शुक्रवार, 6 मई 2022

जय प्रकाश नारायण जी का जीवन परिचय

 जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 ईस्वी में हुआ था इनका जन्म सिताब दियारा गांव (उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिले में फैला) इनका बचपन का नाम बाउल था बड़े होने पर जेपी नाम से प्रसिद्ध अपनी जनपक्षरधरता के लिए लोक नायक के रूप में प्रसिद्ध हुए। जयप्रकाश नारायण विश्व सदी में भारत के एक प्रमुख समाजवादी, विचारक ,क्रांतिदर्शी नेता , समर्पित समाज कर्मी तथा विद्रोही स्वाधीनता सेनानी थे। उनका अध्ययन विशाल और राजनीतिक संगठन कर्म और लोक सेवा का अनुभव व्यापक और गहन था। भारतीय जनता में उनकी अस्थाई विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा थी निष्ठा और अध्ययन व्यवसाय से परिपूर्ण अपने सक्रिय, रचनात्मक, सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रतिष्ठा कमाई। वे अपने समय में विश्व के कुछ चुने हुए लोकतांत्रिक नेताओं में से एक थे।

   

• जन्म - 11 अक्बर 1902 ई•

• निधन : 8 अक्टूबर 1979 ई•

• जन्म स्थान :सिताब दियारा गांव ( उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिला में)

• पुकार का नाम : बचपन में बाउल ।बड़े होने पर जेपी नाम से प्रसिद्ध अपनी जनपक्षधरता के लिए लोकनायक के रूप में प्रसिद्ध।

• माता - पिता : फुलरानी एवं हरसुदयाल

• पत्नी : प्रभावती देवी ( प्रसिद्ध गांधीवादी वज्र किशोर प्रसाद की पुत्री

• शिक्षा : आरंभिक शिक्षा घर पर ही ,फिर पटना कॉलेजिएट, पटना में दाखिल हुए , यहीं बिहार में हिंदी की वर्तमान स्थिति विषय पर लेख के लिए सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त किया। इसके बाद पटना कॉलेज पटना में प्रवेश किया फिर असहयोग आंदोलन के दौरान शिक्षा अधूरी छोड़ी । 1992 में शिक्षा प्राप्ति के लिए अमेरिका गए। वहां कैलिफ़ोर्निया, बर्कले , विसिकंसन मैडिसन आदि कई इस विद्यालयों में अध्ययन। मार्क्सवाद और समाजवाद की शिक्षा यही ग्रहण की। मां की अस्वस्थता के कारण पीएच• डी• न कर सके और देश लौट आए।
राजनीतिक जीवन : 1929 में कांग्रेस में शामिल ,1932 में सविनय अवज्ञ आंदोलन के दौरान जेल गए। फिर उन्होंने जेल से बाहर निकलकर कांग्रेस के अंदर ही कांग्रेस सोशलिटी पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई। 1939 और 1943 में भी जेल गए, 1942 के आंदोलन से विशेष प्रसिद्धि मिली फिर उन्होंने आजादी के बाद 1952 में प्रजा सोशलिटी पार्टी के गठन में योगदान दिया फिर धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से स्वयं को अलग कर दिया फिर 1954 में विनोब भावे के सर्वोदय आंदोलन में जुडे।1974 में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और आपातकाल के दौरान जेल गए। फिर इनके मार्गदर्शन में ही जनता पार्टी का गठन हुआ।
• कृतियां : जयप्रकाश नारायण जी ने बहुत सी कवि ताएं भी लिखी और डायरी एवं निबंध भी प्रकाशित किया। रिकंसट्रकशन ऑफ इंडियन  पॉलिटि।
• सम्मान : 1965 में समाज सेवा के लिए मैग्सेसे सम्मान।1998 में भारत रत्न ( निधन होने के बाद)

बुधवार, 4 मई 2022

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन परिचय (2022) rashtrapita Mahatma Gandhi ka jivan parichay

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईसवी में प्रबंधन गुजरात में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद्र गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उसके आसपास हुई। 4 दिसंबर 1888 ईसवी में हुए वकालत की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन यूनिवर्सिटी लंदन गए। 1883 ईस्वी में कम उम्र में ही उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ जो स्वाधीनता संग्राम में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चली। गांधीज के जीवन में दक्षिण अफ्रीका(1893- 1914 ई•) के प्रवास का ऐतिहासिक महत्व है। वहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का पहला प्रयोग। 1915 ईस्वी में गांधी जी भारत लौट आए और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्होंने सत्य के प्रयोग किए। अहिंसा और सत्याग्रह उनका सबसे बड़ा हथियार था। उन्होंने स्वराज्य की मांग की,अछूतो का काम किया, सर्वोदय का कार्यक्रम चलाया, स्वदेशी का नारा दिया, समाज में व्याप्त ऊंच नीच जाति धर्म के भेदभाव को मिटाने की कोशिश की और अंततः अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाई।


                    गांधीजी को रवींद्रनाथ ठाकुर ने महात्मा कहा । उन्हें बापू राष्ट्रपिता कहकर राष्ट्र याद करता है। गांधीजी ने हिंद स्वराज, सत्य के साथ मेरे प्रयोग आदि पुस्तके लिखीं।उन्होंने हरिजन यंग इंडिया आदि पत्रिका भी संपादित की। उनका पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित था। उन्होंने शिक्षा संस्कृति राजनीति तथा सामाजिक एवं आर्थिक पक्षों पर खूब लिखा और उनके प्रयोग के द्वारा भारतवर्ष को फिर से एक उन्नत एवं गौरवशाली राष्ट्र बनाने की कोशिश की। 30 जनवरी 1948 ईस्वी में नई दिल्ली में एक सिरफिरे ने उनकी हत्या कर दी जिनका नाम था नाथू राम गोडसे। गांधी जी की स्मृति में पूरा राष्ट्रीय 2 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके जन्मदिवस को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षा और संस्कृति जैसे विषय पर यहां हरिजन यंग इंडिया जैसे ऐतिहासिक पत्रों के अग्रलेखओं से संकलित संपादित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार प्रस्तुत है। इस पाठ में उनके क्रांतिकारी शिक्षा दर्शन के अनुरूप वास्तविक जीवन में उपयोग व्यवहारिक दृष्टिकोण और विचार है जिनके बल पर आत्मा बुद्धि मानस एवं शरीर के संतुलित परिष्कार के साथ मनुष्य के नैतिक विकास के लिए जरूरी प्रेरणाएं हैं। गांधी जी की शिक्षा और संस्कृति की परिकल्पना निजी सैद्धांतिक नहीं है। वह जटिल और पुस्तकें भी नहीं है बल्कि हमारे साधारण दैनिक जीवन विहार से गहरे अर्थों में जुड़ी हुई है।

मंगलवार, 3 मई 2022

अमर भगत सिंह परिचय व अनमोल वचन Amar Bhagat Singh parichay v Anmol vachan

  - कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ अपने परिवार और देश के लिए कार्य करते हैं वही महान कहलाता है ऐसे व्यक्तियों का पूरा जीवन प्रेरणादायक होता है इन्हें शाहिद होने के बाद भी लोग दिल से याद करते हैं ऐसी ही एक महान हस्ती का नाम है अमर भगत सिंह जो अपने 23 वर्ष की उम्र में देश के प्रति शहीद हो गए अमर शहीद भगत सिंह ने अपने देश के लिए अभूतपूर्व कार्य किए।


नाम - भगत सिंह
जन्म - 28 सितंबर 1907
जन्म स्थान - बंगा चक्क, न• 105 ,गुरैरा ब्रांच,वर्तमान                           लायलपुर( पाकिस्तान)
माता - पिता - विद्यावती एवं सरदार किशन सिंह

मृत्यु - 23 मार्च 1931 (शाम 7:33 मिनट पर लाहौर षड्यंत्र केस में फांसी)

पैतृक गांव - खटकड़कलां ,पंजाब 

परिवार - संपूर्ण परिवार स्वाधीनता सेनानी पिता और चाचा अजीत सिंह लाला लाजपत राय के सहयोगी अजीत सिंह को मांडले जेल में देश निकाला दिया था। बाद में विदेशों में जाकर मुक्ति संग्राम का संचालन करने लगे। छोटे चाचा सरदार स्वर्ण सिंह भी जेल गए और जेल की यातनाओं के कारण 1910 में उनका निधन हुआ। भगत सिंह की शहादत के बाद उनके भाई कुलबीर सिंह और करतार सिंह को देवली के जेल में रखा गया था जहां वह 1946 तक रहे पिता अनेक बार जेल गए।

शिक्षा - पहले 4 साल की प्राइमरी शिक्षा अपने गांव बंगा में। फिर लाहौर के डी•ए•वी• स्कूल से वर्ग 9 तक की पढ़ाई की। बाद में नेशनल कॉलेज लाहौर से एफ• ए• किया बी•ए• के दौरान पढ़ाई छोड़ दी और क्रांतिकारी दल में शामिल हो गए।

भगत सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा -  बचपन में करतार सिंह सराभा और 1914 के गदर पार्टी के आंदोलन के प्रति तीव्र आकर्षण। सराभा की निर्भीक कुर्बानी का मन पर स्थाई और गहरा असर। 16 नवंबर 1915 को सराभा की फांसी के समय भगत सिंह की उम्र 8 वर्ष थी। वे सराभा का चित्र अपनी जेब  में ही रखते थे।

भगत सिंह की गतिविधियां - 12 वर्ष की उम्र में जलियांवाला बाग की मिट्टी लेकर क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत। 1922 में चोरा चोरी कांड के बाद 15 वर्ष की उम्र में कांग्रेस और महात्मा गांधी से मोहभंग। 1923 में पढ़ाई और घर छोड़कर कानपुर गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र प्रताप में सेवाएं दी। 1926 में अपने नेतृत्व में पंजाब में नौजवान भारत सभा का गठन किया जिसकी शाखाएं विभिन्न शहरों में स्थापित की गई। 1928 से 31 तक चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ का गठन किया और क्रांतिकारी आंदोलन सघन रूप से छेड़ दिया। 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ केंद्रीय असेंबली में बम फेंका और गिरफ्तार हुए।

भगत सिंह की पहली गिरफतारी - अक्टूबर 1926 में दशहरा मेले में हुए बम विस्फोट के कारण मई 1927 में हुई गिरफ्तारी भगत सिंह की।

 भगत सिंह की कृतियां - पंजाब की भाषा तथा लिपि की समस्या ( हिंदी में 1924) विश्व प्रेम ( कोलकाता के मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) युवक (मतवाला में 1924 में प्रकाशित हिंदी लेख) मैं नास्तिक क्यों हूं (1930-31) अछूत समस्या, विद्यार्थी और राजनीति, सत्याग्रह और हड़ताल, बम का दर्शन , भारतीय क्रांति का 810 आदि अनेक लेख, पिपलिया एवं पत्र जो अलग-अलग प्रकाश को द्वारा भगतसिंह के दस्तावेज के रूप में प्रकाशित। सचिंद्र नाथ सान्याल की पुस्तक बंदी जीवन और डाउन विभिन्न की आत्मकथा का अनुवाद। जेल डायरी भी लिखी और निम्नांकित 4 पुस्तकें भगत सिंह के द्वारा लिखी बताई जाती है जो अप्रिय है समाजवाद का आदर्श, आत्मकथा, भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास और मौत के दस्तावेज पर।

 अमर शहीद भगत सिंह आधुनिक भारतीय इतिहास की एक पवित्र स्मृति है। भारत राष्ट्र के लोकमान्य में उनकी युवा सभी अमित होकर बस गई है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले हजारों लोगों तथा लाखों स्वाधीनता सेनानियों की प्रेरणा और उत्सव पूर्ण कार्यों के लिए स्थाई प्रतीक और प्रतिनिधित्व है। उनके कार्यों और उनके बलिदान के जनता के हृदय में सदा संगति रहने वाली राष्ट्रीयता की ज्योति  चेतना का निर्माण किया है। राष्ट्रीयता देश भक्ति क्रांति और युवा शक्ति के हुए प्रेरणा पुंज प्रतीक है। यह अमर पद उन्होंने लगभग 23 वर्षों में ही हासिल कर लिया था।
  

   अमर भगत सिंह ने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर - मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था। 

                              स्वाधीनता सेनानियों के परिवार में जन्म पाकर उन्होंने बचपन में ही देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने का अविस्मरणीय पाठ पढ़ लिया था। उनके भीतर इच्छा संकल्प विचार और कर्म की सुदृढ़, अजेय और आमोद शक्ति की स्वतंत्रता के लिए अप राज्य संघर्ष तथा सामाजिक समानता न्याय और सब की खुशहाली पर टिकी समाज व्यवस्था के लिए क्रांति के स्वप्न के रूप में उन्हें ऐसा कुछ प्राप्त हो गया था इसके आगे मिर्ची बहुत छोटी और तुच्छ पड़ गई। नश्वर जीवन के इस महिमा में मूल्य बोध के चलते ही उन्होंने हंसते हंसते फांसी का फंदा अपने गले लगा लिया और झूल गए। सचमुच वे उस पथ पर बढ जिसके आगे राह नहीं थी।
 

  भगत सिंह को लाहौर में छात्र जीवन में अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ट जागरूक युवकों से दोस्ती हो गया था - 

         भगत सिंह का विकास आरंभ से ही उद्देश्य के प्रति समर्पित एक प्रबुद्ध नौजवान के रूप में हुआ। लाहौर में छात्र जीवन में ही उनका संग साथ अपने ही जैसे लक्ष्यनिष्ठा जागरूक युवकों से हो गया था। इनमें अनेक आगे चलकर उनके साथ ही क्रांतिकारी बने। एक जागरूक छात्र के रूप में उनकी दृष्टि देश दुनिया की हलचल और गतिविधियों पर हमेशा बनी रही। अपनी रुचि की पुस्तकें जिनमें साहित्य,  राजनीति, दर्शन ,इतिहास आदि विषयों की पुस्तकें हुआ करती थी उन्होंने खूब पढ़ी थी और उनसे प्राप्त ज्ञान के प्रकाश में अपने देश समाज आदि के बारे में सोच विचार करते रहते थे। उनकी मानसिक जागरूकता सोच विचार और प्रभुता वह कारण थी कि घर छोड़ने के बाद कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी के पास चले गए आए और वहां उनके पत्र प्रताप को अपनी सेवाएं दी। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार लेख लिखें और उनमें से अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाएं। एक चिंतक विचारक के रूप में समाजवाद और मार्क्स एंगल्स की विचारधारा से लगातार प्रभावित और अनूप प्रमाणित होते रहे। क्रांति और समाज व्यवस्था को लेकर उनकी सोच इन विचारों से प्रभावित थी। राजनीतिक चिंतन और विचार के धरातल पर वे अपने समकालीनओं से प्राय आगे दिखाई पड़ते हैं।

शनिवार, 30 अप्रैल 2022

सुशांत सिंह राजपूत का जीवन परिचय


                         परिचय

 अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 1 जनवरी 1986 में पटना,बिहार में हुआ था। बॉलीवुड के चहेते और बेहतरीन कलाकारों में से एक थे, सुशांत ने अपने मेहनत और काबिलियत के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाये थे। अभिनेता होने के साथ ही वह एक लाजवाब डांसर भी है 31 वर्ष के सुशांत का जन्म बिहार के पटना में हुआ है उनके पिता का नाम के• के• सिंह है जो कि एक सरकारी अफसर रह चुके हैं और उनकी माता का नाम किसी को भी नहीं पता है लेकिन 2002 में उनकी मृत्यु हो गई थी सुशांत की चार बहने हैं जिनमें से उनकी बड़ी बहन मीतू सिंह राज्य स्तर की क्रिकेटर खिलाड़ी है सुशांत के स्कूल की पढ़ाई पटना के सेंट केरेंस हाई स्कूल से हुई है जिसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनील इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में ही छोड़कर अदाकारी की तरह बढ़ गए।

(सुशांत सिंह राजपूत)

                             फिल्मी करियर 

हमसे ना सुशांत के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो उनका सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान डांस में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई जिसके बाद उन्होंने डांस सीखने का फैसला किया जब जिनमें उनका परिवार उनके खिलाफ था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और श्यामक देवरी के डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए श्यामक उनकी कला और लगन से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में डांस करने का मौका दिया मुंबई आने के बाद उन्होंने एक डांस ग्रुप के साथ भी परफॉर्म किया जिसको महसूस कोरियोग्राफर एश्ले लोबो ने विकसित किया था इसके बाद वह थिएटर का भी हिस्सा रहे और शायद यही कारण है कि वह एक सफल अभिनेता बनकर सामने आए सुशांत ने माशूर एक्शन डायरेक्टर पालन अमीन से मार्शल आर्ट भी सीखा है उन्हें टीवी में उनका पहला ब्रेक स्टार प्लस के शो किस देश में है मेरा दिल से मिला जिसके बाद उन्होंने मशहूर टीवी सीरियल पवित्र रिश्ता में मानव का किरदार निभाया और सबके चहेते बन गए। वह जरा नच के दिखा 2 और झलक दिखला जा 4 जैसे बड़े डांसिंग शो के भी प्रतिभागी रहे हैं और झलक दिखलाजा 4:00 के दौरान उन्हें मोस्ट कंसिस्टेंट  परफॉर्मर का टाइटल भी मिल चुका है। एक समय था जब उनके साथ अभिनेत्रियों काम तक नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक साधारण परिवार से थे और उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। फिल्म शुद्ध देसी रोमांस इसका उदाहरण है काफी समय बाद फिल्म के लिए परिणीति चोपड़ा ने साइन किया था।

                             निजी जिंदगी

सुशांत की निजी जिंदगी की बात करें तो वह सीरियल पवित्र रिश्ता में रह चुके है अपने सह कलाकार अंकिता लोखंडे के साथ संबंध में थे सुशांत अपने मां के बेहद करीब थे और उनकी मौत के बाद सुशांत का पूरा परिवार दिल्ली आ गया अपनी पहली ही फिल्म से सबकी नजर में अपनी जगह बनाने वाले सुशांत का भी जीवन आसान नहीं रहा था मां-बाप की इच्छा के बिना उन्होंने फिल्मों में अपना  करियर चुना और आज इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्थापित किया था।

        ( मृत्यु तिथि -14 जून 2020 मुंबई बांद्रा )

• प्रसिद्ध फिल्में - 

1.  काय पो चे 

2. शुद्व देशी रोमांस 

3. एम एस धोनी 

4. पीके और केदारनाथ 

5. छिछोरे 

आपको बता दे सुशांत आखिरी फिल्म दिल बेचारा है जिससे उनके साथ संजना सांधी नजर आई है। यह फिल्म 24 जुलाई 2020 को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी।



गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है?

किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की चाल बदल जाती है। जब दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत अधिक होती है तो प्रकाश की किरण आपतन बिंदु पर अभिलंब प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है? से दूर हटती है किंतु जब प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत कम होती है तब किरण अभिलंब की और मुड़ती है अर्थात अपेक्षाकृत विरल माध्यम में किरण अभिलंब से दूर हटती है जबकि अपेक्षाकृत सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते है?

 जब प्रकाश की किरण किसी एक समागी  पारदर्शी  माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है, तो इन दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर किरण अपने पूर्व पथ से मुड़ जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन क्यों कहा जाता है?

 पाकिस्तान की मुख्य नदियां में सिंधु के अस्तित्व झेलम, चेनाब, रावी,सतलुज और काबुल है यह सभी सिंधु की सहायक नदियां है और जल पूर्ति रखती है इसलिए पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन कहा जाता है।