रविवार, 27 मार्च 2022

अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते बल्कि अमीर लोग पैसे का अविष्कार करते हैं।

                     संसार मैं अक्सर चतुर नहीं

                      साहसी लोग आगे बढ़ते हैं।

9 साल की उम्र में रॉबट कियोसाक और उनके बचपन के मित्र को एक सहपाठी के बीच हाउस पर इसलिए आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि वह एक समृद्धि स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चे थे। उनके एक गरीब डैडी एक शिक्षक थे और अच्छे पैसे कमाते थे लेकिन महीना चलाने के लिए हमेशा झूझते रहते थे जब उन्होंने यह सलाह दी कि जाकर पैसे बनाओ तो रॉबट और उनके मित्र माइक ने यह कहा सचमुच करने की कोशिश की: उन्होंने टूथपेस्ट के खाली ट्यूब लिए जो उस वक्त जस्ते से बनते थे। उन्होंने  पिघलाय और नकली निकल बनाने के लिए प्लास्टर के सांचों का इस्तेमाल किया।

                 रॉबट के डैडी ने उन्हें जल्दी ही सही राह पर पहुंचा दिया। उन्होंने यह सलाह दी कि उन्हें माइक के डैडी से पूछना चाहिए जिन्होंने कभी 8 में ग्रेड की पढ़ाई पूरी नहीं की थी लेकिन वह बहुत से सफल व्यवसाई चलाते थे।

माइक के डैडी पुस्तक के अमीर डैडी उन्हें सिखाने के लिए तैयार हो गए लेकिन उनकी कुछ शर्ते थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों लड़कों को उनके कन्वेंशस स्टोर में हर शनिवार की सुबह 3 घंटे तक काम करना होगा जिनमें डिब्बों की दूरी साफ करना तथा दीगर सफाई शामिल थी। उन्होंने कहा कि हुए 10 सेंट प्रति घंटे की दर से पैसे देंगे। रॉबर्ट आमतौर पर यह 10 सेंट कॉमिक बुक्स पर सर्च कर देते थे।

इस निरस काम और कम वेतन से रॉबर्ट का जल्दी ही मोहभंग हो गया। जब उन्होंने अपने मित्र से कहा कि वह यह काम छोड़ने वाले हैं तो माइक ने कहा कि हमें डैडी ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि ऐसा होगा और रॉबर्ट को जाकर उनसे मिलना चाहिए रॉबर्ट के डैडी स्कूल टीचर थे और  व्याख्यान देते थे लेकिन माइक के डैडी  कम बोलते थे और एक बहुत अलग तरीके से सिखाते थे ऐसा रॉबर्ट को पता लगने वाला था।

अगले शनिवार की सुबह रॉबट माइक के डैडी से मिलने गए लेकिन आमिर डैडी ने रॉबर्ट से 1 घंटे तक धूल भरे अंधेरे लिविंग रूम में इंतजार कराया वह भन्न गए और भावुक हो गए जब उन्हें माइक के डैडी के सामने शिकायत करने का मौका मिला उन्होंने अग्र होकर कहा की वे लोभी है और उनके प्रति सम्मान नहीं दिखा रहे हैं। जब उन्होंने कहा कि माइक के डैडी ने अनुबंध के मुताबिक उन्हें कुछ नहीं सिखाया था तो वह शांति से असहमत हुए।

अमीर डैडी ने स्पष्ट किया कि जीवन आपको शब्दों से नहीं सिखाता है बल्कि चारों तरफ धकेल कर सिखाता है कुछ लोगों जीवन के दुखों को चुपचाप जेल जाते हैं बाकी नाराज हो जाते हैं और अपने बॉस या उनके परिजनों के खिलाफ भड़ास निकालते करते हैं लेकिन कुछ ऐसा लोग इससे सबक सीखते हैं और वास्तव में जीवन के धक्कों का स्वागत करते हैं क्योंकि इसका मतलब है कि उन्हें कुछ  सीखने की जरूरत है।

जो लोग या सबक नहीं सीखते हुए जीवन भर हर व्यक्ति को दोष देते रहते हैं और किसी बड़े अवसर का इंतजार करते हैं या सुरक्षित खेलने और कभी जोखिम ना लेने या बड़ी जीत हासिल ना करने का निर्णय लेते हैं।

उन्होंने रॉबर्ट को बताया कि वे और माइक पहले लोग थे जिन्होंने उनसे कभी पैसे बनाने का तरीका सीखना चाहा था उनके पास 150 से ज्यादा कर्मचारी थे और हालांकि उन्होंने नौकरी मांगी थी लेकिन उन्होंने रॉबर्ट और माइक की तरह कभी ज्ञान नहीं मांगा था।

इसलिए आमिर डैडी ने जीवन की तरह सिखाने की कोशिश में लड़कों को थोड़ा आसपास धकाया। रॉबर्ट ने पूछा कि उन्होंने क्या सबक सिखा सिवाय इसके कि आमिर डैडी ओछे थे और अपने कर्मचारियों का शोषण करते थे।अमीर डैडी ने इस बात पर उन्हें चुनौती दी और कहा कि ज्यादातर लोग दूसरों को दोष देते हैं जबकि वास्तव में उनका नजरिया ही समस्या होता है।

समस्या को कौन सुलझाएगा? उनका मस्तिष्क माइक के डैडी ने कहा वे चाहते थे कि रॉबर्ट यह सीखे कि पैसा कैसे काम करता है, ताकि वे इसे अपनी खातिर काम करा सके। वे रॉबर्ट के क्रोध को देख कर भी खुश थे क्योंकि क्रोध प्रेम के साथ मिलकर जोश को बनाता है जो सीखने का एक अहम घटक है।

उन्होंने आगे कहा कि पैसा लोगों की समस्याओं को नहीं सुलझा सकता। कई लोगों के पास भरी तनख्वाह वाली नौकरी तो होती है लेकिन इसके बावजूद भी पैसे की समस्याओं से धीरे रहते हैं जैसे रॉबर्ट के गरीब डैडी क्योंकि वह जानते ही नहीं है कि पैसे से अपनी खातिर कैसे काम कराएं।

उन्होंने कहा कि अगर रॉबर्ट ने यह सबक अभी नहीं सीखा तो उन्होंने 10 सेंट प्रति घंटे की नौकरी में जो महसूस किया था यानी निराशा और यह महसूस करना जैसे यह वेतन काफी नहीं था वैसा ही वे जीवनभर महसूस करते रहेंगे उन्होंने रॉबर्ट को टैक्स की अवधारणा बताइए और यह स्पष्ट किया कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग सरकार को उन पर टैक्स लगाने की अनुमति देते हैं लेकिन अमीर नहीं देते।

उन्होंने पूछा कि क्या रोबोट में अभी भी सीखने के प्रति जोश था। जब उन्होंने हां कहा तो अमीर डैडी ने उनसे कहा कि अब वे स्टोर में काम करने के लिए उन्हें पैसे नहीं देंगे। उन्होंने रॉबर्ट ने कहा कि वे इसके पीछे का अर्थ निकालने के लिए अपने दिमाग का इस्तेमाल करें।

रॉबर्ट और माइक ने 3 सप्ताह तक मुफ्त में काम किया माइक के डैडी आए और उन्हें बातचीत के लिए बाहर ले गए। उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने अब तक कोई चीज सीखी। वे कुछ नहीं सीख पाए थे। आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि अगर इस शब्द को नहीं सीखते हैं तो वह ज्यादातर लोगों जैसे होंगे जो जीवन भर काम पैसे के लिए कड़ी मेहनत करते रहते हैं। उन्होंने प्रति घंटे 25 सेंट वेतन का प्रस्ताव रखा जिसका बच्चों ने प्रतिरोध किया। उन्होंने इसे बढ़ाकर $1 प्रति घंटे कर दिया और फिर $2 लेकिन रॉबर्ट खामोश बने रहें  1 घंटे के $5 के अंतिम प्रस्ताव के बाद रॉबर्ट जान गए कि वे नहीं बिकेंगे।

अमीर डैडी ने कहा कि यह अच्छी बात थी कि उनकी कोई कीमत नहीं थी। ज्यादातर लोगों की होती है क्योंकि डर और लोभ उनके जीवन को नियंत्रित करता है गरीब का डर उनसे कड़ी मेहनत कराता है और वेतन कमाबाता है लेकिन एक बार जब उनके पास वेतन आ जाता है तो लोभवश वे उन तमाम चीजों के बारे में सोचने लगते हैं जिन्हें वे खरीद सकते हैं इससे उन्हें ज्यादा पैसे की जरूरत महसूस होती है ताकि वह ज्यादा खर्च कर सके इसी को अमीर डैडी चूहा दौड़ कहते हैं।

उन्होंने लड़कों को बताया कि पहला कदम खुद के सामने यह स्वीकार करना है कि वे क्या महसूस कर रहे हैं अक्सर लोग टाकिर्क दृष्टि से सोचने के बजाय अपनी भावनाओं के तहत प्रक्रिया करते हैं वह यह स्वीकार करने से डरते हैं कि पैसा ही उनके जीवन को चला रहा है इसलिए पैसा उन्हें नियंत्रित करता है।

ऐसी बात नहीं है कि इस डर का सामना सिर्फ गरीब ही जो करते हैं अमीर लोगों को ही अक्सर डर लगता है। अमीर डैडी लड़कों को सिर्फ अमीर बनना ही नहीं सिखाना चाहते थे क्योंकि पैसे से समस्या नहीं सुलझती है।

आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि स्कूल महत्वपूर्ण है लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह शुरुआत नहीं बल्कि अंत है। और कुंजी यह है कि लड़के सोचने के लिए अपने भावनाओं का इस्तेमाल करना सीखे अपनी भावनाओं से सोचना ना सीखें उन्हें अपने विचारों का चयन करना सीखना चाहिए।

आमिर डैडी ने उन्हें बताया कि वे पैसा कमाने के तरीके पर निगाह रखें जिस पल आप किसी अवसर को देख लेते हैं आप जीवन भर अफसरों को देखने लगेंगे।

लड़कों ने ऐसा ही किया और जल्द ही उन्हें एक लाइब्रेरी बनाने का अवसर दिखा जहां बच्चे प्रवेश शुल्क देकर 2 घंटे में मनचाही कॉमिक पुस्तकें पढ़ सकते थे बिना बीकी कॉमिक बुक्स जो कन्वीनियंस स्टोर से फेंक दी जाती थी।

उन्होंने भारी मुनाफा कमाया और लाइब्रेरी का यह व्यवसाय 3 महीने तक अच्छी तरह चला लेकिन फिर लाइब्रेरी में फसाद होने की वजह से इसे बंद करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में पैसे से अपनी खातिर काम कराने का पहला सबक सीख लिया था। वह ज्यादा सीखने के लिए तैयार थे और माइक के डैडी उन्हें सिखाने के लिए तैयार थे।





शुक्रवार, 18 मार्च 2022

सभी_महिलाओ_ और लड़कियों_को_आदर_सहित_समर्पित यह फैसला कीजिए कौन कैसा है। लड़का या लड़कियां



लड़के ने नम्बर मांगा आप ने दे दिया... 

लड़के ने तस्वीर मांगी आप ने दे दी...

लड़के ने वीडियो कॉल के लिए कहा आप ने कर ली...

लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा आप ने हटा दिया...

लड़के ने कुछ देखने की ख्वाहिश की आप ने पूरी कर दी...

लड़के ने मिलने को कहा आप माँ बाप को धोखा देकर आशिक़ से मिलने पहुंच गयीं...

लड़के ने बाग में बैठ कर आप की तारीफ़ करते हुए आपको सरसब्ज़ बाग दिखाए आपने देख लिये...

फिर जूस कार्नर पर जूस पीते वक़्त लड़के ने हाथ लगाया, इशारे किये, मगर कोई बात नहीं अब नया ज़माना है यह सब तो चलता ही है...

फिर लड़के ने होटल में कमरा लेने की बात की, आप ने शर्माते हुए इंकार कर दिया, कि शादी से पहले यह सब अच्छा तो नहीं लगता न...

फिर दो तीन बार कहने पर आप तैयार हो गयीं होटल के कमरे में जाने के लिए...

आप दोनों ने मिल कर खूब एंजॉय किया...

अंडरस्टेंडिंग के नाम पर दुल्हा दुल्हन बन गए बस बच्चा पैदा न हो इस पर ध्यान दिया...

फिर एक दिन झगड़ा हुआ और सब खत्म क्योंकि हराम रिश्तों का अंजाम कुछ ऐसा ही होता है...

लेकिन लेकिन...

यहां सरासर मर्द गलत नहीं है, वह भेड़िया है, वह मुजरिम है, वह सबकुछ है...

क्योंकि आप ने तो तस्वीर नहीं दी थी वह जबर्दस्ती आपके मोबाइल में घुस कर ले गया था...

आप ने तो अपना नम्बर नहीं दिया वह लड़का खुद आप के मोबाइल से नम्बर ले गया था...

आप ने तो वीडियो कॉल नहीं की वह लड़का खुद आप के घर पहुंच गया था आपको लाइव देखने...

जूस कार्नर पर भी जबरदस्ती ले गया था गन प्वाइंट पर...

होटल के कमरे तक भी वह आपको जबर्दस्ती आपके घर से ले गया था...

तो मुजरिम तो सिर्फ लड़का है आप तो बिल्कुल भी नहीं...

बच्ची हैं आप कोई चार साल की?

आपको समझ नहीं आती?

यह कचरे में पड़ी लाशें देख कर भी आपको अक़्ल नहीं आती?

यह बिना सर के मिलने वाले धड़ आपकी अक़्ल पर कोई चोट नहीं देते?

यह सोशल मीडिया पर आए दिन ज़्यादती के बढ़ती हुई घटना आपको कुछ नहीं बताती?

जूस कार्नर पर जाना, अपनी नंगी तस्वीर किसी गैर आदमी या लड़के को देना...

आपको नहीं पता था कि एक होटल के कमरे में या चारदीवारी में जिस्मों की प्यास बुझाई जाती है, 

सब पता था आपको, सब पता है आपको...

होटल के कमरे में मुहब्बत के अफसाने नहीं लिखे जाते,वहां कोई इबादत नही होती है

फिर शिकायत होती है के चार लड़कों ने ग्रुप रेप कर दिया... 

क्या लगता है वह आपका जो आपकी इज्ज़त का ख्याल रखे जो खुद आपको इसी मकसद के लिए लेकर जा रहा है?

अपनी सीमा में रहेंगी तो आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता...

जिस्म के भूखो से दूर ही रहे लड़का हो या लड़की प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम ना करे प्यार दिल देखकर करे ना कि जिस्म देखकर l❣ जब तक तुम साथ नही दोगी तब तक किसी लड़के की कोई औकात नही हैं कि वो तुम्हे किसी होटल के रूम तक ले जा सके।।।।गलत लगे तो  मुझे माफ कीजिएगा!!  

      (तो आपलोग हमें फॉलो जरूर करे)

सोमवार, 14 मार्च 2022

मुख्यमंत्री वृद्धजन योजना क्या है? कैसे लाभ ले सकते हैं इस योजना है जरूर जान लीजिए।

बिहार सरकार ने 60 साल या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए मुख्यमंत्री वृद्धाजन पेंशन योजना की घोषणा की है । इस योजना के तहत 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को सरकार पेंशन देगी। सरकार की इस योजना का फायदा उन लोगों को नहीं मिल पाएगा जो सरकारी नौकरियों से रिटायर हुए हैं सरकार का कहना है कि बिहार में बहुत से ऐसे नागरिक है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उम्र के इस पड़ाव में वह काम करने में सक्षम नहीं है। रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए उन्हें आश्रित रहना पड़ता है ऐसे में वृद्ध नागरिकों को आर्थिक मदद के इरादे से इस योजना की शुरुआत की गई है। सरकार के अनुसार अब तक किसी पेंशन योजनाओं से वंचित राज्य के वृद्ध जनों को अन्य पेंशन योजना के तहत इस योजना के तहत ₹400 मासिक पेंशन मिलेगी इस योजना के मुख्य  बातें हैं - 

• बिहार 60 वर्ष और उसके ऊपर के सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला पहला राज्य बन गया है।

• बिहार सरकार ने 1 मार्च 2019 को यूनिवर्सल ओल्ड एज पेंशन स्कीम लॉन्च की है।

• इस योजना का लाभ सभी जातियों और हर वर्ग के उस बुजुर्गों को मिलेगा जिससे अब तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई पेंशन नहीं मिलती है।

• इसी योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब लोगों को प्रतिमाह ₹400 और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रति माह ₹500 मिलेंगे।

• अन्य राज्यों में वृद्धावस्था पेंशन केवल बीपीएल परिवारों sc-st विधवा महिलाओं और विकलांगों को मिलती है हालांकि बिहार में हर एक पुरुष या महिला की उम्र 60 या उससे ऊपर है और उन्हें राज्य सरकार या केंद्र सरकार से अब तक कोई पेंशन नहीं मिल रही है तो वे मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत पेंशन के हकदार होंगे।

• पहले से गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा था। विधवा पेंशन, दिव्यांगजनों को पेंशन जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही थी लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के सभी वृद्धजनों को चाहे स्त्री हो या पुरुष जी ने केंद्र या राज्य सरकार से कोई वेतन पेंशन परिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है उन्हें इसका लाभ देने की योजना बनाई और इसे लागू कर दिया गया है।

• इस योजना का लाभ करीब 35 से 36 लाख बुजुर्गों को मिलेगा जो अब तक किसी योजना के तहत पेंशन नहीं पाते हैं।

रविवार, 13 मार्च 2022

बिहार का प्राचीन इतिहास क्या है?

• पूर्व ऐतिहासिक काल में बिहार के विभिन्न भागों में आदिमानव रहते थे। आदिमानव से जुड़े विभिन्न प्रकार के पुरातात्विक साक्षी एवं सामग्रियां विभिन्न जगहों से प्राप्त हुई है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल जहां से आदिमानव से जुड़ी चीजें मिली है वे हैं : मुंगेर,चिरांद(सरण) ,चेचर( वैशाली) ,नालंदा,सोनपुर, मनेर (पटना) आदि।

• पूर्व प प्रस्तर युग (100000 ई पूर्व से पहले ) के औजार मिले हैं। इसमें पत्थर की कुल्हाड़ी की फल, चाकू और खुरप के रूप में प्रयोग किए जाने वाले पत्थर के टुकड़े हैं। यह अवशेष मुंगेर और नालंदा जिले से प्राप्त हुए हैं।

• मध्य प्रस्तर युग (100000 ई पूर्व से 40000 ई पूर्व) के अवशेषों में छोटे आकार के पत्थर के बने सामान है जो तेज धारा एवं नोक वाले हैं। इनके अवशेष मुंगेर से मिले हैं।

• नव प्रस्तर युग (4000 से 2500 ई पूर्व) के अवशेष बिहार में चिरांद और चेचर जिलों से प्राप्त हुए हैं। इनमें नौ केवल पत्थर के सूक्ष्म औजर प्राप्त हुए हैं बल्कि हड्डियों के सामान भी मिले हैं।

• उत्तर वैदिक काल में (1000 ई पूर्व से 600 ई पूर्व ) मैं आर्यों का विस्तार बिहार में प्रारंभ हुआ। इस विस्तार में लौह - प्रौद्योगिकी की देन निर्णायक रही । 800 ई पूर्व रचित शतपथ ब्राह्मण में गांगेय घाटी के क्षेत्र में आर्यों द्वारा जंगलों का जलाकर और काटकर साफ करने का उल्लेख मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव द्वारा अपने पुरोहित गौतम राहु गन की अग्नि का पीछा करते हुए वर्तमान गंडक नदी 

( सदानीरा) तक पहुंचने की बात कही गई है।

• प्राचीन भारत के सोलह(16) महाजनपदों में प्रमुख थे - मगध और अंग। मगध के अंतर्गत वर्तमान बिहार के पटना तथा गया जिलों के क्षेत्र शामिल थे, जबकि अंग भागलपुर के आसपास के क्षेत्र को कहते थे।

• भांग के तीन अंतिम राजाओं में प्रथम दाधिवाहन थे, जिनकी की पुत्री चांदना महावीर के धर्म को स्वीकार करने वाली प्रथम महिला थी।

• वज्जी 8 गन राज्यों का संघ था। इसमें वैशाली के लिचिछ्वी भी मिथिला के विजेता कुंडाग्राम के ज्ञात के विशेष रूप से विख्यात थे। गणराज्य के प्रमुख सिद्धार्थ के यहां महावीर का जन्म 540 ईसवी पूर्व में कुंडल ग्राम में हुआ था। महावीर की माता त्रिशला लिच्छवी गणराज्य के प्रमुख घटक की बहन थी। महावीर स्वामी ने 468 ईसवी पूर्व में पावापुरी नामक स्थान पर निर्माण प्राप्त किया।

• वैशाली बौद्ध काल में सबसे शक्तिशाली राजीव था। इसकी स्थापना सूर्यवंशी इक्ष्वाकु के पुत्र विशाल ने की थी। महाभाग्य जातक में वैशाली को एक धनी समृद्ध साली तथा घनी आबादी वाला नगर कहा गया। जैन साहित्य से पता चलता है कि मगध के शासक अजातशत्रु के विरुद्ध चेतक ने मलका सी तथा कौशल के साथ मिलकर एक सम्मिलित मोर्चा बनाया था।

• यजुर्वेद में विदेश राज्य का उल्लेख मिलता है। यहां के राजवंश की शुरुआत इक्ष्वाकु के पुत्र ने भी विदेह से मानी जाती है जो सूर्यवंशी थे। दूसरे राजा मीठी जनक विदेह मिथिला क्या स्थापना की थी। इसके बाद से यहां के सभी राजाओं के नाम में जनक सब जुड़ने लगा। इस वंश के प्रसिद्धि शासक जनक विधि के शासन कल में विद्वानों की एक प्रतियोगिता हुई थी जिनमें याज्ञवल्क्य विजय हुए। इनकी जानकारी बृहदारण्यक उपनिषद में मिलती है।

•  अलकप्प के बुली गणराज आधुनिक बिहार राज्य के शहानाबाद ,आरा और मुजफ्फरपुर जिलों के बीच स्थित था। बुली लोग बौद्ध धर्म के अनुयाई थे। महाप्रिनिवर्ण सूत्र के अनुसार मोदी की मृत्यु के पश्चात उन्होंने उनके अवशेषों का एक भाग प्राप्त किया तथा उस पर स्तूप का निर्माण करवाया था।

शनिवार, 12 मार्च 2022

लोक शिकायत निवारण कानून क्या है ?लोक शिकायत निवारण कानून कैसे सूचना दे सकते हैं, लोक अदालत में शिकायत कैसे करें, बिहार लोक शिकायत निवारण कानून क्या है?

• आम जनता की समस्याएं एवं शिकायतों का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। शिकायतों की सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने की ठोस पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था कायम करने के उद्देश्य से गुड - गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार द्वारा संपूर्ण क्रांति दिवस एवं विश्व पर्यावरण दिवस दिनांक 5 जून 2016 को पूरे राज्य में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 में लागू किया गया है।

• अब जनता को उनकी शिकायतों की सुनवाई एवं उसके निवारण के अब सर का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं किसी शिकायत पर की गई कार्रवाई अथवा पारित निर्णय की सूचना भी प्राप्त करने का उन्हें वैधानिक अधिकार अधिनियम द्वारा प्राप्त हुआ है। यह अपने आप में अभिनव प्रयोग है। बिहार देश का ऐसा पहला राज्य है जहां आम लोगों को उनके परिवार पर सुनवाई के साथ-साथ उनके निवारण का भी लागू कानूनी अधिकार प्रदान किया गया है।

• आम जनता को राज्य सरकार द्वारा राज्य में चलाई जा रही किसी योजना कार्यक्रम या सेवा में संबंध में कोई लाभ या अनुतोष मांगने हेतु परिवाद दायर करने का अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं ऐसी किसी योजना कार्यक्रम या सेवा का फायदा पहुंचाने में विफल रहने पर अथवा विलंब होने पर भी परिवाद दायर किया जा सकता है। किसी लोक सेवक द्वारा राज्य में प्रभावी किसी विधि लिपि सेवा कार्यक्रम या योजना के उल्लंघन से उत्पन्न किसी मामले में भी आम जनता को शिकायत करने का अधिकार इस अधिनियम के द्वारा प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा निशुल्क परिवाद दायर करने की व्यवस्था की गई है।

• राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम को कार्य न विनती करने के लिए स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा विकसित करते हुए राज्य के सभी 101 अनुमंडलो, सभी आरती जिला मुख्यालय के साथ सभी 40 विभागों के लिए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पद सृजित किए गए हैं और इन पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है। इन कार्यालयों में सहयोगी कर्मियों के रूप में बारिश होती 30 पद सृजित करते हुए इन पर नियोजन भी किया गया है।

• परिवाद के निवारण की दृष्टि पथ में रखकर इस अधिनियम के तहत अपील दायर करने का प्रावधान किया गया है तथा यदि कोई लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अथवा कोई अन्य लोग प्राधिकार किया प्रथम अपीलीय प्राधिकार बिना किसी पर्याप्त और युक्ति युक्त कारण के नियम समय सीमा के भीतर सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने में विफल रहता है तो उस पर दंड आरोपित करने का प्रावधान इस अधिनियम मैं क्या गया है, जिसकी वसूली उस पदाधिकारी के वेतन से की जाएगी। इस अधिनियम की सफलता इसी बात से साबित होती है कि इतने कम दिनों के अंदर लगभग 82122 आवेदन पत्र इस व्यवस्था के तहत प्राप्त हुए हैं, जिसमें लगभग 60908 मामलों का समय सीमा के भीतर निष्पादन किया जा चुका है। शेष वादों में सुनवाई जारी है। परिवार प्राप्त करने के लिए सभी विभाग, जिला एवं अनुमंडल में लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र बनाए गए हैं।

• शिकायतों की प्राप्ति के लिए सूचना भवन में राज्य लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र का भी निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति डाक द्वारा ऑनलाइन वेब पोर्टल http/lokshikayat.Bihar.gov. In अथवा ईमेल infolokshikayat - bih @gov. in से भी परिवाद दर्ज करा सकता है। परिवाद दर्ज कराने तथा दर्ज कराने के परिवाद पर करवाई की स्थिति जानने के लिए टोल फ्री नंबर वाला कॉल सेंटर (नंबर 18003456284) भी स्थापित किया गया है।


सोमवार, 7 मार्च 2022

मुजफ्फरपुर जिला की मुख्य बातें क्या क्या है?

  • मुजफ्फरपुर का मुख्यालय कहां है - मुजफ्फरपुर

• गठन कब हुआ था - 1875

• क्षेत्रफल कितना है - 3172 वर्ग किलोमीटर

• जनसंख्या कितना है - 4801062

• जनसंख्या घनत्व कितना है - 1514

• कुल साक्षरता कितना है - 63.43%

• पुरुष साक्षरता कितना है - 71.28%

• महिला साक्षरता कितना है - 54.67%

• लिंगनुपात कितना है - 900

• अनुमंडल कितना है और कौन कौन सी है- 2(मुजफ्फर पूर्वी, मुजफ्फर पश्चिमी)

• प्रखंड कितना है और कौन कौन सी है - 16(साहेबगंज,बरूराज, पारू,सरैया,मड़वन, कांटी,मीनापुर, बोचहां,औराई, कटरा,गयघाट, बंदरा,ढोली,मुसहरी, कुढहनी,सकरा)

• ग्राम पंचायत कितना है - 387

• ग्राम कितना है - 1811

• लोकसभा क्षेत्र कितना और कौन कौन सी है - 1(मुजफ्फर)

• विधानसभा क्षेत्र कितना है और कौन कौन सी है - 10(मुजफ्फरपुर,साहेबगंज,औराई,कांटी, बोचहां,बरूराज,मीनापुर,गायघाट,पारू,सकरा)

• प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी - नथुनी महतो, भरत ठाकुर, महेंद्र सिंह, रामचंद्र शर्मा, राम परीक्षण शर्मा, सहदेव शर्मा, डॉ सूर्यदेव सिंह, दीप नारायण सिंह, जगन्नाथ साहू, लक्ष्मी गुप्ता, बावन सिंह दास,वीर प्रसाद साहू,मंजूर अहसन एजाजी,महादेव शाहू

• प्रमुख मेला कौन सी है - मकर सक्रांति का मेला,हरदी मेला

• प्रमुख नदी कौन सी है - बागमती, बूढ़ी गंडक 

 •मिट्टी कौन सी है - जलोढ मिट्टी,ताल मिट्टी,

• उद्योग कौन सी है - चीनी उद्योग,थर्मल पावर,वैगन फैक्टरी, सूती वस्त्र उद्योग आदि।

• पर्यटक स्थल कौन कौन सी है - शहीद खुदीराम स्मारक 

• एसटीडी (STD) कोड - 0621 

• प्रमुख व्यक्तित्व - रामवृक्ष बेनीपुरी


















रविवार, 6 मार्च 2022

बिहार में बेरोजगारी के कारण एवं निदान कैसे हुआ ।

• बेरोजगारी एक आर्थिक समस्या है। अर्थव्यवस्था में जब प्रचलित मजदूरी पर व्यक्ति काम करता है उसे काम नहीं मिलता है तब उसे बेरोजगार कहा जाता है।

• देश की कुल बेरोजगार व्यक्तियों का 6.65% बिहार राज्य में निवास करता है। बिहार में कुल श्रमशक्ति का 2.3% बेरोजगार है, जबकि भारतवर्ष के कुल श्रमशक्ति का 2.8% प्रतिशत बेरोजगार है।

• भारतवर्ष की कुल  रोजगार व्यक्तियों का 11.13% बिहार• राज्य में निवास करता है। योजना आयोग के अनुसार भारत के कुल बेरोजगार का 7 से 8 % बिहार राज्य में निवास करता है।

• प्रथम पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण रोजगार भर्ती हेतु समुदायिक विकास योजना को लागू क्या गया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन किया जा सके।

• बिहार सरकार ने दुतीय योजना 1965 से 61 में केंद्र सरकार के साथ वृहत उद्योगों तथा भारी उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्रों में स्थापित किया जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित किए गए।

• तृतीय पंचवर्षीय योजना में बृहत उद्योगों का विस्तार चलता रहा तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रम को और सुदृत किया गया ताकि गावों में रोजगार सृजित किए जाए।

• बिहार सरकार ने रोजगार सृजन हेतु चतुर्थ पंचवर्षीय योजना में निम्नांकित कार्यक्रम चलाए।

• रोजगार कार्यक्रम के लिए पंचवर्षीय योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई नए विस्तृत रोजगार कार्यक्रम लागू किए गए 

• आठवीं पंचवर्षीय योजना में पुराने रोजगार कार्यक्रमों में परिवर्तन किया गया तथा नई रोजगार  कार्यक्रम भी लागू किए गए

• नवमी पंचवर्षीय योजना में बिहार सरकार ने स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना लागू किया।

• 11वीं  पंचवर्षीय योजना में प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

• 12वीं पंचवर्षीय योजना में युवाओं को स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर लोन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वर्ष 2015 में शुरुआत की गई।