शनिवार, 12 मार्च 2022

लोक शिकायत निवारण कानून क्या है ?लोक शिकायत निवारण कानून कैसे सूचना दे सकते हैं, लोक अदालत में शिकायत कैसे करें, बिहार लोक शिकायत निवारण कानून क्या है?

• आम जनता की समस्याएं एवं शिकायतों का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। शिकायतों की सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने की ठोस पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था कायम करने के उद्देश्य से गुड - गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार द्वारा संपूर्ण क्रांति दिवस एवं विश्व पर्यावरण दिवस दिनांक 5 जून 2016 को पूरे राज्य में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 में लागू किया गया है।

• अब जनता को उनकी शिकायतों की सुनवाई एवं उसके निवारण के अब सर का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं किसी शिकायत पर की गई कार्रवाई अथवा पारित निर्णय की सूचना भी प्राप्त करने का उन्हें वैधानिक अधिकार अधिनियम द्वारा प्राप्त हुआ है। यह अपने आप में अभिनव प्रयोग है। बिहार देश का ऐसा पहला राज्य है जहां आम लोगों को उनके परिवार पर सुनवाई के साथ-साथ उनके निवारण का भी लागू कानूनी अधिकार प्रदान किया गया है।

• आम जनता को राज्य सरकार द्वारा राज्य में चलाई जा रही किसी योजना कार्यक्रम या सेवा में संबंध में कोई लाभ या अनुतोष मांगने हेतु परिवाद दायर करने का अधिकार प्राप्त हो गया है। इतना ही नहीं ऐसी किसी योजना कार्यक्रम या सेवा का फायदा पहुंचाने में विफल रहने पर अथवा विलंब होने पर भी परिवाद दायर किया जा सकता है। किसी लोक सेवक द्वारा राज्य में प्रभावी किसी विधि लिपि सेवा कार्यक्रम या योजना के उल्लंघन से उत्पन्न किसी मामले में भी आम जनता को शिकायत करने का अधिकार इस अधिनियम के द्वारा प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा निशुल्क परिवाद दायर करने की व्यवस्था की गई है।

• राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम को कार्य न विनती करने के लिए स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा विकसित करते हुए राज्य के सभी 101 अनुमंडलो, सभी आरती जिला मुख्यालय के साथ सभी 40 विभागों के लिए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पद सृजित किए गए हैं और इन पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है। इन कार्यालयों में सहयोगी कर्मियों के रूप में बारिश होती 30 पद सृजित करते हुए इन पर नियोजन भी किया गया है।

• परिवाद के निवारण की दृष्टि पथ में रखकर इस अधिनियम के तहत अपील दायर करने का प्रावधान किया गया है तथा यदि कोई लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अथवा कोई अन्य लोग प्राधिकार किया प्रथम अपीलीय प्राधिकार बिना किसी पर्याप्त और युक्ति युक्त कारण के नियम समय सीमा के भीतर सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने में विफल रहता है तो उस पर दंड आरोपित करने का प्रावधान इस अधिनियम मैं क्या गया है, जिसकी वसूली उस पदाधिकारी के वेतन से की जाएगी। इस अधिनियम की सफलता इसी बात से साबित होती है कि इतने कम दिनों के अंदर लगभग 82122 आवेदन पत्र इस व्यवस्था के तहत प्राप्त हुए हैं, जिसमें लगभग 60908 मामलों का समय सीमा के भीतर निष्पादन किया जा चुका है। शेष वादों में सुनवाई जारी है। परिवार प्राप्त करने के लिए सभी विभाग, जिला एवं अनुमंडल में लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र बनाए गए हैं।

• शिकायतों की प्राप्ति के लिए सूचना भवन में राज्य लोक शिकायत प्राप्ति केंद्र का भी निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति डाक द्वारा ऑनलाइन वेब पोर्टल http/lokshikayat.Bihar.gov. In अथवा ईमेल infolokshikayat - bih @gov. in से भी परिवाद दर्ज करा सकता है। परिवाद दर्ज कराने तथा दर्ज कराने के परिवाद पर करवाई की स्थिति जानने के लिए टोल फ्री नंबर वाला कॉल सेंटर (नंबर 18003456284) भी स्थापित किया गया है।


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