बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय, बायोग्राफी,जन्म,निबंध,निवास - स्थान,माता - पिता,शिक्षा, वृति,विशेष परिस्थिति, रचनात्मक सक्रियता , रचनाएं और इनकी निबंध बातचीत
बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय - कृष्णा भट्ट का जन्म 23 जून 1844 ईसवी में हुआ था। इनका जन्म इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था उनके माता का नाम पार्वती देवी एवं पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था पिता एक व्यापारी थे और माता एक संस्कृत महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाए। इनके प्रारंभ शिक्षा संस्कृत का अध्ययन 1867 में प्रयोग के मिशन स्कूल से एंट्रेंस की परीक्षा दी। इनके वित्ती 1869 तक प्रयोग के मिशन स्कूल में अध्यापन। 1885 में प्रयोग के सी•ए•बी• स्कूल में संस्कृत का अध्यापन। 1888 में प्रयोग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त किंतु अगर स्वभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी और उसके बाद से लेखन कार्य पर ही निर्भर हो गए। इनके परिस्थिति पिता के निधन पर आंतरिक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का सामना। पैतृक घर छोड़ कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।
रचनात्मक सक्रियता : भारतेंदु हरिश्चंद्र की कृष्णा से हिंदी वर्धनी सभा प्रयोग की ओर से 1877 ईसवी में हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ क्या इसे वे 33 वर्षों तक चलाते रहें। इसमें नियमित रूप से सामाजिक साहित्य नैतिक राजनीतिक विषयों पर निबंध लिखते रहे 1881 में वेदों की युक्ति पूर्ण समीक्षा की 1886 में लाला श्रीनिवास दास के संजीव गीता स्वयंवर की कठोर आलोचना की। जीवन के अंतिम दिनों में हिंदी शब्दकोश के संपादन के लिए श्यामसुंदर दास द्वारा काशी आमंत्रित किंतु अच्छा हुआ ना होने पर अलग हो गए।
रचनाएं : उपनस्यास - रहस्य कथा , नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वेरी, रसाताल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव।
नाटक - पदमावती, किराता ज्रूरनीय ,वेणी संहार, शिशुपाल वध, दमयंती या दमयंती स्वयंवर, शिक्षा दान, चंद्रसेन, सीता बनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, कट्टर सुम की एक नकल, बृहन्नाला इंग्लैंड एंड वेरी और भारत जननी, भारतवर्ष और कली, दूरदेशी, एक रोगी और एक वैध, रेल का विकेट खेल, बाल विवाह और आदि।
प्रहसन - जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विखंडन आदि।
निबंध - 1000 से आसपास निबंध जिसमें 100 से ऊपर बहुत महत्वपूर्ण । भट्ट निबंधमाला नाम से दो खंडों में एक संग्रह प्रकाशित।
बालकृष्ण भट्ट की मुख्य बातें।
बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिंदी गद्य के अधीन निर्माताओं और अन्य रचनाओं में एक है। भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकारों में से एक है वह हिंदी के प्रारंभिक युग के प्रमुख और महान पत्रकार निबंधकार तथा हिंदी की आधुनिक आलोचना के प्रवर्तक को में अग्रणी है उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को अपने प्रतिभाशाली जनधर्मी और लेखन से एक नवीन धरातल नवीन की दिशा और नया रूप रंग और मानसा दिया। निश्चय ही इस बात पर युगांतरकारी कार्य में वे एकाकी नहीं थे, भारतेंदु हरिश्चंद्र प्रताप नारायण मिश्र प्रेम धन राधाचरण गोस्वामी जैसे महान साहित्यकार उनके साथ थे। 12 यह एक सब संबंध स्थापित मान्यता है कि अपने युग की सर्वाधिक सक्रिय मुखर और प्रदूषण समय तक संस्कृति निष्ठा के साथ दसवें लेखन द्वारा साहित्य सेवा करते रहने वाले समर्पित साहित्यकार थे बालकृष्ण भट्ट। भारतेंदु युग की दो तीन प्रमुख साहित्यकारों में एक जिनके अनवरत लेखन से भारतेंदु युग का रचनात्मक एवं व्यक्तित्व निर्मित हुआ द्वेदी युग का मूलाधार निर्मित हो सका। साहित्य केबल कल्पना विलास और मनोरंजन की वस्तु नहीं है अपितु वह जन समूह के जीत के विकास का संवाहक और जन संस्कृति के विकास प्रभाव का मूर्ति वाणी में अपादान है। जोगन लोक संस्कृति से ज्यादा और दिशा पता है यह और पूर्व प्रधान मान्यता भारतेंदु युग के साहित्य से बनती है और इसके दृश्यों में बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं। आधुनिक हिंदी नवजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में नए सिरे से अपनी भाषा और साहित्य की मौलिक लोकवादी प्रकृति एवं जाति निष्ठा की पहचान करते हुए तत्वों को दिशा और प्रभाव देने का कार्य महान लेखकों ने अपनी राजधानी गतिविधियों द्वारा संपन्न किया उनमें विशेष रूप से सक्रिय है।
बालकृष्ण भट्ट गद्दाकार थे अपनी अभिरुचि मानसा और प्रतिभा से परिवेश और यथार्थ से संपूर्ण सरोकार रखने वाले लेखक पत्रकार। उनके कार्य की भाषा और कला की जलेबी परिवेश और व्यर्थ में ही थी। लो बिहार में बोलचाल बातचीत और अभिरुचि भक में मूर्ति भाषा और कला कि उनके गध का कलेवर बन जाती हैं। वह नवजागरन और स्वाधीनता संघर्ष का दौर था जिनमे भीतरी और बाहरी स्वदेशी और विदेशी शक्तियों से टकराव और संघर्ष है जागरूक का दिन लेखक की नियति थी यह टकराव संघर्ष भर्ती जी के लेखन में अंतर कितना तेज और तेवर बनकर उभरता है। भट्ट जी ने हिंदी प्रदीप पूरे पूरे एक उपन्यास लिखे नाटक वर्षा ऋतु निबंध ही उनकी वह अपने पिता है उनका लेखन पूरी शक्ति सामर्थ्य वैभव के साथ प्रकट हुआ है। श्रमिक समस्याओं पर मैंने जमकर लिखा है। स्त्री शिक्षा महिला स्वतंत्रता राजा प्रजा कृषि का व्यवस्था अंग्रेजी शिक्षा सुरक्षिता में परिवर्तन देश सेवा अंधविश्वास आदि विषयों पर उन्होंने खूब लिखा है। मानव भागों और भाषा साहित्य के विषयों पर भी खुलकर लिखा। पंचायत हाथों पर कलाकार मंत्रियों ने कितने लिखे कि उनकी संख्या सैकड़ों में हैं। रामचंद्र शुक्ल ने अधिकारियों ने अंग्रेजों साहित्य के एडिशन और स्टील की श्रेणी में रखा है। बातचीत शीर्षक निबंध उनकी निबंधकार व्यक्तित्व और निबंध कला के साथ-साथ भाषा शैली का प्रतिनिधित्व करता है प्रस्तुत निबंध जी के बारे में ऊपर कही गई बातों को सहज की प्रमाणित करता है।
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