बुधवार, 20 अप्रैल 2022
बालकृष्ण भट्ट जीवन परिचय (BalKrishna bhatt jivan parichay)
बुधवार, 13 अप्रैल 2022
बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का मुख्य जीवन परिचय क्या क्या है?
नमस्कार दोस्तों आज हमलोग डॉ भीमराव आंबेडकर जी के जीवनी के बारे मैं जानेंगे ।
बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में महू, मध्यप्रदेश में एक दलित परिवार में हुआ था। मानव मुक्ति के पुरोधा बाबा साहेब अपने समय के सबसे सुपठित जनों में से एक थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क (अमेरिका), फिर वहाँ से लंदन (इंग्लैंड) गए। उन्होंने संस्कृत का धार्मिक, पौराणिक और पूरा वैदिक वाङ्मय अनुवाद के जरिये पढ़ा और ऐतिहासिक सामाजिक क्षेत्र में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत कीं। सब मिलाकर वे इतिहास मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता बनकर उभरे। स्वदेश में कुछ समय उन्होंने वकालत भी की। समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अछूतों, स्त्रियों और मजदूरों को मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया। उनके चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति रहे बुद्ध कबीर और ज्योतिबा फुले । - भारत के संविधान निर्माण में उनकी महती भूमिका और एकनिष्ठ समर्पण के कारण ही हम आज उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कह कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दिसंबर, 1956 ई० में दिल्ली में बाबा साहेब का निधन हो गया ।
बाबा साहेब ने अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं भाषण हैं 'द कास्ट्स इन इंडिया : - देयर मैकेनिज्म', जेनेसिस एंड डेवलपमेंट', 'द अनटचेबल्स, हू आर दे', 'हू आर शुन, बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म' बुद्धा एण्ड हिज धम्मा', 'थाट्स ऑन लिंग्युस्टिक स्टेट्स', 'द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन', 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' आदि। हिंदी में उनका संपूर्ण वाङ्मय भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय' नाम से 21 खंडों में प्रकाशित हो चुका है।
यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर 'जाति भेद का उच्छेद' से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है।
शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022
सहरसा जिला में आपका स्वागत है, सहरसा जिला की प्रमुख बातें क्या क्या है?
• सहरसा का मुख्यालय कहां है - सहरसा
• गठन कब हुआ था - 1 अप्रैल 1954
• क्षेत्रफल कितना है - 1896 वर्ग किलोमीटर
• जनसंख्या कितना है - 19 लाख 661
• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1127
• कुल साक्षरता कितना है - 53.20%
• पुरुष साक्षरता कितना है - 63.56%
• महिला साक्षरता कितना है - 41.68%
• लिंगनुपात कितना है - 906
• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(सहरसा सदर, सिमरी - बख्तियारपुर)
• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 10(सिमरी बख्तियारपुर, नोहटाआ, सौर बाजार, सोनबरसा, सलखुआ,सत्तर कटैया, महेशी, कहरा,पतरघाट,बनाम इटहरी)
• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(सहरसा)
• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 4(सहरसा, महिषी,सोनबरसा, सिमरी बख्तियारपुर)
• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी
•मिट्टी कौन सी है - बलसुंदरी मिट्टी ,जलोढ़ मिट्टी
• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग और बीड़ी उद्योग
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मधेपुरा जिला में आपका स्वागत है, मधेपुरा जिला का मुख्य बातें क्या क्या है?
• मधेपुरा का मुख्यालय कहां है - मधेपुरा
• गठन कब हुआ था - 9 मई 1981
• क्षेत्रफल कितना है - 1787 वर्ग किलोमीटर
• जनसंख्या कितना है - 2001 762
• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1120
• कुल साक्षरता कितना है - 52.25%
• पुरुष साक्षरता कितना है - 61.77%
• महिला साक्षरता कितना है - 41.74%
• लिंगनुपात कितना है - 911
• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(मधेपुरा, सिंघेश्वर)
• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 13(मधेपुरा, सिंघेश्वर, कुमारखंड, मुरलीगंज, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, चौसा, आलमनगर, गम्हरिया, धैलाढ़, शंकरपुर, ग्वालपाड़ा, पुरैनी)
• ग्राम पंचायत कितना है - 170
• ग्राम कितना है - 449
• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(मधेपुरा)
• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 5(मधेपुरा, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, आलमनगर, सिंघेश्वर)
• प्रमुख मेला कौन सी है - सिंघेश्वर स्थान का मेला
• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी
• प्रमुख व्यक्ति - बी•पी• मंडल(पूर्व मुख्यमंत्री)
•मिट्टी कौन सी है - जालोढ मिट्टी
• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग
गुरुवार, 7 अप्रैल 2022
अंतरिक्ष विज्ञान की संपूर्ण बातें क्या क्या है ?
• अंतरिक्ष विभाग की स्थापना - 1972
• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था - यूरी गागरिन (सोवियत संघ, 1961)
• अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला कौन थी - वेलेंटिना तेरेशकोवा (सोवियत संघ, 1963)
• पीएसएलवी (PSLV) का पूर्ण रूप - polar Satellite launch vehicle
• विदेशी भूमि से छोड़ा गया भारत का पहला वैज्ञानिक उपग्रह - आर्यभट्ट (19 अप्रैल 1975)
• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1969
• थुंबा में प्रथम रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र की स्थापना - 1963
• भारत का पहला भूमिगत परमाणु विस्फोट - 18 मई 1974 पोखरण (राजस्थान)
• स्वदेश निर्मित एवं स्वदेश भूमि से परीक्षित प्रथम उपग्रह - रोहिणी (17अप्रैल 1983)
• भारत के राकेश शर्मा द्वारा रूसी अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरिक्ष में प्रवेश कब किया था - 1984
• विक्रमसारा भाई अंतरिक्ष केंद्र - त्रिवेंद्रम
• भारत का उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र - श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश में
• भारत का प्रथम कृत्रिम उपग्रह - रोहिणी ir-1 (18 जुलाई 1980 में)
• थुम्बा में स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी केंद्र (SSTC)की स्थापना - 1965
• भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की स्थापना - 1971, (मुंबई)
• इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना - 1971, कलपक्कम (मद्रास)
• चंद्रमा पर चरण रखने वाला प्रथम व्यक्ति - नीलआर्मस्ट्रांग (अमेरिका, 21 जुलाई 1969)
• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम भारतीय - स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा (1984)
• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन थी - कल्पना चावला(1997)
• अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली दूसरी भारतीय महिला कौन थी - सुनीता विलियम्स (2007)
•अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा दिन रहने का श्रेय किसका था - सुनीता विलियम्स (195 दिन)
• अंतरिक्ष में प्रक्षेपित प्रथम कृत्रिम उपग्रह - स्पूतनिक (सोवियत संघ, 1957)
• देश का पहला रिएक्टर कौन था - अप्सरा (1956)
• दूसरा परमाणु परीक्षण ए•पी•जे• अब्दुल कलाम के नेतृत्व में कब किया गया - 13 मई 1998 को
• भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन कब हुआ था - 1 फरवरी 2003 ईस्वी में
• सर्वप्रथम मानव रहित कृत्रिम उपग्रह का प्रक्षेपण करने वाला देश - सोवियत संघ
• चंद्रतल पर मनुष्य को उतारने वाला प्रथम अंतरिक्ष यान - अपोलो -11
• मंगल ग्रह पर पहला अंतरिक्ष यान - पाथफाइंटर (6 जुलाई 1997)
• प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान - शेंजु ( चीन)
• प्रथम अंतरिक्ष शटल - कोलंबिया (अमेरिका 1981)
• अंतरिक्ष में यान से बाहर विचरण करने वाला प्रथम व्यक्ति - अलेक्सी लियोनोव
• अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम - लाइका (एक कुत्तिया)
• देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र ध्रुव ने काम करना आरंभ कब किया - 8 अगस्त 1985
• परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना - अगस्त 1948
• रावतभाटा परमाणु विद्युत गृह - रावतभाटा (राजस्थान)
• तारापुर परमाणु विद्युत गृह - मुंबई (महाराष्ट्र)
• रमन अनुसंधान केंद्र - बैंगलोर (कर्नाटका)
• स्वदेश निर्मित प्रथम प्रक्षेपास्त्र - पृथ्वी (1988)
• प्रथम स्वदेश निर्मित उपग्रह - इनसेट - 2A (जुलाई 1992)
बुधवार, 6 अप्रैल 2022
शरीर के प्रमुख अदभूत तथ्य कौन कौन सी है
• मनुष्य का हृदय धड़कता है - 72बार/ मिनट
• मानव खोपड़ी में हड्डियां होती है - 8
• स्वस्थ मनुष्य की श्वसन दर - 16 से 18 बार
• मस्तिष्क का वजन - 1350 से 1400 ग्राम
• मस्तिष्क का बड़ा भाग - सेरेब्रम (प्रमस्तिष्क)
• वृक्क ( किडनी ) का वजन - 150 ग्राम
• शरीर की सबसे बड़ी हड्डी - फीमर ( जांघ में)
• शरीर की सबसे छोटी हड्डी - जबड़े की
• शरीर का सबसे कठोर तत्व - एनामिल
• सामान्य मनुष्य का रक्तचाप - 120/80 मिमी.
• मानव रक्त ( क्षारीय) का P H मान - 7.4
• मनुष्य में रक्त की मात्रा होती है - 5 से 6 लीटर
• मानव शरीर में जल की मात्रा - 65 से 80%
• रक्त को शुद्ध करता है - वृक्क ( किडनी)
• लाल रक्त कण का निर्माण - अस्थिमज्जा में
• लाल रक्त कण का जीवनकाल - 20 - 120 दिन
• श्वेत रक्त कण का जीवनकाल - 2 - 4 दिन
• श्वेत रक्त कण को कहा जाता है - ल्यूकोसाइट
• लाल रक्त कण को कहा जाता है - एरिथ्रो साइट
• शरीर का ताप नियंत्रण - हाइपोथेलेमस ग्रंथि
• सर्वदाता रक्त समूह (यूनिवर्सल डोनर ) - O
• सर्वग्राही रक्त समूह (यूनिवर्सल रिसेप्टर ) AB
• रक्तचाप मापने का यंत्र है - स्फेगमोमैनोमीटर
• ब्लड बैंक कहलाता है - प्लीहा (स्प्लीन )
• भोजन का पाचन प्रारंभ होता है - मुख से
• पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है - छोटी आंत में
• पित्त स्रावित होता है - यकृत द्वारा
• विटामिन संचित रहता है - यकृत में
• शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि - यकृत (लीवर)
• सबसे छोटी ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि) - पिट्टयूटरी
• मनुष्य में पसलियां पाई जाती है - 12 जोड़ी
• शरीर में हड्डियों की कुल संख्या - 206
• शरीर में मांसपेशियों की कुल संख्या - 639
• लार में पाया जाने वाला एंजाइम है - टायलिन
• लिंग निर्धारण होता है - पुरुष क्रोमोसोम पर
• मनुष्य का हृदय होता है - चार कोष्ठीय
• शरीर में गुणसूत्रों की संख्या - 46
• शरीर का सबसे बड़ा अंग - त्वचा
• शरीर की सबसे बड़ी कोशिका - तंत्रिका तंत्र
• शरीर में अमीनो अम्ल की संख्या - 20
• शरीर में प्रतिदिन मुद्र बनता है - 1½ ली•
• मूत्र दुर्गंध देता है - यूरिया के कारण
• मानव मूत्र का पीएच (PH) मान - 6
• शरीर का सामान्य तापमान होता है - 98.6°F या 37°C या 310K
• टिबिया नामक हड्डी पाई जाती है - पैर में
• दांतो और हड्डियों के संरचना के लिए आवश्यक तत्व है - कैल्शियम एवं फास्फोरस
• शरीर में उतकों का निर्माण होता है - प्रोटीन से
शनिवार, 2 अप्रैल 2022
बौद्धधर्म के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य क्या क्या है?
• बौद्धधर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे। इन्हें एशिया का ज्योतिपुंज(light of Asia) कहा जाता है।
• गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसवी पूर्व में कपिलवस्तु में लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था।
• इन्हें पिता शुद्धोधन सा के गण के मुखिया थे।
• इनकी माता माया देवी की मृत्यु इनके जन्म के सातवें दिन ही हो गई थी इसका लालन-पालन इनकी सौतेली मां प्रजापति गौतमी ने किया था।
• इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
• गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा के साथ हुआ इनके पुत्र का नाम राहुल था।
• सिद्धार्थ जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने निम्न चार दृश्य को क्रमशः देखा।
(१) बूढ़ा व्यक्ति (२) एक बीमार व्यक्ति (३) शव एवं (४) एक सन्यासी
• सांसारिक समस्याओं से व्यवस्थित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया है।
• गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के आलरकालम से संख्या दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। आलारकलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए।
• अलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रूद्रकरामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की।
• उरुवेला में सिद्धार्थ को पांच साधक मिले।
• बिना अन्न जल ग्रहण के 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ।
• ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए व स्थान बोधगया कहलया।
• बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिससे बौद्ध ग्रंथों में धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है।
• बौद्ध ने अपने उद्देश जनसाधारण की भाषा पाली में दिए।
• बौद्ध ने अपने उपदेश कौशल वैशाली कौशांबी एवं अन्य राज्यों में दिए
• बुद्ध ने अपने सर्वाधिक उपदेश कौशल देश की राजधानी श्रावस्ती में दिए।
• बुध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था मे कुशीनार द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गई जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया।
• मल्लों ने अत्यंत सम्मान पूर्वक बौद्ध का संस्कार किया।
• बुद्ध के जन्म एवं मृत्यु की तिथि को चीनी परंपरा के कैंटोन अभिलेख के आधार पर निश्चित किया गया है।
• बौद्ध धर्म के बारे में हमें निषद ज्ञान पाली त्रिपिटक से प्राप्त होता है।
• बौद्ध धर्म मुल्तानी स्वर वादी है इसमें आत्मा की परिकल्पना भी नहीं है।
• बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।
• विष्णु दुखों से भरा है का सिद्धार्थ बुद्ध ने उपनिषद से लिया।
• बुद्ध के अनुयाई दो भागों में विभाजित थे -
1. भिक्षुक - बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जिन्होंने सन्यास ग्रहण किया उन्हें भेजो कहा गया।
2. उपासक - गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म अपनाने वालों को उपासक आ गया।
• बौद्ध संघ में प्रविष्टि होने को उपसंपदा कहा जाता था।
• बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष थी।
• बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है - बौद्ध, धर्म एवं संघ।
• ठीक अनु श्रुति के अनुसार मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को 8 भागों में बांट कर उन पर 8 स्तूपों का निर्माण कराया गया।
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- कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ अपने परिवार और देश के लिए कार्य करते हैं वही महान कहलाता ...
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• अंतरिक्ष विभाग की स्थापना - 1972 • अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था - यूरी गागरिन (सोवियत संघ, 1961) • अंतरिक्ष में जाने वाली प...
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जिंदगी जीने का कुछ ऐसा अंदाज रखो। जो तुम्हें न समझे उसे नजरंदाज रखो। पीले जंगल में दो राहें अलग-अलग जा रही थी और अफसोस ...