शनिवार, 30 अप्रैल 2022

सुशांत सिंह राजपूत का जीवन परिचय


                         परिचय

 अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 1 जनवरी 1986 में पटना,बिहार में हुआ था। बॉलीवुड के चहेते और बेहतरीन कलाकारों में से एक थे, सुशांत ने अपने मेहनत और काबिलियत के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाये थे। अभिनेता होने के साथ ही वह एक लाजवाब डांसर भी है 31 वर्ष के सुशांत का जन्म बिहार के पटना में हुआ है उनके पिता का नाम के• के• सिंह है जो कि एक सरकारी अफसर रह चुके हैं और उनकी माता का नाम किसी को भी नहीं पता है लेकिन 2002 में उनकी मृत्यु हो गई थी सुशांत की चार बहने हैं जिनमें से उनकी बड़ी बहन मीतू सिंह राज्य स्तर की क्रिकेटर खिलाड़ी है सुशांत के स्कूल की पढ़ाई पटना के सेंट केरेंस हाई स्कूल से हुई है जिसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनील इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में ही छोड़कर अदाकारी की तरह बढ़ गए।

(सुशांत सिंह राजपूत)

                             फिल्मी करियर 

हमसे ना सुशांत के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो उनका सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान डांस में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई जिसके बाद उन्होंने डांस सीखने का फैसला किया जब जिनमें उनका परिवार उनके खिलाफ था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और श्यामक देवरी के डांस ग्रुप का हिस्सा बन गए श्यामक उनकी कला और लगन से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में डांस करने का मौका दिया मुंबई आने के बाद उन्होंने एक डांस ग्रुप के साथ भी परफॉर्म किया जिसको महसूस कोरियोग्राफर एश्ले लोबो ने विकसित किया था इसके बाद वह थिएटर का भी हिस्सा रहे और शायद यही कारण है कि वह एक सफल अभिनेता बनकर सामने आए सुशांत ने माशूर एक्शन डायरेक्टर पालन अमीन से मार्शल आर्ट भी सीखा है उन्हें टीवी में उनका पहला ब्रेक स्टार प्लस के शो किस देश में है मेरा दिल से मिला जिसके बाद उन्होंने मशहूर टीवी सीरियल पवित्र रिश्ता में मानव का किरदार निभाया और सबके चहेते बन गए। वह जरा नच के दिखा 2 और झलक दिखला जा 4 जैसे बड़े डांसिंग शो के भी प्रतिभागी रहे हैं और झलक दिखलाजा 4:00 के दौरान उन्हें मोस्ट कंसिस्टेंट  परफॉर्मर का टाइटल भी मिल चुका है। एक समय था जब उनके साथ अभिनेत्रियों काम तक नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक साधारण परिवार से थे और उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। फिल्म शुद्ध देसी रोमांस इसका उदाहरण है काफी समय बाद फिल्म के लिए परिणीति चोपड़ा ने साइन किया था।

                             निजी जिंदगी

सुशांत की निजी जिंदगी की बात करें तो वह सीरियल पवित्र रिश्ता में रह चुके है अपने सह कलाकार अंकिता लोखंडे के साथ संबंध में थे सुशांत अपने मां के बेहद करीब थे और उनकी मौत के बाद सुशांत का पूरा परिवार दिल्ली आ गया अपनी पहली ही फिल्म से सबकी नजर में अपनी जगह बनाने वाले सुशांत का भी जीवन आसान नहीं रहा था मां-बाप की इच्छा के बिना उन्होंने फिल्मों में अपना  करियर चुना और आज इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्थापित किया था।

        ( मृत्यु तिथि -14 जून 2020 मुंबई बांद्रा )

• प्रसिद्ध फिल्में - 

1.  काय पो चे 

2. शुद्व देशी रोमांस 

3. एम एस धोनी 

4. पीके और केदारनाथ 

5. छिछोरे 

आपको बता दे सुशांत आखिरी फिल्म दिल बेचारा है जिससे उनके साथ संजना सांधी नजर आई है। यह फिल्म 24 जुलाई 2020 को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी।



गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है?

किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की चाल बदल जाती है। जब दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत अधिक होती है तो प्रकाश की किरण आपतन बिंदु पर अभिलंब प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है? से दूर हटती है किंतु जब प्रकाश की चाल अपेक्षाकृत कम होती है तब किरण अभिलंब की और मुड़ती है अर्थात अपेक्षाकृत विरल माध्यम में किरण अभिलंब से दूर हटती है जबकि अपेक्षाकृत सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते है?

 जब प्रकाश की किरण किसी एक समागी  पारदर्शी  माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है, तो इन दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर किरण अपने पूर्व पथ से मुड़ जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन क्यों कहा जाता है?

 पाकिस्तान की मुख्य नदियां में सिंधु के अस्तित्व झेलम, चेनाब, रावी,सतलुज और काबुल है यह सभी सिंधु की सहायक नदियां है और जल पूर्ति रखती है इसलिए पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन कहा जाता है।

रेलवे फाटक पार करते समय रखी जाने वाली सावधानियों का उल्लेख करें।

रेलवे फाटक पार करते समय दो सावधानियां वर्तनी चाहिए ।

1.रेलवे लाइन पार करते समय सिंगल तथा दोनों तरफ के रेल पथ को देख लेना चाहिए।

2. यदि रेल फाटक पर लाल बत्तियां जली दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि गाड़ी आने वाली है यदि हरी बत्ती जली दिखाई दे तो रेल लाइन पार करना चाहिए।

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण क्या था?

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण बना आस्ट्रेलिया के युवराज आर्क ड्यूक फ्रांज की  बोस्निया की राजधानी सेराजेवों में हत्या। ऑस्ट्रेलिया ने इस घटना के लिए सर्बिया  को उत्तरदाई माना ऑस्ट्रेलिया ने सर्बिया को धमकी दी कि वह 48 घंटे के अंदर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें तथा आतंकवादियों का दमन करें सर्बिया ने ऑस्ट्रेलिया की मांगों को ठुकरा दिया फलत:  ऑस्ट्रेलिया ने 28 जून 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

श्री नरेंद्र मोदी (भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री)जीवन परिचय चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर।

श्री नरेंद्र मोदी भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री जीवन परिचय (चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर)

                       आरंभिक जीवन   

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में वदनगर मेहसाना डिस्टिक में हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद एवं माता का नाम हीरा बेन है, नरेंद्र मोदी के पिता बहुत साधारण तेली जाति के व्यक्ति थे जिनके 6 संताने थी जिनमें से एक नरेंद्र मोदी था नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे इनकी पढ़ाई में बहुत रुचि नहीं थी पर इनके शिक्षक के अनुसार भी कुशल वक्ता थे, वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था, मोदी जी ने वडनगर से स्कूल की पढ़ाई पूरी की वे राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही मोदी जी को देश के प्रति प्रेम था उन्होंने 8 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपना पंजीकरण करा लिया था, यह एक शक्तिशाली हिंदू राष्ट्रवादी समूह है जो भारत के संविधान की बातों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता नहीं चाहता था, हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है , हिंदुत्व की यह बात बीजेपी की जड़ है नरेंद्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारंभ हुआ उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाई गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेंद्र मोदी की रणनीति थी।



                          बचपन की बातें

पिता दामोदर दास मोदी और और मां हीराबेन के 6 बच्चे में से यह तीसरे नंबर के थे इनके घर खराब स्तिथि मैं था मां दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था गरीब के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन की कई ऊंचे नीचे पड़ाव देख लिए थे बचपन से ही इनको पढ़ाई लिखाई का बेहद शौक था यह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे,13 वर्ष की आयु में नरेंद्र मोदी की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई लेकिन कुछ परिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही यह घर छोड़कर चले गए यह घर छोड़कर ये उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदू आश्रम कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आक्षमों भ्रमण करने लगे।


                      

                     राजनैतिक जीवन  

जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया जहां कई लोगों ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था क्योंकि कई लोगों का मानना था कि मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया जो पिछले 60 सालों से भारतीय राजनीति को संभाल रही थी और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था कि वह उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे 1987 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए बीजेपी में हुए दिन-ब-दिन आगे बढ़ते रहें और सामाजिक हितों के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर  के उन्होंने बिजनेस के प्राइवेटाइजेशन (privatisation) छोटे बिजनेस को बढ़ावा दिया 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था फरवरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया जो कथित रूप से मुस्लिम ने किया था और बदले के प्रतिशोध इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमों पर भी हमला किया गया इस तरह  हिंसा बढ़ती गई इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगों ने पूरे देश में आलोचना की क्योंकि उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे मोदी के विरुद्ध दो जांच कमेटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिससे उन्हें दोषी ठहरा सकें।