बुधवार, 27 अप्रैल 2022
सोमवार, 25 अप्रैल 2022
श्री नरेंद्र मोदी (भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री)जीवन परिचय चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर।
श्री नरेंद्र मोदी भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री जीवन परिचय (चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर)
आरंभिक जीवन
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में वदनगर मेहसाना डिस्टिक में हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद एवं माता का नाम हीरा बेन है, नरेंद्र मोदी के पिता बहुत साधारण तेली जाति के व्यक्ति थे जिनके 6 संताने थी जिनमें से एक नरेंद्र मोदी था नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे इनकी पढ़ाई में बहुत रुचि नहीं थी पर इनके शिक्षक के अनुसार भी कुशल वक्ता थे, वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था, मोदी जी ने वडनगर से स्कूल की पढ़ाई पूरी की वे राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही मोदी जी को देश के प्रति प्रेम था उन्होंने 8 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपना पंजीकरण करा लिया था, यह एक शक्तिशाली हिंदू राष्ट्रवादी समूह है जो भारत के संविधान की बातों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता नहीं चाहता था, हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है , हिंदुत्व की यह बात बीजेपी की जड़ है नरेंद्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारंभ हुआ उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाई गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेंद्र मोदी की रणनीति थी।
बचपन की बातें
पिता दामोदर दास मोदी और और मां हीराबेन के 6 बच्चे में से यह तीसरे नंबर के थे इनके घर खराब स्तिथि मैं था मां दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था गरीब के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन की कई ऊंचे नीचे पड़ाव देख लिए थे बचपन से ही इनको पढ़ाई लिखाई का बेहद शौक था यह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे,13 वर्ष की आयु में नरेंद्र मोदी की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई लेकिन कुछ परिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही यह घर छोड़कर चले गए यह घर छोड़कर ये उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदू आश्रम कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आक्षमों भ्रमण करने लगे।
राजनैतिक जीवन
जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया जहां कई लोगों ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था क्योंकि कई लोगों का मानना था कि मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया जो पिछले 60 सालों से भारतीय राजनीति को संभाल रही थी और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था कि वह उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे 1987 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए बीजेपी में हुए दिन-ब-दिन आगे बढ़ते रहें और सामाजिक हितों के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर के उन्होंने बिजनेस के प्राइवेटाइजेशन (privatisation) छोटे बिजनेस को बढ़ावा दिया 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था फरवरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया जो कथित रूप से मुस्लिम ने किया था और बदले के प्रतिशोध इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमों पर भी हमला किया गया इस तरह हिंसा बढ़ती गई इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगों ने पूरे देश में आलोचना की क्योंकि उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे मोदी के विरुद्ध दो जांच कमेटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिससे उन्हें दोषी ठहरा सकें।
रविवार, 24 अप्रैल 2022
थॉमस एडीसन का जीवन परिचय ( विद्युत बल्ब का आविष्कारक)
थॉमस एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 मिलन ओहायो में हुआ था। और हियोरोन मिशिगन मैं वे बड़े पले। वह सैमुअल ओग्डन एडिशन और नैंसी मैथ्यू इलियट के सातवें और अंतिम पुत्र थे (यानी इनके माता का नाम नैंसी मैथ्यू एलियट और पिता का नाम सेमुअल ओगडेन एडिशन था) पैतृक परिवार डच था , जिसका पुराने समय से ही उपनाम एडिशन। स्कूल में युवा एडिशन का दिमाग बहुत ही भ्रमित था और उनके शिक्षक रेवरेंड इंग्ले उन्हें व्याकुल कहकर बुलाते थे और लगभग पूरे 3 महीने एडिशन ने स्कूल में बिताए बाद में उनकी माता ने एडिशन को घर पर ही पढ़ाना शुरू किया एडिशन ने अपनी घर शिक्षा आर•जी• पार कर स्कूल से और दी कूपर यूनियन स्कूल ऑफ साइंस एंड आर्ट से ग्रहण किया।परिचय
थॉमस अल्वा एडिसन एक अमेरिकी आविष्कारक और व्यापारी थे उन्होंने अनेक यंत्र एवं युक्तियां विकसित की के जिनमे संसार भर लोगों के जीवन में भारी बदलाव आए। विद्युत बल्ब तथा फोनोग्राफ सहित इन्होंने हजारों अविष्कार किया। वह भारी मात्रा में उत्पादन के सिद्धांत को व्यवहार में लाने वाले पहले अन्वेषकों में से एक थे। इसके अलावा खोज करने के लिए विशाल टीम का सहारा लेने वाले वे पहले आविष्कारक थे। इसलिए उन्हें पहले औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। एडिशन एक महान आविष्कारक थे उनके समय में उन्होंने पूरे यूएस (US) के 1093 पेटर्न्स अपने कब्जे में कर रखे थे, और किंगडम फ्रांस और जर्मनी में भी उनके कई सारे पेटेंट्स है।उनके इन सभी पेटेंस का उनके अविष्कारों पर बहुत प्रभाव पड़ा। उनके पेटर्न्स के साथ ही उनके आविष्कार भी उस समय काफी प्रचलित होने लगे थे जिनमें इलेक्ट्रिक लाइट और पावर यूटिलिटीज साउंड रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है जिन्होंने बड़ी तेजी से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध पाई एडिशन के आविष्कारों में हमें अधिकतर मॉस - कम्युनिकेशन और टेली - कम्युनिकेशन से संबंध दिखाई देने लगता है। स्टॉप स्टीकर बोर्ड रिकॉर्डर करने की मशीन इलेक्ट्रिक कार के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक पावर रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है। उन्होंने जल्दी ही अपने इन अविष्कारों में प्रगति हासिल की और टेलीग्राफी ऑपरेटर में अपना करियर बनाना चाहिए बाद में एडिशन ने इलेक्ट्रिक पावर निर्माण की यंत्रणा को विकसित किया और घर व्यापार और फैक्टरी में उसे बढ़ते रहे जो आधुनिक दुनिया में एक विशाल अविष्कारक के रूप में जाना जाने लगा यह सब निर्माण करने उनका पहला स्टेशन न्यूयॉर्क की पल स्ट्रीक में बना। थॉमस एडिसन का हमेशा से ही यह कहना था कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है कि हमेशा एक और बार प्रयास करना क्योंकि जब आप असफल होते होते हो और अपने काम को छोड़ देते हो तब आप सफलता के बहुत करीब होते हो।
कैसे हुआ बल्ब का अविष्कार
बल्ब का आविष्कार 1878 ई• में थॉमस अल्वा एडिसन ने क्या था । एक अमेरिकी वैज्ञानिक है जिन्होंने सिर्फ बल्ब का अविष्कार नहीं किया बल्कि और भी कई सारे उपकरणों की खोज की जैसे - कार्बन टेलिफोन,मोशन पिक्चर कैमरा, ग्रामोफोन, अल्कलाइन स्टोरेज बैटरी जैसे यंत्रों का आविष्कार किया।
शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022
धीरूभाई अंबानी (रिलायंस के संस्थापक) का जीवनी (Dhiru Bhai Ambani Reliance ke sansthapak)
जन्म,प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा ।
धीरूभाई अंबानी को बिजनेस में मिली असफलता के बाद जॉइनिंग की नौकरी।
रिलायंस कंपनी की शुरुआत
बुधवार, 20 अप्रैल 2022
बालकृष्ण भट्ट जीवन परिचय (BalKrishna bhatt jivan parichay)
बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय, बायोग्राफी,जन्म,निबंध,निवास - स्थान,माता - पिता,शिक्षा, वृति,विशेष परिस्थिति, रचनात्मक सक्रियता , रचनाएं और इनकी निबंध बातचीत
बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय - कृष्णा भट्ट का जन्म 23 जून 1844 ईसवी में हुआ था। इनका जन्म इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था उनके माता का नाम पार्वती देवी एवं पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था पिता एक व्यापारी थे और माता एक संस्कृत महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाए। इनके प्रारंभ शिक्षा संस्कृत का अध्ययन 1867 में प्रयोग के मिशन स्कूल से एंट्रेंस की परीक्षा दी। इनके वित्ती 1869 तक प्रयोग के मिशन स्कूल में अध्यापन। 1885 में प्रयोग के सी•ए•बी• स्कूल में संस्कृत का अध्यापन। 1888 में प्रयोग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त किंतु अगर स्वभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी और उसके बाद से लेखन कार्य पर ही निर्भर हो गए। इनके परिस्थिति पिता के निधन पर आंतरिक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का सामना। पैतृक घर छोड़ कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।
रचनाएं : उपनस्यास - रहस्य कथा , नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वेरी, रसाताल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव।
बुधवार, 13 अप्रैल 2022
बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का मुख्य जीवन परिचय क्या क्या है?
नमस्कार दोस्तों आज हमलोग डॉ भीमराव आंबेडकर जी के जीवनी के बारे मैं जानेंगे ।
बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में महू, मध्यप्रदेश में एक दलित परिवार में हुआ था। मानव मुक्ति के पुरोधा बाबा साहेब अपने समय के सबसे सुपठित जनों में से एक थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क (अमेरिका), फिर वहाँ से लंदन (इंग्लैंड) गए। उन्होंने संस्कृत का धार्मिक, पौराणिक और पूरा वैदिक वाङ्मय अनुवाद के जरिये पढ़ा और ऐतिहासिक सामाजिक क्षेत्र में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत कीं। सब मिलाकर वे इतिहास मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता बनकर उभरे। स्वदेश में कुछ समय उन्होंने वकालत भी की। समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अछूतों, स्त्रियों और मजदूरों को मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया। उनके चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति रहे बुद्ध कबीर और ज्योतिबा फुले । - भारत के संविधान निर्माण में उनकी महती भूमिका और एकनिष्ठ समर्पण के कारण ही हम आज उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कह कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दिसंबर, 1956 ई० में दिल्ली में बाबा साहेब का निधन हो गया ।
बाबा साहेब ने अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं भाषण हैं 'द कास्ट्स इन इंडिया : - देयर मैकेनिज्म', जेनेसिस एंड डेवलपमेंट', 'द अनटचेबल्स, हू आर दे', 'हू आर शुन, बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म' बुद्धा एण्ड हिज धम्मा', 'थाट्स ऑन लिंग्युस्टिक स्टेट्स', 'द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन', 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' आदि। हिंदी में उनका संपूर्ण वाङ्मय भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय' नाम से 21 खंडों में प्रकाशित हो चुका है।
यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर 'जाति भेद का उच्छेद' से किंचित संपादन के साथ लिया गया है। यह भाषण 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णतः सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका। बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया। प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं। जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है। भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है।
शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022
सहरसा जिला में आपका स्वागत है, सहरसा जिला की प्रमुख बातें क्या क्या है?
• सहरसा का मुख्यालय कहां है - सहरसा
• गठन कब हुआ था - 1 अप्रैल 1954
• क्षेत्रफल कितना है - 1896 वर्ग किलोमीटर
• जनसंख्या कितना है - 19 लाख 661
• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1127
• कुल साक्षरता कितना है - 53.20%
• पुरुष साक्षरता कितना है - 63.56%
• महिला साक्षरता कितना है - 41.68%
• लिंगनुपात कितना है - 906
• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है -2(सहरसा सदर, सिमरी - बख्तियारपुर)
• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 10(सिमरी बख्तियारपुर, नोहटाआ, सौर बाजार, सोनबरसा, सलखुआ,सत्तर कटैया, महेशी, कहरा,पतरघाट,बनाम इटहरी)
• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(सहरसा)
• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 4(सहरसा, महिषी,सोनबरसा, सिमरी बख्तियारपुर)
• प्रमुख नदी कौन सी है - कोसी
•मिट्टी कौन सी है - बलसुंदरी मिट्टी ,जलोढ़ मिट्टी
• उद्योग कौन सी है - जूट उद्योग और बीड़ी उद्योग
https://totalsigret.blogspot.com/2022/04/blog-post_8.html
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- कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ अपने परिवार और देश के लिए कार्य करते हैं वही महान कहलाता ...
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• अंतरिक्ष विभाग की स्थापना - 1972 • अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था - यूरी गागरिन (सोवियत संघ, 1961) • अंतरिक्ष में जाने वाली प...
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जिंदगी जीने का कुछ ऐसा अंदाज रखो। जो तुम्हें न समझे उसे नजरंदाज रखो। पीले जंगल में दो राहें अलग-अलग जा रही थी और अफसोस ...



