बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन क्यों कहा जाता है?

 पाकिस्तान की मुख्य नदियां में सिंधु के अस्तित्व झेलम, चेनाब, रावी,सतलुज और काबुल है यह सभी सिंधु की सहायक नदियां है और जल पूर्ति रखती है इसलिए पाकिस्तान को सिंधु नदी का देन कहा जाता है।

रेलवे फाटक पार करते समय रखी जाने वाली सावधानियों का उल्लेख करें।

रेलवे फाटक पार करते समय दो सावधानियां वर्तनी चाहिए ।

1.रेलवे लाइन पार करते समय सिंगल तथा दोनों तरफ के रेल पथ को देख लेना चाहिए।

2. यदि रेल फाटक पर लाल बत्तियां जली दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि गाड़ी आने वाली है यदि हरी बत्ती जली दिखाई दे तो रेल लाइन पार करना चाहिए।

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण क्या था?

प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण बना आस्ट्रेलिया के युवराज आर्क ड्यूक फ्रांज की  बोस्निया की राजधानी सेराजेवों में हत्या। ऑस्ट्रेलिया ने इस घटना के लिए सर्बिया  को उत्तरदाई माना ऑस्ट्रेलिया ने सर्बिया को धमकी दी कि वह 48 घंटे के अंदर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें तथा आतंकवादियों का दमन करें सर्बिया ने ऑस्ट्रेलिया की मांगों को ठुकरा दिया फलत:  ऑस्ट्रेलिया ने 28 जून 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

श्री नरेंद्र मोदी (भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री)जीवन परिचय चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर।

श्री नरेंद्र मोदी भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री जीवन परिचय (चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने का सफर)

                       आरंभिक जीवन   

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 में वदनगर मेहसाना डिस्टिक में हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद एवं माता का नाम हीरा बेन है, नरेंद्र मोदी के पिता बहुत साधारण तेली जाति के व्यक्ति थे जिनके 6 संताने थी जिनमें से एक नरेंद्र मोदी था नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे इनकी पढ़ाई में बहुत रुचि नहीं थी पर इनके शिक्षक के अनुसार भी कुशल वक्ता थे, वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था, मोदी जी ने वडनगर से स्कूल की पढ़ाई पूरी की वे राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही मोदी जी को देश के प्रति प्रेम था उन्होंने 8 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में अपना पंजीकरण करा लिया था, यह एक शक्तिशाली हिंदू राष्ट्रवादी समूह है जो भारत के संविधान की बातों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता नहीं चाहता था, हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है , हिंदुत्व की यह बात बीजेपी की जड़ है नरेंद्र जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे इस प्रकार उनका जीवन संघ के एक निष्ठावान प्रचारक के रूप में प्रारंभ हुआ उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाई गुजरात में शंकर सिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेंद्र मोदी की रणनीति थी।



                          बचपन की बातें

पिता दामोदर दास मोदी और और मां हीराबेन के 6 बच्चे में से यह तीसरे नंबर के थे इनके घर खराब स्तिथि मैं था मां दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था गरीब के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन की कई ऊंचे नीचे पड़ाव देख लिए थे बचपन से ही इनको पढ़ाई लिखाई का बेहद शौक था यह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे,13 वर्ष की आयु में नरेंद्र मोदी की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई लेकिन कुछ परिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही यह घर छोड़कर चले गए यह घर छोड़कर ये उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदू आश्रम कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आक्षमों भ्रमण करने लगे।


                      

                     राजनैतिक जीवन  

जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया जहां कई लोगों ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था क्योंकि कई लोगों का मानना था कि मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया जो पिछले 60 सालों से भारतीय राजनीति को संभाल रही थी और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था कि वह उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे 1987 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए बीजेपी में हुए दिन-ब-दिन आगे बढ़ते रहें और सामाजिक हितों के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर  के उन्होंने बिजनेस के प्राइवेटाइजेशन (privatisation) छोटे बिजनेस को बढ़ावा दिया 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था फरवरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया जो कथित रूप से मुस्लिम ने किया था और बदले के प्रतिशोध इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमों पर भी हमला किया गया इस तरह  हिंसा बढ़ती गई इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगों ने पूरे देश में आलोचना की क्योंकि उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे मोदी के विरुद्ध दो जांच कमेटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिससे उन्हें दोषी ठहरा सकें।


रविवार, 24 अप्रैल 2022

थॉमस एडीसन का जीवन परिचय ( विद्युत बल्ब का आविष्कारक)


                        परिचय

थॉमस एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 मिलन ओहायो में हुआ था। और हियोरोन मिशिगन मैं वे बड़े पले। वह सैमुअल ओग्डन एडिशन और नैंसी मैथ्यू इलियट के सातवें और अंतिम पुत्र थे (यानी इनके माता का नाम नैंसी मैथ्यू एलियट और पिता का नाम सेमुअल ओगडेन एडिशन था) पैतृक परिवार डच था , जिसका पुराने समय से ही उपनाम एडिशन। स्कूल में युवा एडिशन का दिमाग बहुत ही भ्रमित था और उनके शिक्षक रेवरेंड इंग्ले उन्हें व्याकुल कहकर बुलाते थे और लगभग पूरे 3 महीने एडिशन ने स्कूल में बिताए बाद में उनकी माता ने एडिशन को घर पर ही पढ़ाना शुरू किया एडिशन ने अपनी घर शिक्षा आर•जी• पार कर स्कूल से और दी कूपर यूनियन स्कूल ऑफ साइंस एंड आर्ट से ग्रहण किया।
     एडिसन को सुनने में बचपन से ही तकलीफ होती थी। 
ये सब तब से चल रहा था जब से बचपन में उन्हें एक तेज बुखार आया था और उससे उबरते समय उनके दाहिने कान में चोट आ गई थी तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। तभी से उन्हें सुनने में थोड़ी बहुत परेशानी होती थी। उनके कैरियर के मध्य उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में बताया कि जब ट्रेन में सफर कर रहे थे तभी एक केमिकल में आग लग गई जिस वजह से वह ट्रेन के बाहर फेंके गए और उनके कान में चोट आ गई कुछ साल बाद ही उन्होंने इस कहानी को तोड़ते हुए एक नई कहानी बनाई और कहने लगे कि जब उनकी मदद कंडक्टर कर रहा था तभी अचानक उनके कान में चोट लगी थी कान के बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी अल्प मनोरंजन, निरंतर परिश्रम , असीम धैर्य,  आश्चर्यजनक समरण शक्ति और अनुपम कल्पना द्वारा एडिशन ने इतनी सफलता पाई। वे एक वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक सफल उद्यमी भी थे वह हर दिन अपने काम करने के बाद बचे समय को प्रयोग और परिश्रम में लगाते थे। वे अपनी कल्पना शक्ति और स्मरण शक्ति का उपयोग अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया उनके इसी टैलेंट की बदौलत से उन्होंने 14 कंपनियों की स्थापना की जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक  भी शामिल है जो आज भी दुनिया की सबसे बड़ी व्यापार करने वाली कंपनी के नाम से जानी जाती है।


थॉमस अल्वा एडिसन एक अमेरिकी आविष्कारक और व्यापारी थे उन्होंने अनेक यंत्र एवं युक्तियां विकसित की के जिनमे संसार भर लोगों के जीवन  में भारी बदलाव आए। विद्युत बल्ब तथा फोनोग्राफ सहित इन्होंने हजारों अविष्कार किया। वह भारी मात्रा में उत्पादन के सिद्धांत को व्यवहार में लाने वाले पहले अन्वेषकों में से एक थे। इसके अलावा खोज करने के लिए विशाल टीम का सहारा लेने वाले वे पहले आविष्कारक थे। इसलिए उन्हें पहले औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। एडिशन एक महान आविष्कारक थे उनके समय में उन्होंने पूरे यूएस (US) के 1093 पेटर्न्स अपने कब्जे में कर रखे थे,  और किंगडम फ्रांस और जर्मनी में भी उनके कई सारे पेटेंट्स है।उनके इन सभी पेटेंस का उनके अविष्कारों पर बहुत प्रभाव पड़ा। उनके पेटर्न्स के साथ ही उनके आविष्कार भी उस समय काफी प्रचलित होने लगे थे जिनमें इलेक्ट्रिक लाइट और पावर यूटिलिटीज साउंड रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है जिन्होंने बड़ी तेजी से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध पाई एडिशन के आविष्कारों में हमें अधिकतर मॉस - कम्युनिकेशन और टेली - कम्युनिकेशन से संबंध दिखाई देने लगता है। स्टॉप स्टीकर बोर्ड रिकॉर्डर करने की मशीन इलेक्ट्रिक कार के लिए बैटरी इलेक्ट्रिक पावर रिकॉर्डर और मोशन पिक्चर भी शामिल है। उन्होंने जल्दी ही अपने इन अविष्कारों में प्रगति हासिल की और टेलीग्राफी ऑपरेटर में अपना करियर बनाना चाहिए बाद में एडिशन ने इलेक्ट्रिक पावर निर्माण की यंत्रणा को विकसित किया और घर व्यापार और फैक्टरी में उसे बढ़ते रहे जो आधुनिक दुनिया में एक विशाल अविष्कारक के रूप में जाना जाने लगा यह सब निर्माण करने उनका पहला स्टेशन न्यूयॉर्क की पल स्ट्रीक में बना। थॉमस एडिसन का हमेशा से ही यह कहना था कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है कि हमेशा एक और बार प्रयास करना क्योंकि जब आप असफल होते होते हो और अपने काम को छोड़ देते हो तब आप सफलता के बहुत करीब होते हो। 

             

             कैसे हुआ बल्ब का अविष्कार

बल्ब का आविष्कार 1878 ई• में थॉमस अल्वा एडिसन ने क्या था । एक अमेरिकी वैज्ञानिक है जिन्होंने सिर्फ बल्ब का अविष्कार नहीं किया बल्कि और भी कई सारे उपकरणों की खोज की जैसे - कार्बन टेलिफोन,मोशन पिक्चर कैमरा, ग्रामोफोन, अल्कलाइन स्टोरेज बैटरी जैसे यंत्रों का आविष्कार किया।

                    
 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

धीरूभाई अंबानी (रिलायंस के संस्थापक) का जीवनी (Dhiru Bhai Ambani Reliance ke sansthapak)

जन्म,प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा ।

धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता गोवर्धन भाई अंबानी एक साधारण टीचर थे और उनकी माता जमनबेन घरेलू महिला थी और यह गुजरात के जूनागढ़ के पास एक छोटे से गांव चोरवाड़ा  के एक साधारण शिक्षक के घर में धीरूभाई अंबानी का जन्म हुआ। जिनके लिए अपने इतने बड़े परिवार का लालन पालन करना काफी चुनौतीपूर्ण था। के लिए भी पैसे पूरे नहीं पढ़ते थे ऐसे में चार और भाई-बहन के बीच धीरूभई का शिक्षा ग्रहण करना काफी मुश्किल था ऐसी स्थिति में धीरूभाई अंबानी को हाई स्कूल की अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और अपने घर की माली हालत को देखते हुए परिवार का गुजर-बसर करने के लिए अपने पिता के साथ भाटिया इत्यादि बेचने छोटे - मोटे काम करने पड़े।


 

  धीरूभाई अंबानी को बिजनेस में मिली असफलता के बाद जॉइनिंग की नौकरी।

धीरूभाई अंबानी ने अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सबसे पहले फल और नाश्ता बेचने का काम शुरू किया लेकिन इसमें कुछ खास फायदा नहीं हुआ इसके बाद उन्होंने गांव के पास ही एक धार्मिक और पर्यटक को पर पूरी तरह निर्भर था जो कि साल में कुछ समय के लिए ही चलता था फिर किसी भी काम में सफल नहीं होने के बाद अपने पिता की सलाह में उन्होंने फिर नौकरी जॉइनिंग कर ली। तमाम असफलताओं मिलने के बाद धीरूभाई अंबानी ने अपने बड़े भाई रमणीक की मदद से यमन में नौकरी करने का फैसला लिया उन्होंने सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर अपनी पहली नौकरी की और करीब 2 साल तक नौकरी करने के बाद वह अपनी कार्यकुशलता और योग्यता के बल पर मैनेजर के पद पर पहुंच गए हालांकि नौकरी करने के दौरान भी वे हमेशा बिजनेस करने के अवसर तलाशते रहते थे। वे शुरुआत से ही बिजनेस करने का कोई भी मौका अxपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। शायद उनके इसी जुनून ने ही उन्हें दुनिया के सबसे सफल बिजनेसमैन की सूची में शामिल किया था वही धीरूभाई अंबानी  के बिजनेश के  प्रति उनका रुझान का अंदाजा उनके जीवन में घटित इस घटना के से लगाया जा सकता है कि जब वह सेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर ₹300 प्रति माह के हिसाब से नौकरी करते थे उस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को चाय महज 25 पैसे में मिलती थी धीरूभाई अंबानी को 25 पैसे की चाह ने खरीद कर एक बड़े रेस्टोरेंट में ₹1 की चाय पीने जाते थे वह ऐसा इसलिए करते थे ताकि उस रेस्टोरेंट में आने वाले बड़े बड़े व्यापारियों की बात सुन सके और बिजनेस की बारीकियों को समझ सके इस तरह धीरुभाई ने अपने बड़े बिजनेसमैन के सपने को पूरा करने के लिए अपने तरीके से बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ग्रहण की और बाद में वह एक सफल बिजनेसमैन बनकर खरे उतरे। इसके अलावा धीरूभाई अंबानी के अंदर बड़े बिजनेसमैन बनने की योग्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने यमन में प्रचलित चांदी के सिक्कों की गलाई लंदन की एक कंपनी में करने यह जानकर शुरू कर दी कि सिक्को की चांदी का मूल्य सिक्को के मूल्य से अधिक है।

                 रिलायंस कंपनी की शुरुआत

 आपको बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी यमन में रह रहे थे उसके कुछ समय बाद यमन में आजादी के लिए आंदोलन शुरू हो गए थे, जिसकी वजह से वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यापार के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद धीरूभाई अंबानी को साल 1962 में यमन से भारत लौटना पड़ा। इस दौरान धीरूभाई अंबानी जी के जीवन का वह दौर था उनके पास न तो नौकरी थी और ना ही कोई कारोबार की शुरूआत करने के लिए पूंजी ऐसे में उन्होंने अपने चचेरे भाई चंपकलाल दामिनी के साथ मिलकर पॉलिस्टर धागे और मसालों के आयात निर्यात का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने महज ₹15000 की राशि के साथ रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन की शुरुआत मस्जिद बंदर के नरसिम्हा एक छोटे से ऑफिस के साथ की थी और यहीं से रिलायंस कंपनी का उदय हुआ। भूलेश्वर स्थित जय हिंद स्टेट में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। आपको बता दें कि शुरआती दौर मैं बिजनेस टाइकून धीरूभाई अंबानी का इरादा पॉलिएस्टर यार्न को याद करने और मसाले निर्यात करने का था इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि रिलायंस काऑपरेशन का पहला ऑफिस नरसीनाथन स्टील में बना था। जो कि महज एक 350 स्क्वायर फीट का एक कमरा था जिसमें सिर्फ एक टेलीफोन, एक टेबल और तीन कुर्सियां थी। शुरू में उनके पास सिर्फ दो कर्मचारी थे और उनके काम में उनकी मदद करते थे। दरअसल धीरूभाई अंबानी और चंपकलाल दमानी दोनों का स्वभाव और बिजनेस करने का तरीका एक दूसरे से बिल्कुल अलग था इसी वजह से साल 1965 में धीरूभाई अंबानी ने चंपकलाल दामिनी के साथ बिजनेस में पार्टनरशिप खत्म कर दी। और अपने दम पर बिजनेस की शुरुआत की थी। दरअसल चंपकलाल दामिनी एक सतर्क व्यापारी थे और उन्हें सूट बनाने के माल में कोई रुचि नहीं थी जबकि धीरूभाई अंबानी को रिक्स उठाने वाला व्यापारी माना जाता था। इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने शोध के व्यापार में अपनी किस्मत आजमाई और सकारात्मक सोच के साथ इस बिजनेस की शुरुआत की। धीरूभाई अंबानी को अपने माल की कीमत पहले से ही बढ़ने की उम्मीद थी और उससे उन्होंने जो मुनाफा कमाया उनके बिजनेस ग्रोथ के लिए काफी अच्छा था।
    


बुधवार, 20 अप्रैल 2022

बालकृष्ण भट्ट जीवन परिचय (BalKrishna bhatt jivan parichay)

 बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय, बायोग्राफी,जन्म,निबंध,निवास - स्थान,माता - पिता,शिक्षा, वृति,विशेष परिस्थिति, रचनात्मक सक्रियता , रचनाएं और इनकी निबंध बातचीत

 

बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय - कृष्णा भट्ट का जन्म 23 जून 1844 ईसवी में हुआ था। इनका जन्म इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था उनके माता का नाम पार्वती देवी एवं पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था पिता एक व्यापारी थे और माता एक संस्कृत  महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाए। इनके प्रारंभ शिक्षा संस्कृत का अध्ययन 1867 में प्रयोग के मिशन स्कूल से एंट्रेंस की परीक्षा दी। इनके वित्ती 1869 तक प्रयोग के मिशन स्कूल में अध्यापन। 1885 में प्रयोग के सी•ए•बी• स्कूल में संस्कृत का अध्यापन। 1888 में प्रयोग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त किंतु अगर स्वभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी और उसके बाद से लेखन कार्य पर ही निर्भर हो गए। इनके परिस्थिति पिता के निधन पर आंतरिक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का  सामना। पैतृक घर छोड़ कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।

रचनात्मक सक्रियता : भारतेंदु हरिश्चंद्र की कृष्णा से हिंदी वर्धनी सभा प्रयोग की ओर से 1877 ईसवी में हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ क्या इसे वे 33 वर्षों तक चलाते रहें। इसमें नियमित रूप से सामाजिक साहित्य नैतिक राजनीतिक विषयों पर निबंध लिखते रहे 1881 में वेदों की युक्ति पूर्ण समीक्षा की 1886 में लाला श्रीनिवास दास के संजीव गीता स्वयंवर की कठोर आलोचना की। जीवन के अंतिम दिनों में हिंदी शब्दकोश के संपादन के लिए श्यामसुंदर दास द्वारा काशी आमंत्रित किंतु अच्छा हुआ ना होने पर अलग हो गए।

रचनाएं : उपनस्यास - रहस्य कथा , नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वेरी, रसाताल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव।

नाटक - पदमावती, किराता ज्रूरनीय ,वेणी संहार,  शिशुपाल वध, दमयंती या दमयंती स्वयंवर,  शिक्षा दान, चंद्रसेन, सीता बनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, कट्टर सुम की एक नकल, बृहन्नाला इंग्लैंड एंड वेरी और भारत जननी, भारतवर्ष और कली, दूरदेशी, एक रोगी और एक वैध, रेल का विकेट खेल, बाल विवाह और आदि।
प्रहसन - जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विखंडन आदि।
निबंध - 1000 से आसपास निबंध जिसमें 100 से ऊपर बहुत महत्वपूर्ण । भट्ट निबंधमाला नाम से दो खंडों में एक संग्रह प्रकाशित।

बालकृष्ण भट्ट की मुख्य बातें।
बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिंदी गद्य के अधीन निर्माताओं और अन्य रचनाओं में एक है। भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकारों में से एक है वह हिंदी के प्रारंभिक युग के प्रमुख और महान पत्रकार निबंधकार तथा हिंदी की आधुनिक आलोचना के प्रवर्तक को में अग्रणी है उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को अपने प्रतिभाशाली जनधर्मी और लेखन से एक नवीन धरातल नवीन की दिशा और नया रूप रंग और मानसा दिया। निश्चय ही इस बात पर युगांतरकारी कार्य में वे एकाकी नहीं थे, भारतेंदु हरिश्चंद्र प्रताप नारायण मिश्र प्रेम धन राधाचरण गोस्वामी जैसे महान साहित्यकार उनके साथ थे। 12 यह एक सब संबंध स्थापित मान्यता है कि अपने युग की सर्वाधिक सक्रिय मुखर और प्रदूषण समय तक संस्कृति निष्ठा के साथ दसवें लेखन द्वारा साहित्य सेवा करते रहने वाले समर्पित साहित्यकार थे बालकृष्ण भट्ट। भारतेंदु युग की दो तीन प्रमुख साहित्यकारों में एक जिनके अनवरत लेखन से भारतेंदु युग का रचनात्मक एवं व्यक्तित्व निर्मित हुआ द्वेदी युग का मूलाधार निर्मित हो सका। साहित्य केबल कल्पना विलास और मनोरंजन की वस्तु नहीं है अपितु वह जन समूह के जीत के विकास का संवाहक और जन संस्कृति के विकास प्रभाव का मूर्ति वाणी में अपादान है। जोगन लोक संस्कृति से ज्यादा और दिशा पता है यह और पूर्व प्रधान मान्यता भारतेंदु युग के साहित्य से बनती है और इसके दृश्यों में बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं। आधुनिक हिंदी नवजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में नए सिरे से अपनी भाषा और साहित्य की मौलिक लोकवादी प्रकृति एवं जाति निष्ठा की पहचान करते हुए तत्वों को दिशा और प्रभाव देने का कार्य महान लेखकों ने अपनी राजधानी गतिविधियों द्वारा संपन्न किया उनमें विशेष रूप से सक्रिय है।
        बालकृष्ण भट्ट गद्दाकार थे अपनी अभिरुचि मानसा और प्रतिभा से परिवेश और यथार्थ से संपूर्ण सरोकार रखने वाले लेखक पत्रकार। उनके कार्य की भाषा और कला की जलेबी परिवेश और व्यर्थ में ही थी। लो बिहार में बोलचाल बातचीत और अभिरुचि भक में मूर्ति भाषा और कला कि उनके गध का कलेवर बन जाती हैं। वह नवजागरन और स्वाधीनता संघर्ष का दौर था जिनमे भीतरी और बाहरी स्वदेशी और विदेशी शक्तियों से टकराव और संघर्ष है जागरूक का दिन लेखक की नियति थी यह टकराव संघर्ष भर्ती जी के लेखन में अंतर कितना तेज और तेवर बनकर उभरता है। भट्ट जी ने हिंदी प्रदीप पूरे पूरे एक उपन्यास लिखे नाटक वर्षा ऋतु निबंध ही उनकी वह अपने पिता है उनका लेखन पूरी शक्ति सामर्थ्य वैभव के साथ प्रकट हुआ है। श्रमिक समस्याओं पर मैंने जमकर लिखा है। स्त्री शिक्षा महिला स्वतंत्रता राजा प्रजा कृषि का व्यवस्था अंग्रेजी शिक्षा सुरक्षिता में परिवर्तन देश सेवा अंधविश्वास आदि विषयों पर उन्होंने खूब लिखा है। मानव भागों और भाषा साहित्य के विषयों पर भी खुलकर लिखा। पंचायत हाथों पर कलाकार मंत्रियों ने कितने लिखे कि उनकी संख्या सैकड़ों में हैं। रामचंद्र शुक्ल ने अधिकारियों ने अंग्रेजों साहित्य के एडिशन और स्टील की श्रेणी में रखा है। बातचीत शीर्षक निबंध उनकी निबंधकार व्यक्तित्व और निबंध कला के साथ-साथ भाषा शैली का प्रतिनिधित्व करता है प्रस्तुत निबंध जी के बारे में ऊपर कही गई बातों को सहज की प्रमाणित करता है।