप्यूटरीकृत पेट्रोल पंप मुंबई में है।

• निजी क्षेत्र के अंतर्गत स्थापित होने वाला भारत का प्रथम कंप्यूटर विश्वविद्यालय राजीव गांधी कंप्यूटर विश्वविद्यालय है।

• भारत में प्रथम कंप्यूटर आरक्षण पद्धति नई दिल्ली में लागू की गई थी।

• भारत की सिलिकॉन घाटी बेंगलुरु में स्थित है।

• भारतीय जनता पार्टी भारत की पहली पार्टी ऐसी पार्टी है जिसने इंटरनेट पर अपना वेबसाइट बनाया है।

• कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं - डिजिटल,एनालॉग ,हाइब्रिड 

• वह कंप्यूटर जो गणितीय की गणन करता है, डिजिटल कंप्यूटर का लाता है।

• इंटीग्रेटेड सर्किट चिप का  विकास जे• एस• किल्बी ने किया।

• चुंबकीय  डिक्स पर आयरन ऑक्साइड की परत होती है।

• टीम बनर्स ली www(वर्ल्ड वाइड वेब World wide web) के अविष्कारक तथा प्रवर्तक है।

• असेंबलर असेंबली भाषा को यंत्र भाषा में परिवर्तित करता है।

• कंप्यूटर के स्मृति सामान्य तौर से किलोबाइट अथवा मेगाबाइट के रूप में व्यक्त की जाती है एक वाइट आठ दूधाधारी अंको का बना होता है।

• अनुपम भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित सुपर कंप्यूटर है।

• T - 3A विश्व का सबसे तेज कंप्यूटर है।

• कंप्यूटर डाटा की सबसे छोटी इकाई बीट है बायनरी इकाई के आरंभिक एवं अंतिम अक्षरों से बने संक्षिप्त शब्द 0 से 1 को बीट कहा जाता है।

• एक सुपर कंप्यूटर में करीब 40,000 माइक्रोकंप्यूटर जितनी परिकलन क्षमता होती है इसकी गति को मेगाफ्लॉप से मापा जाता है।

• सामान्य कंप्यूटर की अपेक्षा 10 गुना तेज कार्य करने वाले बड़े कंप्यूटर को सुपर कंप्यूटर कहते हैं।

• सूक्ष्मतम आकार के कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर कहते हैं।

• मध्यम आकार के कंप्यूटर को मिनी कंप्यूटर कहते हैं।

• एनालॉग एवं डिजिटल के संयुक्त स्वरूप को हाइब्रिड कंप्यूटर कहते हैं।

• वह कंप्यूटर जो आंकलन के सिद्धांत के अनुसार कार्य करता है एनालॉग कंप्यूटर कहलाता है।

• माइक्रोप्रोसेसर को पेंटियम ( pentium) ब्रांड के नाम से बाजार में बेचा जाता है एंटेल का अधुनातन माइक्रोप्रोसेसर है।

• विश्व का प्रथम सुपर कंप्यूटर क्रे• के• 1 - एस था , जो 1979 में बनकर तैयार हुआ था इसे अमेरिका के क्रे• रिसर्च कंपनी ने बनाया था।

• 32 कंप्यूटर के बराबर कार्य कर सकने वाला डब्ल्यू कंप्यूटर के 1 सेकंड में शतरंज की 20 करोड़ चल सोच  सकता है इसी सुपरकंप्यूटर ने विश्व चैंपियन गैरी कासपरोव को पराजित किया था।

• विश्व के प्रथम इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर का नाम एनियक है।

•  विश्व का सबसे बड़ा कंप्यूटर नेटवर्क का नाम इंटरनेट है। याहू,गूगल एवं MSN इंटरनेट सर्च इंजन है।

• इंटरनेट पर उपलब्ध होने वाली प्रथम भारतीय समाचार पत्र द हिंदू है।

• इंटरनेट सूचना की खोज करने में आर्क सबसे ज्यादा मदद करता है।

• कंप्यूटर की 5 पीढ़ियां विकसित की गई है।

• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में निर्वात ट्यूब प्रयुक्त होता है।

• आधुनिक कंप्यूटर में सेमीकंडक्टर मेमोरी का कार्य करती है।

• कंप्यूटर बोर्ड में कुल 8 संयोजक है।

• एक किलोबाइट (KB) 1024 बाइट के चोली होता है।

• 1MB ( मेगावाइट) 1024 KB बराबर होता है।

1 GB ( गीगाबाइट ) 1024 MB के बराबर है।




शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

भारत के मुख्य उद्योग कौन कौन सी है ,और कहां है,कब स्थापित हुआ था?

1.लौह - इस्पात उद्योग 

•देश में पहली लौह इस्पात कारखाना 1874 ईसवी में कुल्टी(पश्चिम बंगाल) नामक पर  बराकर लौह कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था।

•देश में सबसे पहला बड़े पैमाने का कारखाना 1960 ईस्वी में तत्कालीन बिहार राज्य में स्वर्ण रेखा नदी की घाटी में साकाजी नामक स्थान पर जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित किया गया था।

•स्वतंत्रता के पूर्व स्थापित लौह इस्पात कारखाना

१ भारतीय लौह इस्पात कंपनी - इसकी स्थापना 1960 ईस्वी में पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी घाटी में हीरापुर नामक स्थान पर की गई थी ।




गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

नोबेल पुरस्कार क्या है? किसने स्थापना किया और कब हुआ था।

नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबल ने 1921 में की थी । अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का जन्म 1835 ईस्वी में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था। 9 वर्ष की उम्र में वह अपने परिवार के साथ रूस चले गए। अल्फ्रेड नोबेल एक अविवाहित स्वीडिश वैज्ञानिक और केमिकल इंजीनियर थे जिसने 1866 ईसवी में डायनामाइट की खोज की थी। स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला जब उन्होंने उनकी वसीयत पड़ी जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी। अपनी वसीयत में उन्होंने आदेश दिया था कि सबसे योग्य व्यक्ति चाहे वह स्केडिनेवियने  हो या ना हो पुरस्कार प्राप्त करेगा। उनके द्वारा छोड़े गए धन पर मिलने वाला ब्याज उन व्यक्तियों के बीच वार्षिक रूप से बांटा जाता है जिन्होंने विज्ञान, साहित्य ,शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। विश्व के 58960000 अमेरिका डॉलर के सबसे अधिक गौरवशाली पुरस्कार को नोबेल फाउंडेशन द्वारा मदद प्रदान की जाती है।

नोट : पहले नोबेल पुरस्कार पांच विषयों में कार्य के लिए दिए जाते थे। अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरीजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में 1967 में आरंभ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया इस अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है।

 > पुरस्कार के लिए बनी समिति और चयनकर्ता प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा करते हैं लेकिन पुरस्कारों का वितरण अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर को किया जाता है।

 > प्रत्येक पुरस्कार में 1 वर्ष में अधिकतम 3 लोगों को पुरस्कार दिया जाता है इनमें से प्रत्येक विजेता को एक स्वर्ण पदक, डिप्लोमा ,स्वीडिश नागरिकता में एक्सटेंशन और धन दिया जाता है।

 > अगर एक पुरस्कार में दो विजेता है तो धनराशि दोनों में समान रूप से बांट दिए जाती है पुरस्कार प्राप्तकर्ता ओं की संख्या अगर तीन है तो  चयन समिति के पास यह अधिकार होता है कि वह धनराशि को तीनों में बराबर बांट दें या एक को आधा दे दे और बाकी  दो को बचा धन बराबर बांट दें।

अब तक केवल दो बार मृत व्यक्तियों को यह पुरस्कार दिया गया है पहली बार एरी एक्सेल कार्लेफाल्डट को1931 ईस्वी में और दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव डेग हैमरसोल्ड को 1961 में।

 > 1974 में नियम बना दिया गया की मरणोपरांत किसी को नोबेल पुरुस्कार नही दिया जाएगा।

> अब तक चार लोग ही दो बार नोबेल पुरुस्कार जीत पाए है ,वे हैं - मैडन क्यूरी , लिनस पॉलिश , जॉन बरडीन,फ्रेडरिक सेंगर 

>इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास को शांति को नोबेल पुरुस्कार 3 बार दिया गया है - वर्ष 1917,1944, एवं 1963 में ।

 > सर विलियम हेनरी ब्रेग में अपने बेटे के लिए एल ब्रैग के साथ भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 1980 में प्राप्त किया।

 > सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति लॉरेंस (ब्रैग 25) वर्ष में थे।

 > सबसे अधिक वर्ष में नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले व्यक्ति रेमंड डेविस जूनियर (88वर्ष ) थे।


मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

बिहार में रेलमार्ग का मुख्य बातें आपको जान लेनी चाहिए।

•बिहार में रेल परिवहन आरंभ 1860 ई• में हुआ , जब  1860-62 के बीच गंगा के किनारे कोलकाता तक पहली रेल लाइन बिछाई गई ।

•बिहार की रेल दो रेल जोन में पड़ते हैं पूर्व मध्य रेलवे (हाजीपुर) उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे मालीगांव हैं।

•वर्तमान में बिहार में रेल मार्ग की कुल लंबाई लगभग 5400 किलोमीटर है जो देश के कुल रेलवे मार्ग का लगभग 8.5% है। राज्य में रेलवे का घनत्व 3.15 है।

•पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय हाजीपुर में है।

• नई दिल्ली से दरभंगा तक सत्याग्रह एक्सप्रेस को वर्ष 2000 ई• में चलाया गया ।

बिहार में 4 मंडल मुख्यालय है। यह है1. समस्तीपुर 2. दानापुर 3.सोनापुर तथा 4.कटिहार