• आधुनिक पुलिस नियंत्रण कक्ष - पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 24 * 7 आधार पर हेल्पलाइन सहित पुलिस नियंत्रण कक्ष कार्यरत किया गया है। इसमें और टेलीफोन स्थापित किए गए हैं जिनमें कंप्यूटर एवं अन्य उपस्कर भी शामिल है। इस नियंत्रण कक्ष में आम नागरिकों द्वारा दूरभाष के माध्यम से किसी भी प्रकार की शिकायत परिवाद दर्ज कराई जा सकती है। परिवाद शिकायत दर्ज होने के पश्चात उस व्यक्ति को एक नंबर भी आ जाता है तथा संबंधित परिवार शिकायत संबंधित थाना अध्यक्ष एवं पुलिस अध्यक्ष पुलिस उपाध्यक्ष को अविलंब त्वरित कार्यवाही हेतु भेजा जाता है। साथ ही उनसे कृत्य कार्रवाई की सूचना प्राप्त कर शिकायतकर्ता परिवादी को सूचित किया जाता है।
• थाना स्तर पर अनुसंधान तथा विधि व्यवस्था का पृथक्करण - पुलिस सुधार की कड़ी में थाना स्तर पर अनुसंधान एवं विधि व्यवस्था कार्य हेतु पता करें कार्यों का पृथक्करण किया गया है। इससे पुलिस व्यवस्था अधिकारी उन्मुख बनेगी तथा अनुसंधान के स्तर में सुधार आएगा साथी विधि व्यवस्था की समस्याओं से त्वरित रूप से निबटने में मदद मिलेगी। इसके तहत प्रथम चरण में पटना शहर के 23 थाना, तत्पश्चात अनुमंडल स्तर के 155 थाना एवं वर्तमान में राज्य के सभी थाना में इसे लागू किया गया है। इस व्यवस्था के लिए आवश्यक मानव संसाधन का आकलन पुलिस मुख्यालय स्तर पर किया जा सकत है तथा पदाधिकारियों के दोनों कंधों में पदस्थापन के मापदंड निर्धारित किए गए हैं।
• सुरक्षित शहर हेतु (CCTV) सीसीटीवी कैमरा तंत्र की अधिष्ठापन योजना - इसके तहत राज्य के मुख्य शहरों में नागरिकों को सुरक्षा का एहसास करने, विधि व्यवस्था एवं अपराध की समस्या से प्रभावित स्थानों पर नियंत्रण निगरानी रखने तथा Response time को कम करने हेतु प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा प्रणाली का अधिष्ठापन पर किया जाएगा, जिसे नियंत्रण कक्ष एवं प्रतिक्रिया तंत्र के साथ एकीकृत किया जा रहा है इसका नियंत्रण जिला पुलिस अध्यक्ष कार्यालय में रहेगा।
• बिहार पुलिस अवर सेवा चयन आयोग का गठन - मैं पुलिस अवर निरीक्षक एवं अन्य भर्ती धारी विभागों में समक्ष पदों पर चयन का कार्य पूर्व से बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा किया जा रहा है। बस में लगने के कारण समय पर नियुक्ति नहीं हो पाती थी। किस समस्या से निपटने हेतु बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग अधिनियम 2016 के तहत गिरी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण आदेश बिहार पुलिस अवर सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के पदों का सृजन किया जा चुका है। इससे अवर निरीक्षक सर्वांग क नियुक्ति में गति आएगी।
• पुलिस थाना में महिला शौचालय स्नानागार की व्यवस्था - राज्य सरकार के द्वारा सरकारी सेवाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए 35% आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसी कड़ी में पुलिस में भी यह व्यवस्था लागू की गई है। महिला पुलिस कर्मी की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा 40 पुलिस सेवा में उपस्थित 559 थानों में महिला पुलिस कर्मियों एवं थाना में आने वाली महिला आगंतुकों के लिए 02 आदत शौचालय वह स्नानागार 41 महिला शौचालय एवं 69 पांच सीटें महिला शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। कीर्यानवन को विकेंद्रीकृत करते हुए बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के नियंत्रण में संबंधित थानाध्यक्ष को पूर्व अनुमोदित नक्से एवं प्रकलित राशि उपलब्ध कराकर कीर्यानिवत किया गया है।
• पुलिस अधिकारियों के लिए स्थानांतरण नीति का निर्धारण कर आदेश निर्गत कर दिया गया है।
• पुलिस अध्यक्ष के कार्य एवं मूल्यांकन संकेत को की पहचान के साथ-साथ अनुसंधान पदाधिकारी विधि व्यवस्था पदाधिकारी निरीक्षकों एवं पुलिस उपाधीक्षक ओं का कार्य निष्पादन संकेतक ओं का सिस्टम निर्धारण पालीवाल किया गया है एवं तंत्र संबंधी आदेश निर्गत किया गया है।
• बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना - प्रारंभ किस वर्ष किया गया है इस योजना के तहत राज्य के निवासियों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में रख ऐतिहासिक महत्व, बहुलुल्य मूर्तियां, मुकुट, आभूषण यादी की रक्षा हेतु मंदिरों की पक्की मजबूत चहारदीवारी का निर्माण कराया जाना है। इसके अंतर्गत बिहार धार्मिक न्यास परिषद में निबंधित कम से कम 60 वर्ष पहले निर्मित मंदिर केवम वह मंदिर जिसमें बिहार पर्यटन की संभावना बढ़ती है तथा जहां विधि व्यवस्थ एवं सुरक्षा का प्रश्न उत्पन्न होता है उनकी सुरक्षा के लिए चहारदीवारी का निर्माण किया जाना है।
• • थाना में सी.सी.टी. वी. तंत्र का अधिष्ठापन - राज्य के सभी थाना निगम हाजत मैं सीसीटीवी कैमरे लगाने हेतु ₹242.26 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई है, जिसमें हिरासत के लिए गए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत में कमी आएगी तथा आम नागरिकों का मानव अधिकार एवं आत्मसम्मान का संरक्षण सुरक्षित होगा।
• आर्थिक अपराध इकाई में साइबर क्षमता - देश मैं साइबर अपराध के बढ़ते चलन को देखते हुए राज्य की आर्थिक अपराध इकाई को इस दिशा में सदस्य एवं संबंधित करने के उद्देश्य से मुख्यालय एवं जिला स्तर पर साइबरक्राइम एंड सोशल मीडिया लैब का गठन किया जा रहा है क्योंकि इस अपराध में प्राप्त सूचना पर तत्काल विशेषता शंकर कवाई की आवश्यकता होती है। देरी होने पर न सिर्फ सूत्र समाप्त हो जाता है बल्कि साक्ष्य भी नष्ट हो जाता है
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